पाकिस्तान ने लगाया भारत पर 'राजनीतिक ड्रामा' करने का आरोप

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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) में पाकिस्तान ने कहा है कि कुलभूषण जाधव पर आरोपों को लेकर भारत की तरफ़ से कभी कोई जवाब नहीं आया.

उसने आरोप लगाया कि भारत ने 'अंतरराष्ट्रीय अदालत को राजनीतिक ड्रामे के लिए इस्तेमाल' किया है.

जाधव मामले में क्यों मजबूत है भारत का पक्ष

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में क्या होगा कुलभूषण जाधव का

कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा दिए जाने पर रोक लगाने को लेकर भारत आईसीजे पहुंचा है और सोमवार को इस पर सुनवाई हुई.

भारत ने पहले अपना पक्ष रखा और पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए फांसी की सज़ा पर रोक लगाने की मांग की.

जवाब में पाकिस्तान की दलील थी कि 'वियना संधि आतंकी कार्रवाई में शामिल रहे जासूस' पर लागू नहीं होती.

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Image caption भारत की ओर से अटार्नी हरीश साल्वे ने रखा पक्ष

पाकिस्तान ने कहा कि 'कुलभूषण जाधव के मुस्लिम नाम वाले पासपोर्ट को लेकर भारत ने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी.'

उसने अंतरराष्ट्रीय अदालत से कहा कि कुलभूषण जाधव पर भारत की अपील 'गैरज़रूरी और ग़लत समझ' पर आधारित है.

इससे पहले भारत की ओर से पैरवी कर रहे अटार्नी हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया और कॉन्सुलर उपलब्ध कराए जाने की 16 अपीलों को नज़रअंदाज़ कर वियना संधि का उल्लंघन किया गया है.

भारत का पक्ष रखते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि कुलभूषण पर उन बयानों के आधार पर आरोप तय किए गए, जो उन्होंने पाकिस्तानी सेना के क़ैद में रहते हुए दिए थे.

उन्होंने कहा कि जाधव को कॉन्सुलर उलब्ध कराए जाने की सारी कोशिशों को पाकिस्तान ने अनसुना कर दिया.

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को कथित जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है.

भारत का कहना है कि कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर उपलब्ध कराए जाने से इनकार कर दिया गया और एकतरफ़ा फ़ैसला सुना दिया गया. अब भारत इस सज़ा पर रोक चाहता है.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.

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