मध्य प्रदेश: 12 छात्रों ने रिज़ल्ट से दुखी हो खुदकुशी की

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मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं के नतीजे घोषित होने के बाद असफल हुए 12 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या कर ली है.

इन नतीजों की घोषणा शुक्रवार को की गई थी. मरने वाले 12 बच्चों में एक भाई-बहन भी हैं. साथ ही भोपाल का एक छात्र भी है जो उम्मीद कर रहा था कि उसे कम से कम 90 प्रतिशत अंक मिलेंगे.

मरने वालों में 12वीं कक्षा के 10 बच्चे हैं. पढ़ाई को लेकर प्रदेश में बड़ी तादाद में बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं.

राज्य विधानसभा में सरकार की तरफ़ से पेश किए गए पिछले पांच सालों के आकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलेगा कि अब तक 685 बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं. पिछले साल परिणाम आने के बाद 39 बच्चों ने अपनी जान दे दी थी.

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इस बार भी रिज़ल्ट आने के बाद छात्र छात्राओं ने आत्महत्या के लिए अलग-अलग कदम उठाए. किसी ने ज़हर पिया तो किसी ने फांसी लगाई, वहीं एक छात्रा ने ट्रेन से कट कर जान दी.

भोपाल के 12वीं के छात्र नमन कड़वे ने 74.4 प्रतिशत अंक से पास होने के बाद ज़हरीला इंजेक्शन लगा कर आत्महत्या कर ली. उन्हें 90 फ़ीसदी अंक लाने की उम्मीद थी.

वहीं सतना ज़िले में 18 साल की रश्मि और 15 साल के उनके भाई दीपेंद्र ने अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली. रश्मि 12वीं में थी और दीपेंद्र 10वीं में और दोनों ही फ़ेल हो गए थे.

स्थिति यह है कि पिछले दो दिनों में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हेल्पलाइन में परेशान छात्रों के 5000 कॉल आ चुके है. बच्चों के साथ ही अभिभावक भी सलाह मांग रहे हैं.

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हेल्पलाइन में काउंसलर शबनम खान ने कहा, "इस वक़्त पैरेंट्स ज्यादा से ज्यादा वक़्त बच्चों के साथ रहकर उन्हें समझाएं कि जीवन में कम नंबर पाने के बावजूद बहुत कुछ किया जा सकता है."

लेकिन इस तरह से छात्र-छात्राओं की आत्महत्या ने सरकार को भी हिला दिया है. सरकार ने छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए कमेटी गठित की थी. उसकी अनुशंसाओं पर अमल शुरू करवाया जा रहा है.

स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री विजय शाह ने कहा, "बच्चों को किसी भी तरह से हौसला नहीं खोना चाहिए. परिणाम अगर सही नहीं है तब भी उन्हें हिम्मत बनाए रखनी चाहिए. शासन की 'रुक जाना नहीं' योजना का लाभ भी छात्र ले सकते हैं."

मध्य प्रदेश सरकार की 'रुक जाना नहीं' योजना के तहत फ़ेल हुए बच्चे केवल वही पेपर देकर आगे बढ़ सकते हैं जिसमें वो फ़ेल हुए हैं.

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