'वो तूफ़ान की तरह आए, सब कुछ बहा ले गए, जान भी'

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जमशेदपुर के शोभापुर में 18 मई की सुबह सब कुछ वैसा ही था, जैसा आम दिनों में होता है. लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में लगे थे. औरतें खाना-नाश्ता बनाकर बच्चों को खिलाने की तैयारी कर रही थीं.

गांव की आबिदा ख़ातून ने फज़र की नमाज पढ़ी थी. इसके बाद उन्हें घर के दूसरे काम निपटाने थे. तभी अचानक उन्हें तेज़ आवाज़ सुनाई दी. बाहर निकलीं तो हज़ारों लोगों की भीड़ थी.

उन्हें ये कुछ अनहोना-सा लगा तो घबराकर वो बच्चों को भतीजे के घर में छिपाने चली गईं. घर के महंगे सामान भी उधर ही भेज दिए. लेकिन, उनकी कवायद बेकार साबित हुई.

कुछ ही देर बाद उनके घर में अनजान बाहरी लोगों की भीड़ थी, जो सब कुछ खत्म कर देने पर आमादा थी. आबिदा ख़ातून कहती हैं, "वे तूफ़ान की तरह आए. सब कुछ बहाकर ले गए. जान भी."

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'वो ख़ौफ़नाक मंज़र था'

आबिदा ख़ातून ने बीबीसी को बताया, "वे बहुत गंदी गालियां दे रहे थे. बोलने लगे कि घर में आग लगा देंगे. यहां बच्चा चोर छिपा है. उन लोगों को जब पता चला कि हमने बच्चों और सामान को पीछे के घर में छिपाया है तो वहां भी पहुंच गए. बच्चों को धक्का देकर गिरा दिया और घर के सारे सामान में आग लगा दी. वह काफ़ी खौफ़नाक मंज़र था. ख़ुदा दोबारा ऐसे दिन नहीं दिखाए."

आबिदा ख़ातून उस शोभापुर गांव में रहती हैं, जहां 18 मई की सुबह तीन गांवों के सैकड़ों लोग कथित बच्चा चोरों को खोजने पहुंचे थे.

उन्मादी भीड़ ने गांव में तोड़फोड़ कर चार लोगों को पीट-पीट कर मार डाला था. इनमे से एक की हत्या के बाद उनके चेहरे को जला दिया गया था.

जमशेदपुर से कुछ ही दूरी पर बसा शोभापुर गांव सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर थाने का हिस्सा है.

यहां करीब 80 घर हैं. इनमें अधिकतर घर मुस्लिम समुदाय के हैं. जिस भीड़ पर हत्या का आरोप है वह पास के गांवों से आयी थी.

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मुर्तुज़ा के घर में तोड़फोड़

भीड़ सबसे पहले शोभापुर गांव के मुर्तुजा अंसारी के घर पहुंची. वो इस घटना मे मारे गए शेख हलीम के साढ़ू हैं. चश्मदीदों के मुताबिक भीड़ ने उनकी भी पिटाई की और रॉड से मारकर ज़ख्मी कर दिया.

मुर्तुज़ा अंसारी के भाई मोहम्मद फ़िरोज़ ने बीबीसी को बताया, "सुबह करीब 4 बजे भाईजान के साढ़ू शेख हलीम अपने दोस्तों के साथ गाड़ी से मेरे घर पहुंचे. पूछने पर उन्होंने बताया कि वे लोग टाटा (जमशेदपुर) जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उनसे भिड़ना शुरु कर दिया. इसलिए वो यहां घुस गए. हम लोगों को समझ नहीं आया कि बात क्या है. एक-डेढ़ घंटा के बाद हज़ारों लोगों की भीड़ ने गांव को घेर लिया. यहां हल्ला करने लगे. चिल्लाने लगे कि तुम लोगों ने बच्चा चोरों व बच्चों को छिपाया है. इसके बाद मेरे भाई मुर्तुजा की भी पिटाई की और घर में आग लगा दी."

मुर्तुजा और फ़िरोज़ प्लास्टिक के खिलौने का व्यवसाय करते हैं. फिरोज़ ने बताया कि उन्मादी भीड़ अपने साथ ले जाने लायक खिलौने ले गई.

उनका कहना था कि बाक़ी बचे खिलौनों में आग लगा दी जिससे करीब 4 लाख रुपये के खिलौने जल कर खाक हो गए.

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कार्रवाई के कारण जान बची- पुलिस

भीड़ ने गांव के ज़ैनुल हक़, जसमुन, अज़ीज़ुल, अब्दुल हई, शम्सुल, अल्ताफ़ हुसैन और ऱशीदा ख़ातून के घरों में भी तोड़फोड़ व लूटपाट की.

रशीदा ख़ातून ने बीबीसी को बताया कि उनके गहने लूट लिए गए और अब उनके घर में पिछले तीन दिन से खाना नहीं बन सका है. .

इस मामले को बारीकी से देख रहे एडीजी (आपरेशंस) आर के मल्लिक ने बीबीसी को बताया, "इस घटना के बाद शोभापुर गांव में पुलिस पिकेट बना दिया गया है. इस मामले में भी पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर कानून के मुताबिक काम होगा."

उन्होंने दावा किया कि पुलिस के हस्तक्षेप की वजह से ही मुर्तुज़ा अंसारी और गांव के दूसरे लोगों की जान बचायी जा सकी.

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18 दिनों में 10 लोगों की हत्या

बहरहाल, इस घटना के तीन दिन बाद भी शोभापुर गांव में खौफ़ है और हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं.

इधर, बच्चा चोरी की अफवाह में झारखंड में पिछले 18 दिनों में 10 लोगों की हत्या के बाद सरकार लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील कर रही है.

विपक्ष इसे सरकार की विफ़लता क़रार दे रहा है.

इन घटनाओं के विरोध में जमशेदपुर बंद के दौरान हिंसक भीड़ पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं और लाठीचार्ज भी किया है. इसके बाद प्रभावित इलाकों में निषेधाज्ञा लगा दी गयी है.

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