भोपाल में समलैंगिकों की रंग-बिरंगी परेड

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मध्य प्रदेश के भोपाल शहर के लोगों के लिए शायद ये पहला मौका है.

शहर के बड़े तालाब के किनारे बुधवार को समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समुदाय के लगभग 300 लोगों ने आईपीसी की धारा 377 पर रोक और अपनी निजता और अन्य अधिकारों को लेकर एक परेड निकाली.

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इस परेड में कई सामाजिक संस्थाओं के साथ ही भोपाल के किन्नरों ने भी भाग लिया.

वहीं स्थानीय नौजवान और गृहणियां भी इनका समर्थन करते हुए परेड में दिखीं.

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परेड में भारत में इस समुदाय के सामने खड़ी दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया गया.

भारत के अलग-अलग शहरों में समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग अपनी बात रखने के लिए परेड निकालते रहे हैं.

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परेड के आयोजकों का दावा है कि ये पहली भोपाली प्राइड परेड है.

साल 2009 में जब दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 377 को असंवैधानिक क़रार दिया था, तो समलैंगिक समुदाय की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा था.

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लेकिन चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला बदल दिया.

इस क़ानून के तहत समलैंगिक संबंध बनाने पर 10 साल क़ैद की सज़ा हो सकती है.

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ज़ाहिर है, हर साल ऐसे परेडों में इस क़ानून को निरस्त करने की मांग उठती है.

इस परेड में लेस्बियन, गे, बाईसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के सदस्यों और समर्थकों ने शिरकत की.

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परेड में समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उनके साथ होने वाले भेदभाव के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई.

दुनिया के कई हिस्सों में समलैंगिकों को लेकर अब समाज के रुख़ में बदलाव आ रहा है.

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लेकिन कई देश ऐसे हैं, जहां इसकी क़ानूनी इजाज़त नहीं है और ना ही समाज इसे स्वीकारता है.

भारत में समलैंगिक होने को अब भी शर्म की नज़र से देखा जाता है और ज़्यादातर होमोसेक्शुअल इसे छिपाए रखना पसंद करते हैं.

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