तीन तलाक़ पर सुनवाई कर रहे ये 'पंच परमेश्वर'

  • 11 मई 2017
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सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की एक बेंच तीन तलाक़ पर सुनवाई कर रहा है. तीन तलाक़ मुसलमानों से जुड़ी एक विवादित प्रथा है.

इस विवाद को निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की जो बेंच बनाई है उसमें सभी अलग-अलग धर्मों से हैं.

जस्टिस कुरियन जोसेफ ईसाई, आरएफ़ नरीमन पारसी, यूयू ललित हिन्दू, अब्दुल नज़ीर मुस्लिम और इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर सिख हैं.

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फूलवती ने कैसे खोला 'तीन तलाक़' का पिटारा?

जेएस खेहर ने फ़ैसला किया है कि तीन तलाक़ पर सुनवाई गर्मी की छुट्टियों में पूरी कर ली जाएगी. जस्टिस खेहर अगस्त में रिटायर होने वाले हैं.

पिछले दो सालों से इस मामले में कोर्ट में मुस्लिम महिलाओं ने याचिका दायर की है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस प्रथा से महिलाओं का हक़ मारा जा रहा है और उनके साथ नाइंसाफी हो रही है.

तीन तलाक़ एक शरिया नियम है जो मर्दों को तीन बार तलाक़ कहने से शादी ख़त्म करने का अधिकार देता है.

तीन तलाक़ का बने रहना और इसका ख़त्म होना दोनों स्थिति में विवाद की आशंका जताई जा रही है.

इस अहम मामले पर सुनवाई करने वाले जज आख़िर कौन हैं? आइए हम उन जजों को बारे में आपको बताते हैं-

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चीफ़ जस्टिस जेएस खेहर

जस्टिस खेहर का जन्म 28 अगस्त 1952 में हुआ था. चंड़ीगढ़ में सरकारी कॉलेज से जस्टिस खेहर ने साइंस से ग्रैजुएशन किया था. इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से 1977 में एलएलबी की पढ़ाई की. इसी यूनिवर्सिटी से खेहर ने एलएलएम की पढ़ाई की.

1979 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में खेहर ने वक़ालत शुरू की. जनवरी 1992 में वो पंजाब के एडिशनल जनरल एडवोकेट बने. आठ फ़रवरी 1999 को वो पंजाब हाई कोर्ट में जज नियुक्त किए गए.

2009 में वो उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बने और 2011 सितंबर में सुप्रीम में जज बने. चार जनवरी 2017 को खेहर सुप्रीम के मुख्य न्यायधीश बने.

जस्टिस खेहर तीन तलाक़ पर अपने रिटायरेंट से पहले सुनवाई पूरी करना चाहते हैं. 28 अगस्त, 2017 को वो रिटायर हो जाएंगे.

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जस्टिस कुरियन जोसेफ

जस्टिस कुरियन का जन्म 30 नवंबर 1953 में केरल में हुआ था. इन्होंने केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से तिरुवनंतपुरम से क़ानून की पढ़ाई की थी. 1977-78 में वो केरल यूनिवर्सिटी में एकेडमिक काउंसिल के सदस्य बने.

1983-85 तक कोच्चि यूनिवर्सिटी के सीनेट मेंबर रहे. 1979 से केरल हाई कोर्ट से वक़ालत शुरू करने वाले कुरियन 1987 में सरकारी वक़ील बने और 1994-96 तक एडिशनल जनरल एकवोकेट रहे.

1996 में वो सीनियर वक़ील बने और 12 जुलाई 2000 को केरल हाई कोर्ट में जज बने.

2006 से 2008 के बीच वो केरल न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष रहे. 2008 में वो लक्षद्वीप लीगल सर्विस अथॉरिटी के अध्यक्ष बने.

इसके बाद वो 2006 से 2009 तक केरल हाई कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के अध्यक्ष रहे. जस्टिस कुरियन दो बार केरल हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायधीश भी रहे.

इसके बाद वह आठ फ़रवरी, 2010 से 7 मार्च, 2013 तक हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के वो मुख्य न्यायधीश रहे. आठ मार्च, 2013 को जस्टिस कुरियन सुप्रीम कोर्ट में जज बने. वह 29 नवंबर, 2018 को रिटायर होंगे.

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जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन

जस्टिस आरएफ नरीमन का जन्म 13 अगस्त 1956 को मुंबई में हुआ था. इन्होंने स्कूल की पढ़ाई कैथेड्रल स्कूल मुंबई से की थी.

कॉलेज की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से की. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ लॉ में पढ़ाई की.

हार्वर्ड लॉ ऑफ़ स्कूल से एलएलएम की पढ़ाई की. आरएफ नरीमन को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने सर्वोच्च अदालत में सीनियर वक़ील बनाया था.

इन्हें बनाने के लिए जस्टिस वेंकेटचेलैया ने नियम में संशोधन किया था. जस्टिस नरीमन 45 साल के बजाए 37 साल में ही सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वक़ील बन गए थे. सात जुलाई, 2014 को नरीमन सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

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यूयू ललित

उदय उमेश ललित का जन्म 9 नवंबर 1957 को हुआ था. 1983 से ललित ने वक़ालत शुरू की थी. ललित ने 1985 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में वक़ालत की.

इसके बाद 1986 में वो वक़ालत करने दिल्ली आ गए. अप्रैल 2004 में वह सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वक़ील बने.

कई मुक़दमों में ललित ने एमिकस क्यूरी की भूमिका अदा की. टूजी मामले में ललित को सीबीआई के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बनाया गया था.

ऐसा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया था. 13 अगस्त, 2014 को जस्टिस ललित सुप्रीम कोर्ट में जज बने. वो आठ नवंबर, 2022 को रिटायर होंगे.

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जस्टिस अब्दुल नज़ीर

जस्टिस अब्दुल नज़ीर का जन्म पांच जनवरी 1958 को कर्नाटक हुआ था.

इन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट से 1983 में वक़ालत की शुरुआत की थी. कर्नाटक हाई कोर्ट में नज़ीर को 2003 में अतिरिक्त जज बनाया गया था.

सितंबर 2004 में नज़ीर कर्नाटक हाई कोर्ट में स्थायी जज नियुक्त किए गए.

वो ऐसे तीसरे जज हैं जो बिना किसी हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रहे, सुप्रीम कोर्ट के जज बने. इसी साल फ़रवरी में नज़ीर सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.

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