सिर कलम करने का बयान देने वाले हिज़्बुल कमांडर ने छोड़ा संगठन

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भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन के एक कमांडर ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं को जान से मारने की धमकी देने के एक दिन बाद संगठन से अलग होने का ऐलान किया है.

हिज़्बुल मुजाहिदीन कमांडर ज़ाकिर मूसा ने शुक्रवार को कथित रूप से एक ऑडियो क्लिप में कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के सिर क़लम करने की धमकी दी थी.

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ज़ाकिर मूसा के अलग होने का कथित दावा, हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रवक्ता सलीम हाशिम के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद आया जिसमें उन्होंने मूसा के बयान से खुद को अलग कर लिया था.

ज़ाकिर मूसा का शनिवार को कथित रूप से दूसरा ऑडियो टेप जारी हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है, "जब हिज़्बुल मुजाहिदीन ने मेरे बयान से दूरी बना ली है तो मैं भी हिज़्बुल मुजाहिदीन छोड़ने का ऐलान करता हूँ."

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शनिवार को जारी दूसरे ऑडियो क्लिप में ज़ाकिर मूसा ने ये भी कहा है कि वो 'सेक्युलर स्टेट के लिए अपनी जान क़ुर्बान नहीं कर सकते.'

हालांकि ज़ाकिर मूसा ने अपने पहले बयान पर क़ायम रहने की बात भी कही. हुर्रियत ने मूसा के बयान की सख्त निंदा की थी.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (गिलानी गुट) के प्रवक्ता आयाज़ अकबर ने बीबीसी को बताया, "हम इस ऑडियो क्लिप की जाँच कर रहे हैं कि ये आया कहां से. दूसरी बात ये कि हम अपने बयान पर आज भी क़ायम हैं. हुर्रियत ने पहले भी कहा है कि इस्लामिक स्टेट या अल-क़ायदा का कश्मीर की आज़ादी की लड़ाई में कोई रोल नहीं है और आज भी हम ये कहते हैं."

उन्होंने कहा, "मसला धार्मिक या राजनीतिक लड़ाई का नहीं है. हुर्रियत यहां की क़ुर्बानियों की नुमाइंदगी करती है. वो अपना काम जारी रखेगी. हमने सिर्फ ये कहा था कि कश्मीर आंदोलन स्थानीय है, जिसका दुनिया में जारी आंदोलनों के साथ कोई लेना देना नहीं है. हिज़्ब कमांडर ने जो इस्लामी और गैर इस्लामी मसला खड़ा किया है ये उन्होंने खुद खड़ा किया है."

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मूसा का पहला ऑडियो क्लिप शुक्रवार को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वायरल हुआ था.

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Image caption हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी

हिज़्बुल कमांडर ने अपने पांच मिनट के इस ऑडियो क्लिप में हुर्रियत के नेताओं को धमकी देते हुए कहा है, "अगर हुर्रियत नेताओं ने चरमपंथियों की इस्लाम के ख़ातिर लड़ी जा रही लड़ाई में रोड़े अटकाने की कोशिश की तो उनके सिर लाल चौक में क़लम कर दिए जांए."

मूसा का कहना था, "कश्मीरियों को हुर्रियत नेताओं के दोगलेपन के ख़िलाफ़ एक होना चाहिए. हमें अपने धर्म से प्यार करना चाहिए. और इस बात को महसूस करना चाहहए की हम इस्लाम के लिए लड़ रहे हैं. अगर हुर्रियत नेताओं को ऐसा नहीं लग रहा है, तो हम बचपन से क्यों सुनते आए हैं- 'आज़ादी का मतलब क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह."

उनके अनुसार, "अगर कश्मीर की लड़ाई धार्मिक नहीं है तो फिर इतने समय से हुर्रियत नेता मस्जिदों को कश्मीर की लड़ाई के लिए इस्तेमाल क्यों करते रहे हैं. फिर चरमपंथियों के जनाज़ों में वह क्यों जाते हैं. ये लड़ाई शरिया (इस्लामी हुक़ूमत) के लिए लड़ी जा रही है."

ज़ाकिर मूसा को बीते वर्ष मारे गए हिज़्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की जगह पर लाया गया था.

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