दुविधा में हैं हिंदू धर्म छोड़ने वाले वाल्मीकि लोग

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कथित उत्पीड़न से आजिज़ आकर हिंदू धर्म का त्याग करने वाले क़रीब 50 वाल्मीकि परिवार अब इस दुविधा में हैं कि कौन सा नया धर्म अपनाएं.

इन परिवारों ने तीन दिन पहले सामूहिक तौर पर ये कहते हुए हिंदू धर्म का त्याग कर दिया था कि राज्य के तमाम हिस्सों में दलित समुदाय, ख़ासकर वाल्मीकि समाज के लोगों का उत्पीड़न हो रहा है और उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है.

वाल्मीकि समुदाय के इन लोगों ने पिछले दिनों हिंदू धर्म का त्याग करते हुए देवी-देवताओं की प्रतिमा का रामगंगा में विसर्जन कर दिया था.

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गुरुवार को समाज के लोगों ने मुरादाबाद में मंडल आयुक्त को कथित उत्पीड़न के बारे में एक ज्ञापन भी सौंपा.

वाल्मीकि समाज के नेता लल्ला बाबू द्रविड़ ने बीबीसी को बताया कि आने वाले एक-दो दिन में वो लोग तय कर लेंगे कि उन्हें किस धर्म को अपनाना है.

उन्होंने बताया, "उलेमा लोग बुधवार को आए थे लेकिन अगले दिन आने की बात कहकर भी नहीं आए. उस दिन तय हुआ था कि शुक्रवार को नमाज़ पढ़ाने के साथ ही हमें इस्लाम में शामिल किया जाएगा. लेकिन अब हम लोग सोच-समझकर ही किसी दूसरे धर्म में जाएंगे."

हालांकि लल्ला बाबू और उनके साथियों ने अभी किसी नए धर्म को नहीं अपनाया है लेकिन ये भी कह रहे हैं कि वो वापस हिंदू धर्म में नहीं लौटेंगे.

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'प्रोपेगैंडा'

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वहीं मुरादाबाद के ज़िलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से जब बीबीसी ने जानने की कोशिश की तो उन्होंने धर्म परिवर्तन की इस पूरी कहानी पर ही सवालिया निशान लगा दिया.

राकेश कुमार सिंह ने उत्पीड़न की बातों को भी सिरे से ख़ारिज कर दिया.

उनका कहना है, "दरअसल, ये मामला उत्पीड़न का नहीं बल्कि कुछ और है. इस समाज के नेता और उनके बेटों के ख़िलाफ़ हत्या की कोशिश के मामले में एक केस दर्ज है. वो लोग समाज के लोगों के साथ मिलकर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि इस केस को खारिज करवा सकें."

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जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह तो यहां तक कहते हैं कि हिन्दू धर्म त्यागने की ख़बर भी सिर्फ़ प्रोपेगैंडा भर है.

उनके मुताबिक लल्ला बाबू द्रविड़ और उनके परिवार के कुछ लोगों ने सिर्फ़ मूर्तियां विसर्जित करके तस्वीरें खिंचवाई थीं.

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लेकिन लल्ला बाबू कहते हैं कि केस से इसका कोई लेना-देना नहीं है. केस अदालत में चलेगा लेकिन वाल्मीकि समाज के उत्पीड़न को लेकर हम लड़ते रहेंगे.

उनका कहना था कि केस में तो केवल कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं जबकि धर्म त्यागने वालों और फिर प्रदर्शन करने वालों की तादाद काफी ज़्यादा है.

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लल्ला बाबू का दावा है कि अभी सैकड़ों की संख्या में संभल, बरेली, मुरादाबाद और आस-पास के इलाकों के वाल्मीकि समुदाय के लोग धर्म त्यागने की तैयारी में हैं.

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी 21 मई को बरेली और मुरादाबाद के दौरे पर समीक्षा के लिए आ रहे हैं.

इन लोगों के मुताबिक वाल्मीकि समाज के लोग जहां धर्म परिवर्तन की बात करके चर्चा में आना चाहते हैं तो वहीं प्रशासन किसी भी तरह से इसे रफ़ा-दफ़ा करने में लगा है.

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