ब्लॉग: आँखों में धूल झोंक कर मुरीद बनाते थे चंद्रास्वामी

  • 24 मई 2017
चंद्रास्वामी इमेज कॉपीरइट TEKEE TANWAR/AFP/Getty Images
Image caption पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे चंद्रास्वामी की मौत मंगलवार को हो गई

तांत्रिक चंद्रास्वामी की बड़ी बड़ी आँखें लाल हो गईं और उन्होंने अपने हाथ में ली हुई काग़ज़ की चिंदी का गोला-सा बनाकर मेरी तरफ़ खींच कर दे मारा और ज़ोर से चिल्ला कर कहा -लो देख लो अपना भविष्य!

दिल्ली में कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया के उनके दुमहले के एक विशाल कमरे में मैं चंद्रास्वामी के साथ अकेले बैठा था.

उन्हें मालूम था कि मैं ही वो रिपोर्टर हूँ जिसकी एक रिपोर्ट की वजह से उन्हें छह महीने तक तिहाड़ जेल की हवा खानी पड़ी थी.

ज़ाहिर है वो मुझसे नाराज़ रहे होंगे, लेकिन इस मुलाक़ात में उन्होंने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर नहीं की.

मैंने देखा कि बातचीत के बीच में वो एक काग़ज़ के टुकड़े में रह-रहकर कुछ लिखने लगते.

उदारीकरण के हीरो या बाबरी के विलेन

भारतीय तांत्रिक ने दिखाया था थैचर को भविष्य

इमेज कॉपीरइट shovan gandhi
Image caption प्रवर्तन निदेशालय और दूसरी सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई के बाद चंद्रास्वामी तिहाड़ पहुँचा दिए गए

चंद्रास्वामी के सवाल

थोड़ी देर बाद उन्होंने उस काग़ज़ की चिंदी को अँगूठियों से भरी अपनी मोटी-मोटी अँगुलियों के बीच घुमा-घुमाकर एक छोटा गोला-सा बना डाला और उससे खेलते रहे.

फिर उन्होंने मुझसे तीन सवाल पूछे, ठीक वैसे ही जैसे कि क़स्बे में तमाशा दिखाने वाला मदारी अपने चारों ओर इकट्ठा हो आई भीड़ से पूछता था.

0 से 9 के बीच एक अंक बताओ?

मैंने जवाब दिया - 5

एक पक्षी का नाम लो?

मेरा जवाब था - मोर.

एक पुष्प का नाम लो?

मैने कहा - कमल.

यही वो पल था जब उन्होंने अपनी गुदगुदी हथेली में रखा काग़ज़ फेंक कर मेरे मुँह पर दे मारा था.

आध्यात्म और अपराध की करामाती कॉकटेल

एडिटर जिसने पत्रकारिता को नया 'आउटलुक' दिया

इमेज कॉपीरइट TEKEE TANWAR/AFP/Getty Images
Image caption नटवर सिंह ने अपनी किताब में लिखा है कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को इसी तरह का जादू दिखाकर चंद्रास्वामी ने अपने प्रभाव जाल में ले लिया था

अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर....

मैंने कुछ चकित और हतप्रभ सा दिखने की कोशिश करते हुए उस काग़ज़ के गोले को धीरे-धीरे खोलना शुरू किया.

उसमें लिखा था: पाँच, मयूर और कमल. यानी मेरे जवाब देने से पहले ही चंद्रास्वामी ने उस काग़ज़ पर मेर जवाब लिख डाले थे.

अगर मैं कहूँ कि मैं बिल्कुल भी चमत्कृत नहीं था तो ये झूठ होगा.

सिंहासन जैसी अपनी ऊँची कुर्सी पर बैठे चंद्रास्वामी के चेहरे पर विजय का भाव था, पर मुझ जैसा काइयाँ रिपोर्टर जानता था कि ऐसे ही मदारी वाले करतब दिखाकर इस तांत्रिक ने बड़े बड़ों की आँखों में धूल झोंक कर उन्हें अपना मुरीद बना लिया था.

मुरीद ही नहीं बनाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर अपने असर-रसूख का एक ताना-बाना बुन डाला था.

जिसमें हथियारों के दलाल, बड़े-बड़े ताक़तवर देशों के ताक़तवर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बादशाह, अफ़सर और व्यापारी मकड़ी के जाले में कीड़ों की तरह उलझते चले गए.

उदारीकरण के हीरो या बाबरी के विलेन?

मनमोहन सिंह को ढूंढ़कर लाए थे नरसिम्हा राव

इमेज कॉपीरइट RAVEENDRAN/AFP/Getty Images

नरसिम्हा राव से दोस्ती

भारत के पूर्व विदेश मंत्री कुँवर नटवर सिंह ने अपनी किताब 'वन लाइफ़ इज़ नॉट इनफ़' में लिखा है कि आयरन लेडी कही जाने वाली ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को इसी तरह का जादू दिखाकर अपने प्रभाव जाल में लपेट लिया.

उनके तिलिस्म से प्रभावित लोगों में हथियारों के व्यापारी अदनान ख़शोगी, ब्रूनेई के सुल्तान, हॉलीवुड अभिनेत्री एलिज़ाबेथ टेलर जैसी हस्तियाँ शामिल थीं.

राजीव गाँधी की हत्या के बाद जब 1991 में पीवी नरसिम्हा राव भारत के प्रधानमंत्री बने तो दिल्ली में आमफ़हम बात थी कि '7 रेसकोर्स रोड' में प्रधानमंत्री निवास के गेट चंद्रास्वामी के लिए खुल गए हैं.

नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बनने के बहुत पहले से चंद्रास्वामी के क़रीबी दोस्त थे.

ब्रिटेन के एक गुजराती व्यापारी लखुभाई पाठक ने नरसिम्हा राव पर चंद्रास्वामी की मदद से उनसे रुपये ठगने का आरोप भी लगाया था.

नरसिम्हा राव: हीरो या विलेन

'नरसिंह राव ने कैसे बदली भारत की तस्वीर'

इमेज कॉपीरइट photodivision.gov.in

बोफ़ोर्स कांड

नब्बे के दशक के उस दौर में राजनीति, व्यापार, जासूसी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, हथियारों की ख़रीद-फ़रोख़्त आदि गतिविधियों में किसी न किसी तरह से चंद्रास्वामी का नाम आ ही जाता था.

बोफ़ोर्स कांड की लहर पर सवार होकर जब विश्वनाथ प्रताप सिंह ने राजीव गाँधी को 1989 के आम चुनाव में हराकर दिल्ली में जनता दल की सरकार बनाई, तभी से उनकी ईमानदार छवि में दाग़ लगाने की साज़िशें शुरू हो गई थीं.

कुछ ही समय में अख़बारों में सेंट किट्स कांड के फ़र्ज़ी दस्तावेज़ छापे जाने लगे जिससे ये साबित करने की कोशिश की गई कि वीपी सिंह के बेटे अजेय सिंह ने सेंट किट्स द्वीप के बैंकों में काला धन छिपाकर रखा है.

इन सभी ख़बरों में बार-बार चंद्रास्वामी का नाम आता रहता था. दिलचस्प बात ये थी कि ऐसी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं थी जिसमें चंद्रास्वामी के दोस्त न हों.

मगर जितने उनके दोस्त, उससे ज़्यादा दुश्मन. पीवी नरसिम्हाराव के मंत्रिमंडल में गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट चंद्रास्वामी के राजनीतिक दुश्मनों में से थे.

मनमोहन सिंह के नहाने का भी है किस्सा

राजनीतिक आत्मकथाएं: राज़ को राज़ रहने दो

इमेज कॉपीरइट Soraya Khashoggi/Getty Images
Image caption चंद्रास्वामी के तिलिस्म से प्रभावित लोगों में हथियारों के व्यापारी अदनान ख़शोगी भी थे

दाऊद से 'दोस्ती'

उस दौर में बबलू श्रीवास्तव नाम के एक अंडरवर्ल्ड डॉन को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) नेपाल से पकड़ कर दिल्ली लाई थी.

बबलू श्रीवास्तव पर दाऊद इब्राहिम के गिरोह से जुड़े होने और नेपाल, मलेशिया से लेकर दिल्ली तक दाऊद के अपराध साम्राज्य को चलाने का आरोप था.

मुझे मेरे सूत्रों ने बताया कि सीबीआई से पूछताछ में बबलू श्रीवास्तव ने चंद्रास्वामी के दाऊद इब्राहिम से संबंध होने की बात कही थी.

लेकिन मैं सिर्फ़ सूत्रों की बात पर भरोसा करके ये ख़बर नहीं छापना चाहता था.

इसलिए जब सीबीआई बबलू श्रीवास्तव को कानपुर जेल ले गई तो मैंने रिपोर्टर की तिकड़म लगाकर कानपुर जेल के भीतर बाक़ायदा जेलर के कमरे में उससे इंटरव्यू किया और पूरे इंटरव्यू को रिकॉर्ड कर लिया.

'ले जाएं दिल्ली से दूर'

सरकारें बदल गईं, पर जलवा कायम रहा

Image caption तत्कालीन गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट ने सीबीआई को चंद्रास्वामी की गिरफ़्तारी के आदेश दिए थे

चंद्रास्वामी की गिरफ़्तारी

ये क़िस्सा 1995 का है और उन दिनों में जनसत्ता अख़बार में रिपोर्टर था. इस इंटरव्यू में बबलू श्रीवास्तव ने वही बातें दोहराईं जो सीबीआई के रिकॉर्ड में थीं.

अगले दिन अख़बार में छपी ख़बर पढ़ते ही गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट ने सीबीआई को चंद्रास्वामी की गिरफ़्तारी के आदेश दे दिए.

चंद्रास्वामी के पराभव का काल प्रारम्भ हो चुका था.

इसके बाद उन पर एक के बाद एक करके प्रवर्तन निदेशालय ने कई नए मुक़दमे दर्ज कर दिए और कई पुराने मामलों को खोल दिया गया. चंद्रास्वामी तिहाड़ पहुँचा दिए गए.

उन्हें अदालत में पेश करने के लिए दूसरे क़ैदियों के साथ जेल की गाड़ी में लाया जाता था.

तिहाड़ जेल

जेबतराशी, उठाईगीरी, ठगी, चोरी, हत्या और बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार लोगों के साथ तिहाड़ जेल से मजिस्ट्रेट की अदालत तक किया जाना वाला ये सफ़र चंद्रास्वामी के लिए थर्ड डिग्री जैसा साबित होता था.

उन्होंने तंग आकर अदालत से गुहार की कि ये अपराधी रास्ते में मेरी दाढ़ी खींचते हैं, बाल खींचते हैं, गालियाँ देते हैं, थप्पड़ मारते हैं और यहाँ-वहाँ कोंचते हैं, इसलिए मुझे एक अलग गाड़ी में अदालत लाया जाए.

अदालत ने चंद्रास्वामी को इतनी राहत तो मुहैया करवा दी थी, लेकिन बबलू श्रीवास्तव के इंटरव्यू के बाद से चंद्रास्वामी के तांत्रिक और 'व्हीलर-डीलर' करियर में जो फिसलन शुरू हुई, उसे रोकने में उनका हर जादू फ़ेल हो गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे