नौशेरा में भारतीय 'कार्रवाई' का पाक ने किया खंडन

  • 24 मई 2017
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भारतीय सेना ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में की गई कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकियों को नुकसान पहुँचा है.

हालांकि पाकिस्तान ने भारत की तरफ़ से हुई ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार किया है.

एसपीआर के एक अधिकारी मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीट किया, ''नौशेरा में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी पोस्ट को नष्ट करने और आम नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना की फ़ायरिंग के भारत के दावे ग़लत हैं.''

इससे पहले भारतीय सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अशोक नरूला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान ने 20 और 21 मई कौ नौशेरा सेक्टर में कार्रवाई की थी, इसके जवाब में भारतीय सेना ने ये कार्रवाई की है.

उन्होंने कहा कि गर्मियों में अब बर्फ़ पिघलने से घुसपैठ बढ़ने की आशंका है, लेकिन भारतीय सेना की तैयारी पूरी है.

नौशेरा में हुई कार्रवाई में कथित तौर पर चार चरमपंथियों को मारा गया था.

उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारी कोशिश जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करना है. इसके लिए ज़रूरी है कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोका जाए.'

इस मौके पर सेना ने एक वीडियो भी जारी किया है. तकरीबन 21 सेकंड के इस वीडियो में 10-11 धमाके होते दिख रहे हैं.

भारतीय सेना के प्रवक्ता ने इस कथित हमले की तारीख़ नहीं बताई. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी चौकियों को 'हाल ही में, बहुत हाल ही में' निशाना बनाया गया.

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भारतीय सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अशोक नरूला ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर भारत की स्थिति पाकिस्तान की तुलना में म़जबूत है और पाकिस्तानी सेना हथियारबंद घुसपैठियों को भारत प्रशासित कश्मीर में दाखिल कराने में मदद करती है.

भारतीय सेना की तरफ़ से जारी किए गए इस वीडियो पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने 'सीएनएन' से कहा कि उन्हें पाकिस्तान की तरफ़ से इसके बारे में जानकारी नहीं मिली है. इसलिए वे फ़िलहाल कुछ नहीं कह सकते.

हालांकि उन्होंने कहा, "इससे दो चीज़ें साबित होती हैं. पहला ये कि जम्मू और कश्मीर दोनों देशों के बीच केंद्रीय मुद्दा है और दूसरा अगर आज कुछ होता है तो ये समझने की ज़रूरत है कि दोनों देशों को इस लंबे समय से पेंडिंग मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत की मेज़ पर बैठने की कितनी ज़रूरत है. ये दुर्भाग्य की बात है कि संघर्ष विराम के बावजूद नियंत्रण रेखा पर तनाव बना हुआ है. इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि ऐसी चीज़ें नहीं होनी चाहिए."

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जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पिछले दिनों भारतीय सेना के दो जवानों की हत्या कर उनके शवों के साथ बर्बरता की गई थी.

भारतीय सेना ने उस समय कहा था कि इसका माकूल जवाब दिया जाएगा.

भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जवानों के शव क्षत-विक्षत किए जाने की निंदा की थी और कहा था कि युद्ध के दौरान भी कहीं ऐसी हरकतें नहीं होती हैं.

हालांकि पाकिस्तान ने इस तरह की घटना में हाथ होने से साफ़ इनकार किया था.

नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच गोलीबारी आम हैं. दोनों तरफ़ के गांवों में गोलीबारी से लोग हताहत भी होते रहे हैं.

नागरिक को जीप से बांधकर घुमाने वाले अफ़सर का सम्मान

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उधर सोमवार को भारतीय सेना ने मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित किया, जिन्होंने पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए एक नागरिक को जीप पर बांधकर घुमाया था.

फारुक अहमद दार नाम के इस व्यक्ति को मिलिट्री गाड़ी से बांधने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और इस कदम की कई हलकों ने कड़ी निंदा की थी.

सेना का कहना है कि इस सम्मान का उस घटना से संबंध नहीं है.

7 अप्रैल की घटना पर मेजर लीतुल गोगोई ने कहा कि उनके पास आईटीबीपी के एक अधिकारी का फ़ोन आया कि करीब 1200 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया है और लोग पत्थऱ और पेट्रोल बम फेंक रहे हैं. गोगोई के अनुसार, जब वो इलाक़े में पहुंचे तो मेगाफ़ोन पर अपील करने के बावजूद लोग वहां पथराव कर रहे थे.

मैंने लोगों को बचाने के लिए ऐसा किया: मेजर गोगोई

उन्होंने कहा कि उन्हें करीब 30 मीटर दूर एक व्यक्ति खड़ा नज़र आया और उन्होंने जवानों से उसे पकड़ने को कहा. उन्होंने दावा किया कि बाद में उन्होंने पाया कि वो व्यक्ति लोगों को पत्थर फेंकने के लिए भड़का रहा था और वो रिंग लीडर हो सकता था. ये व्यक्ति फारुक अहमद दार थे. गोगोई ने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों को पोलिंग स्टेशन से बचाया लेकिन पत्थरबाज़ी जारी रही.

उन्होंने आगे कहा, ''जैसेही मैंने अपने लड़कों से उन्हें गाड़ी से बांधने के लिए कहा, पत्थरबाज़ी थोड़ी देर के लिए बंद हो गई और उसी छोटे से वक्त में हम वहां से निकल पाए. मैंने ये काम स्थानीय लोगों को बचाने के लिए किया. अगर गोली चलाई गई होती तो 12 से ज़्यादा लोगों की मौत हो सकती थी.''

उधर विपक्षी नेताओं ने इसकी आलोचना की है. जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव ने कहा, इससे कश्मीर में स्थिति ख़राब होगी. ख़बरों के अनुसार, वाम नेता डी राजा ने कहा कि सेना को ऐसा नहीं करना चाहिए था और जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति संवेदनशील होने की ज़रूरत है.

इससे पहले, भारतीय सेना प्रमुख कह चुकी है कि हथियारबंद लड़ाई में या पथराव करके चरमपंथियों की 'मदद' करने वाले नागरिकों से 'आतंकियों' की तरह बर्ताव किया जाएगा.

भारत ने पहली बार पाकिस्तान पर सैन्य हमले का दावा नहीं किया है. पिछले साल सितंबर में भारत ने नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया था, जिसे पाकिस्तान ने ख़ारिज़ किया था.

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