भारत और जापान की दोस्ती की वजह चीन?

मोदी, आबे इमेज कॉपीरइट Reuters

अहमदाबाद में 54 अफ्रीकी देशों के सेंट्रल बैंक गवर्नर्स और वित्त मंत्रियों की बैठक सोमवार को शुरू होने जा रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा अफ्रीका में विकास गतिविधियों से जुड़े कुछ अन्य देशों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो सकते हैं.

इसमें जापान भी शामिल है. इसी सम्मेलन के दौरान 24 मई को भारत और जापान की अलग से बैठक होनी है. इस मुलाकात के ख़ास मायने हैं.

अहमदाबाद कॉन्फ्रेंस को चीन के वन बेल्ट वन रोड सम्मिट का जवाब कहना, मुझे लगता है कि जल्दबाज़ी होगी.

'...तो भारत ब्रिक्स में चीन का साझेदार क्यों है'

'नए सिल्क रूट पर ख़र्च हमारा, फ़ायदा सभी देशों का'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
नए सिल्क रूट पर दुनिया की चिंता

चीन पर पलटवार

बीते कुछ सालों में ये देखा जा रहा है कि भारत जापान के क़रीब जा रहा है और कुछ हलकों में इसे चीन को काउंटर करने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है.

भारत और जापान का आर्थिक सहयोग बढ़ा है.

प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से अपनाई गई आर्थिक नीतियों के कारण जापानी कंपनियों को भारत में निवेश का एक सुखद माहौल मिला है.

जापान चीन से अपना निवेश हटाकर दक्षिण पूर्व एशिया और भारत में लगाना चाहता है.

जापानी कंपनियों के भारत में निवेश के लिए दिल्ली मेट्रो की कामयाबी एक अच्छी स्टोरी है. दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग इन रिश्तों को एक नया आयाम दे रहा है.

न्यू सिल्क रूट को लेकर चीन के इरादे क्या हैं

न्यू सिल्क रूट पर भारत-चीन में क्यों ठनी है?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
अहमदाबाद में 24 मई को भारत और जापान की अलग से बैठक होनी है. इस मुलाकात के खास मायने हैं.

ओबीओआर परियोजना

मुझे लगता है कि आने वाले समय में भारत और जापान मिलकर चीन के ओबीओआर परियोजना को रोकें नहीं बल्कि उसे एक दोस्ताना प्रतिस्पर्धा दें.

ये भारत, जापान और एशिया तीनों के लिए ही अच्छा है. आने वाले दस सालों में एशिया को बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के लिए आठ खरब डॉलर की जरूरत होगी.

इतना पैसा न तो चीन, न जापान और न ही भारत अकेले लगा सकता है. अगर ये तीनों देश प्रतिस्पर्धा में ही सही, एशिया के विकास में लग जाएं तो तस्वीर बदल सकती है.

चीन को जवाब देने के लिए भारत-जापान की दोस्ती की बात तो हो रही है, लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि भारत चीन का पड़ोसी है, जापान का नहीं.

नए सिल्क रूट से चीन का दबदबा बढ़ेगा?

नए सिल्क रूट में चीन का हमसफ़र बना नेपाल

इमेज कॉपीरइट AFP

भारत जापान दोस्ती

रक्षा पर सरकारी खर्च के लिहाज से देखें तो चीन से भारत बहुत पीछे है. न केवल भारत बल्कि जापान भी चीन से काफी पीछे है.

फौजी ताक़त के लिहाज से अमरीका और रूस के बाद चीन आता है और उसके बाद ही भारत और जापान कहीं टिकते हैं.

भारत और जापान की सेना में एक बड़ा फर्क ये है कि जापानियों की फौज स्मार्ट आर्मी है. भारत उनसे बहुत सारी चीज़ें सीख सकता है. उनसे टेक्नॉलॉजी ले सकता है.

विमानवाहक पोतों और पनडुब्बियों को लेकर दोनों देशों की बातचीत चल रही है. मोदी और शिंजो आबे इस पर बात कर चुके हैं.

क्या यह चीन की बढ़ती ताक़त का नज़ारा है?

5 तरीक़ों से दुनिया पर वर्चस्व की चीन की योजना

इमेज कॉपीरइट Reuters

रक्षा बजट में चीन से मुकाबला नहीं

लेकिन चीन से किसी तरह का मुक़ाबला करने लायक भारत का रक्षा बजट ही नहीं है.

एक तरफ़ चीन रक्षा के नाम पर 216 बिलियन डॉलर खर्च करता है तो भारत 50 बिलियन डॉलर के करीब.

चीन से किसी भी तरह के मुकाबले के लिहाज से देखें तो भारत के सामने अभी एक लंबी दौड़ है.

जापान इस दौड़ में भारत को जीत तो नहीं दिला सकता है लेकिन उसकी काफ़ी मदद जरूर कर सकता है. दोनों देशों में इसे लेकर एक तरह से सहमति बनती भी दिख रही है.

इन सब के बीच ये सवाल उठता है कि क्या भारत की कोशिशों से कहीं चीन नाराज़ तो नहीं होगा. मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ होने वाला है.

भारतीय तोपखाने में नई अमरीकी तोपों की ख़ास बातें

भारत-जापान समझौते से 'चीन नाराज़'

इमेज कॉपीरइट AFP

बढ़ती साझेदारी

भारत के सामने बड़ी चुनौती इस बात की है कि पाकिस्तान और चीन पाक प्रशासित कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.

और दोनों ही देश इसे सरेआम कबूल भी कर रहे हैं. इसलिए भारत और जापान शांतिपूर्ण तरीके से आर्थिक सहयोग करते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है.

जापान और भारत की बढ़ती साझेदारी को लेकर चीन क्या कहेगा? मुझे लगता है कि भारत को इसकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं है.

आप ये पूछ सकते हैं कि भारत और जापान अगर मिल जाएं तो चीन का क्या बिगाड़ सकते हैं?

मुझे लगता है कि भारत और जापान को मिलकर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना चाहिए.

भारत-चीन-जापान का पेचीदा 'लव ट्राएंगल'

'भारत-जापान के क़रीब आने से चीन नर्वस'

इमेज कॉपीरइट xinhua

एशिया-अफ्रीका कनेक्टिविटी

चीन ने जिस तरह से वन बेल्ट वन रोड का प्रपोजल दिया है, भारत और जापान भी उसी दिशा में एक सोच विकसित कर रहे हैं.

24 मई को जब जापान और भारत मिलेंगे तो एशिया-अफ्रीका कनेक्टिविटी की बात पर अनौपचारिक चर्चा हो सकती है.

हालांकि आधिकारिक रूप से इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं.

भारत और जापान श्रीलंका और ईरान में बंदरगाह विकास की संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं. पूर्वी अफ्रीका के देशों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं.

भारत-जापान मिलकर म्यांमार में बंदरगाह विकास परियोजना पर काम कर सकते हैं. इसका फ़ायदा दोनों देशों को होगा.

भारत-अमरीका-जापान प्रेम त्रिकोण और चीन!

'भारत-जापान की नज़दीकी से चीन में खलबली'

(ये लेख बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)