जाधव मामले में भारत क्यों गया अंतरराष्ट्रीय कोर्ट

  • 11 मई 2017
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भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सज़ा सुनाए जाने के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई सोमवार को होगी.

लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत में कुछ विशेषज्ञों ने जाधव के मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक ले जाने के क़दम की आलोचना की है. उनका कहना है कि अब कश्मीर के मामलों में पाकिस्तान जब चाहे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक जा सकता है.

क्या कुलभूषण जाधव को बचाया जा सकता है?

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उनका कहना है कि भारत ने अब तक पाकिस्तान के मामले में किसी तीसरे पक्ष को शामिल करने से परहेज़ किया है. भारत की सोच ये है कि दोनों देश किसी भी मुद्दे पर आपस में बातचीत करके उसे सुलझा सकते हैं.

8 मई को भारत ने इंटनरेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का दरवाज़ा खटखटाया था जिसमे इसने शिकायत की थी कि पाकिस्तान ने जाधव के मामले में विएना कन्वेंशन का उल्लंघन किया है.

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ये है कारण भारत के आईसीजे में जाने के

लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले के अनुसार चार कारणों से भारत सरकार ने कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है.

पहला कारण था पाकिस्तान के ज़रिए काउंसलर सेवा मुहैया कराने से इकार करना.

दूसरा कारण कुलभूषण जाधव से जुड़े क़ानूनी दस्तावेज़ की कॉपी देने से पाकिस्तान सरकार का इकार करना है.

तीसरा कारण है जाधव की माँ की अपील पर पाकिस्तान की ख़ामोशी

चौथा कारण रहा कुलभूषण जाधव के परिवार वालों को वीज़ा देने से पाकिस्तान का इकार करना.

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भारत कब-कब गया है अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में

इससे पहले भारत ने सिर्फ़ एक बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का दरवाज़ा खटखटाया है. ये बात है 1971 की जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के अधिकार क्षेत्र के खिलाफ एक मामला दायर किया था. पाकिस्तान ने इस संगठन में भारत की शिकायत की थी. इसमें संगठन ने पाकिस्तान का साथ दिया था. इसीलिए इस संगठन के खिलाफ भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रुख किया.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत के खिलाफ फैसला सुनाया था

भारत ख़ुद को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में एक ही बार गया है, लेकिन पाँच-पाँच उसके ख़िलाफ़ मामले अंतरराष्ट्रीय अदालत में पहुँचे हैं. इनमें से तीन मामले पाकिस्तान से संबंधित थे. खुद पाकिस्तान ने एक बार भारत को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा है. ये 1999 की बात है. भारत ने अपने क्षेत्र में पाकिस्तान के एक नौसेना के विमान को मार गिराया था. अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था.

कारगिल युद्ध में भारत ने पाकिस्तान पर सौरभ कालिया नाम के एक फौजी और उसके साथियों को मारने से पहले टार्चर का इल्ज़ाम लगाया था.

कालिया के परिवार ने भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाने की सलाह दी. लेकिन भारत सरकार ने ऐसा करने से ये कह कर इनकार कर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.

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बुधवार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को भेजी गई एक चिट्टी में लिखा था कि जाधव को फांसी की सज़ा उस समय तक न दी जाए जब तक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती. सोमवार को भारत और पाकिस्तान को अपना पक्ष रखने के लिए डेढ़ घंटे दिए जाएंगे.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में फांसी की सज़ा सुनाई थी. भारत ने इसका कड़ा विरोध किया है.

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