झारखंड: बकरा जी हाजिर हों !

  • 15 मई 2017
इमेज कॉपीरइट Ravi prakash

झारखंड के रांची जिले की पुलिस इन दिनों कुछ बकरों को लेकर परेशान है. ये बकरे पिछले 18 दिनों से पुलिस 'कस्टडी' में हैं.

बूचड़खानों की बंदी के बाद पुलिस ने इन्हें मांस की दुकानों से बरामद किया था. इनके साथ दुकानों के मालिक भी पकड़े गए थे. उन्हें तत्काल ज़मानत मिल गई. लेकिन, इन बकरों की 'हिरासत' ख़त्म नहीं हुई. इन्हें अपनी रिहाई के लिए कोर्ट के आदेश का इंतज़ार है.

मांस बिना मुश्किल में चिड़ियाघर के शेर

'अपवित्र' मांस-व्यापार के ख़िलाफ़ 'पवित्र अभियान'

दरअसल, रांची के एसडीओ भोर सिंह यादव ने 26 अप्रैल की सुबह कटहल मोड़ स्थित मांस की दो दुकानों पर छापेमारी की थी. उन्होंने यहां से दुकान मालिकों के साथ 28 बकरों को भी पकड़ा था. इसके बाद नगड़ी थाने की पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर कागजी कार्यवाही शुरू की.

इमेज कॉपीरइट Ravi prakash

देखभाल का संकट

नगड़ी के थाना प्रभारी एके सिंह ने बताया कि इस मामले में पशु क्रूरता अधिनियम व कुछ अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गयी है. लिहाजा, वे कोर्ट के आदेश के बगैर इन बकरों को नहीं छोड़ सकते.

'एक मुसलमान गोरक्षक क्यों नहीं हो सकता'

हालांकि, थाने में इतने बकरों के रखने की जगह नहीं है और न पुलिस के पास इसकी एक्सपर्टीज है कि वे बकरों की देखभाल कर सके. लिहाजा, एक रात थाने में रखने के बाद इन्हें एक युवक को सौंप दिया गया है. ताकि, इनकी सही देखरेख हो सके.

एके सिंह ने बताया कि कोर्ट ने इन बकरों के स्वास्थ्य की जानकारी मांगी थी. पुलिस ने इनकी जांच कराकर वह रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है. लिहाजा, इन बकरों का रिलीज आर्डर निकल जाना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट Ravi prakash

'बकरों की ज़मानत'

तो क्या ये बकरे 'गिरफ्तार' हैं और इन्हें 'जमानत' लेनी पड़ेगी.

मेरे इस सवाल पर झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक भारती ने बीबीसी से कहा, "इन्हें गिरफ्तार नहीं कह सकते. दरअसल, इनकी जब्ती हुई है. क्योंकि ये सजीव हैं, इसलिए कोर्ट इनके लिए रिलीज आफ लाइफ स्टाक का आदेश दे सकता है. कोर्ट चाहे तो इन बकरों को पशुओं की देखरेख करने वाले किसी स्वयंसेवी संस्था को भी दे सकता है. क्योंकि, उन्हें मांस की दुकान से पकड़ा गया है. ऐसे में स्पष्ट है कि उन्हें वध के लिए लाया गया होगा."

इधर जब्त बकरों के मालिक बबलू मंसूरी और साबिर खान उर्फ डब्लू ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने उन्हें कहा है कि इन बकरों की 'ज़मानत' करानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि ये बकरे बूचड़खानों की बंदी के पहले ही ख़रीदे गए थे. बंदी के बाद इन्हें दुकान के स्टोर रुम मे रखा गया था. इन बकरो को उसी स्टोर रुम से पकड़ा गया.

इमेज कॉपीरइट Ravi prakash

बबलू मंसूरी ने बताया कि उनकी दुकान कई साल पुरानी है. लेकिन, ऐसा पहली बार हुआ है जब बकरों को पकड़ा गया हो और उन्हें छुड़ाने के लिए वकील और कोर्ट का चक्कर लगाना पड़े.

बहरहाल, यह मामला पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे