'मेजर गोगोई का सम्मान जल्दबाज़ी, मीडिया में लाना ठीक नहीं'

  • 25 मई 2017
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पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) वीपी मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सेना के "आठ-नौ साल के अनुभव" वाले अफ़सर को मीडिया के सामने लाना ठीक नहीं है.

वो कहते हैं, "मैं उस लड़के को सामने नहीं करता. जो भी उसका पीआरओ है, (मैं) उसको कहता कि खुद बयान दो. वो युवा हैं. आठ नौ साल की उनकी सर्विस होगी. मीडिया हैंडल करने का उनका तजुर्बा भी नहीं है. मुझे पता नहीं है कि उन्हें ऐसा करने के लिए किसने कहा और क्या हुआ."

मेजर गोगोई के कैमरे के सामने जाने का नतीज़ा ये हुआ कि उनका वीडियो टीवी स्टूडियो में बहस का विषय बना. सोशल मीडिया पर उन्हें लोगों ने सुना, उस पर कमेंट किए.

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उन्हें ऐसे वक्त मीडिया के सामने लाया गया जब जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुद सेना मामले की जांच कर रही है.

कश्मीरी युवक फारुक अहमद डार को जीप से बांधने की घटना पर भारतीय सेना के मेजर एल गोगोई ने 23 मई को मीडिया से बात की थी.

इस वीडियो में उन्होंने बताया कि किन परस्थितियों में उन्होंने ये कदम उठाया. उन्होंने कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते तो हो सकता है कि फ़ायरिंग में लोगों की जान जाती.

लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एचएस पनाग कहते हैं, "अभी ये साफ़ नहीं है कि क्या वो (जांच के बाद) बच जाएंगे या फिर उनके खिलाफ़ आरोप फाइल किए जाएंगे. ऐसे हालात में आप सेना के एक अफ़सर को खुद का बचाव करने के लिए मजबूर कर रहे हैं."

वो कहते हैं, "अगर मेजर गोगोई के खिलाफ़ मामला फ़ाइल किया गया है तो हो सकता है कि उनका मीडिया के सामने जाना उनके खिलाफ़ जाए."

'हो सकती थी मुश्किल'

कैमरे के सामने मीडिया के सवालों के जवाब देना आसान नहीं और माना जाता है कि ऐसा करने के लिए अनुभव या ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है.

एक अन्य रिटायर्ड सैन्य अफ़सर के अनुसार "मीडिया इस मामले में एक दोस्ताना रिश्ता निभा रहा था. मीडिया ने उनसे जो सवाल किए वो उनकी मदद करने के लिए किए. अगर मीडिया उनसे मुश्किल सवाल पूछता तो मेजर गोगोई को जवाब देने मुश्किल हो जाते."

इस अफ़सर के मुताबिक घटना के प्रकाश मे आने के तुरंत बाद ही उत्तरी कमांड को बयान जारी करके कहना चाहिए था कि "हम इसकी तहकीकात कर रहे हैं, ये गलत बात है, ये सेना की टैक्टिक नहीं हैं लेकिन हम इसकी गहराई तक जाएंगे और इसके सही नतीजे पर पहुंचेंगे."

अधिकारी के मुताबिक बयान में कहा जाना चाहिए था कि "ये एक गैरमामूली स्थिति थी जिसके अंदर ऐसा ऐक्शन किया गया है. सेना इसको अप्रूव नहीं करती. सेना दोबारा ऐसा कभी नहीं करेगी, सेना इसकी जांच करेगी."

लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

उधर जम्मू-कश्मीर में सेना के उत्तरी कमांड के प्रमुख रह चुके लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटॉयर्ड) अता हसनैन कहते हैं, "अगर सेना को लगा कि मेजर गोगोई को मीडिया के सामने लाने से पारदर्शिता आती है तो ये फैसला सही था. लेकिन इस फ़ैसले के बाद ये एक नियम नहीं बन जाना चाहिए कि हर चीज़ के लिए एक अफ़सर को खड़ा कर दिया बात करने के लिए. ये एक वन ऑफ़ इवेंट था जिसे शायद हम सही ठहरा सकते हैं मगर इसके बाद हर घटना में इसे सही ठहराना नामुमकिन होगा."

सम्मानित करने की आलोचना

इससे पहले मेजर गोगोई को सम्मानित करने की भी आलोचना हो चुकी है.

एक बयान में सेना ने कहा , गोगोई को सम्मानित करते हुए सभी कारणों का, जिनमें अफ़सर की उपलब्धि और मामले की (जीप में बांधने की घटना) जो जांच चल रही है, उसके उभरते हुए पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है.

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इसी दौरान सेना प्रमुख बिपिन रावत ने अख़बार इकॉनामिक टाइम्स से बातचीत में कहा, "कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी खत्म होगी लेकिन मुझे ऐसी जानकारी मिली है कि मेजर गोगोई ने कोई उल्लंघन नहीं किया जिसके कारण उनके खिलाफ़ अनुशासन संबंधी कार्रवाई की ज़रूरत हो. और अगर वो किसी गलती के दोषी पाए भी जाते हैं, उनके खिलाफ़ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होगी."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
यह सवाल है उस कश्मीरी नौजवान का, जिसे मानव ढाल के तौर पर जीप के आगे बांध दिया था.

नाम न लेने की शर्त पर एक अन्य रिटायर्ड सैन्य अफ़सर ने कहा, "अगर आपको पहले ही जांच का नतीजा पता चल जाता है तो क्या सवाल नहीं उठते कि क्या आप जांच में दखल दे रहे हैं? और फिर अपने जम्मू कश्मीर पुलिस की जांच का इंतज़ार भी नहीं किया. ये दर्शाता है कि हमारी जांच का कोई मतलब नहीं है. हम जांच के नतीजे का इंतज़ार नहीं करते. हमारे मन में जो आता है हम वही करते हैं."

जनरल हसनैन भी मानते हैं कि मेजर गोगोई को सम्मानित करना "जल्दबाज़ी" थी लेकिन उनका मानना है कि ये कदम उठाते वक्त "सेना प्रमुख के दिमाग में जो बात चल रही होंगी वो होंगी कि अपने कमांड और लोगों के प्रति निष्ठा, और उन लोगों के प्रति निष्ठा जिनका दिल आपको जीतना है."

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उधर जनरल मलिक के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में मीडिया से कैसे निपटा जाए ये बात सभी सीख रहे हैं और उम्मीद है कि इस घटना से भी सीख ली जाएगी.

वो कहते हैं, "मैं उस लड़के (मेजर गोगोई) की तारीफ़ करता हूं क्योंकि उसने जान बचाई और उसने अपनी ड्यूटी को अच्छी तरीके से निभाया. हां, उसने थोड़ा सा गलत काम किया. तो जब मैं उसे सम्मानित करूंगा तो उसको साथ में ये भी बोलूंगा कि आगे दोबारा ऐसा काम नहीं करना."

जनलर मलिक कहते हैं, "हमें फारूक़ डार के साथ संवेदना है. और उसकी जान बच गई है ये भी हम अच्छे से समझते हैं. हम हमेशा मानवाधिकारों पर ज़ोर देते हैं."

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