उत्तर प्रदेश: योगीराज में क़ानून की व्यवस्था या अव्यवस्था?

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भारतीय जनता पार्टी ने दो महीने पहले विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत पाने के बाद आदित्यनाथ योगी को एक मज़बूत और सख़्त प्रशासक के तौर पर पेश करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया.

दावा किया गया कि क़ानून को हाथ में लेने की किसी को इजाज़त नहीं दी जाएगी और ऐसा करने वालों से सख़्ती से निपटा जाएगा.

हालांकि यही दावा तो विधानसभा में मुख्यमंत्री ने भी किया, लेकिन क़ानून व्यवस्था की स्थिति पिछले दो महीने से लगातार बिगड़ती ही दिख रही है.

पिछले दो दिनों से उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक हंगामा मचा हुआ है, लेकिन अपराध के मामले किसी दिन कम नहीं हो रहे हैं.

सोमवार रात मथुरा में आभूषण व्यवसायियों के यहां डकैती और दो लोगों की मौत ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को भी चिंतित कर दिया है.

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सरकार की मुश्किल

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने क़ानून व्यवस्था को ठीक रखने का आश्वासन दिया, लेकिन विपक्षी दल सरकार को इस मुद्दे पर घेरते रहे.

जानकारों का कहना है कि पिछले दो महीने में हत्या और बलात्कार के अलावा लूट और डकैती की घटनाएं भी बढ़ी हैं जो अब कम ही सुनने में आती थीं.

सोमवार को मथुरा में सर्राफ़ा व्यापारी के यहां डकैती और दो लोगों की मौत की घटना से पहले भी वाराणसी और लखनऊ में भी सर्राफ़ा व्यापारियों के यहां से दिन में ही करोड़ों रुपए लूट लिए गए थे.

मथुरा की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए और राज्य के पुलिस महानिदेशक बुधवार को वहां का दौरा कर रहे हैं.

यही नहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच लगातार हो रही झड़पें भी सरकार के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं और अब तक दो पुलिसकर्मियों की हत्या भी हो चुकी है.

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धर्मांतरण के नाम पर

पुलिस के पिटने की घटना तो जैसे आम हो गई है.

चाहे मेरठ में बीजेपी नेताओं के पुलिस को पीटने का मामला हो या फिर फ़तेहपुर सीकरी में हिंदू संगठन के लोगों का थाने पर हमला बोलना और पुलिस अधिकारियों तक पर हाथ उठाना.

गोरखपुर में चर्च में प्रार्थना को धर्मांतरण के नाम पर रुकवा देना या फिर कथित लव जिहाद के नाम पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं का क़ानून हाथ में लेना योगी सरकार की क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है.

सहारनपुर में एक महीने के भीतर हिंसा की तीन घटनाएं पुलिस अधिकारियों को हटाने के बावजूद कम नहीं हुईं.

स्थिति ये है कि शहर आज भी सुलग रहा है. पुलिस दावा कर रही है कि सब शांत है, लेकिन तनाव क़ायम है.

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समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन

विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपराध को लेकर सपा सरकार पर जम कर हमला बोला था, लेकिन अब समाजवादी पार्टी को मौक़ा मिल गया है.

पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "अभी सरकार बने हुए दो महीने भी नहीं हुए हैं और चारों तरफ़ अराजकता का माहौल है. हर व्यक्ति को यही चिंता है कि उसकी जान और संपत्ति अगले पल सुरक्षित है या नहीं. क़ानून व्यवस्था के मामले में ये सरकार बिल्कुल फ़ेल साबित हुई है."

वहीं जानकारों का कहना है कि सबसे चिंताजनक बात पुलिस पर बढ़ रहे लगातार हमले हैं.

पिछले दो महीने में कई पुलिस वालों की भी मौत हो चुकी है और कई पुलिस अधिकारियों को बीजेपी नेताओं से अपमानित होना पड़ा है.

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कार्यकर्ताओं पर लगाम भी समस्या

उत्तर प्रदेश में आईपीएस एसोसिएशन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और पिछले दिनों मुख्य सचिव से इसकी शिकायत की गई थी.

एसोसिएशन के महासचिव प्रकाश डी ने बीबीसी को बताया, "हमने यही कहा कि फ़ील्ड में अधिकारियों के साथ जो दुर्व्यवहार हो रहा है उस पर सरकार ग़ौर करे ताकि पुलिस वालों का मनोबल न प्रभावित हो."

फ़िलहाल विधानसभा का सत्र चल रहा है और क़ानून व्यवस्था को लेकर उम्मीद है कि आज भी विपक्ष हमलावर रहेगा.

वहीं मुख्यमंत्री योगी ने सरकार के 100 दिन पूरा होने पर रिपोर्ट कार्ड जारी करने की बात कही है, लेकिन जानकारों का कहना है कि क़ानून व्यव्यवस्था के मौजूदा हालात जैसे हैं, उसमें सरकार का पास होना मुश्किल है.

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