'दलित के घर खाने' की बीजेपी की राजनीति

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Image caption अमित शाह ने पिछले साल प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में एक दलित परिवार के घर खाना खाया था

बीजेपी के नेताओं के दलितों के घरों पर खाने को लेकर तेलंगाना में राजनीति गर्मा गई है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के कई नेताओं पर विरोधी दल आरोप लगा चुके है कि ये नेता दलितों के घर पर खाना तो खाते हैं लेकिन ये खाना होटल से मंगवाया जाता है या फिर 'ऊंची जाति' के लोगों का बनाया हुआ खाना होता है.

ताज़ा आरोप तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने लगाया है.

उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष ने तेलंगाना की अपनी यात्रा के दौरान तीसरे दिन भी दलितों के घर पर खाना इसलिए खाया क्योंकि दलितों ने विरोध प्रदर्शन की धमकी दी थी.

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के चंद्रशेखर राव ने कहा, '' तीसरे दिन दलितों के विरोध प्रदर्शन के डर से उन्होंने भोंगीर में दलित के हाथ का बना खाना खाया. '' उन्होंने कहा कि पहले दिन उन्होंने खम्मागुदम गांव में मनोहर रेड्डी के हाथ का बना खाना खाया था और दूसरे दिन एक होटल में बना खाना अमित शाह ने खाया.

पिछले हफ़्ते, कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा पर कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के नेताओं ने आरोप लगाया था कि वो एक दलित के घर गए लेकिन वहां रेस्त्रां से मंगाया खाना खाया था. बीजेपी नेताओं ने इस आरोप का खंडन नहीं किया है.

Image caption पिछले हफ्ते येदियुरप्पा बेंगलुरु से 70 किलोमीटर दूर तुमाकुरु के एक दलित परिवार के यहां गए थे

हनुमंथराया जो एक दलित हैं, कहते हैं कि उन्होंने 30 लोगों के लिए खाना बनाया था लेकिन इससे दस गुना ज़्यादा लोग आ गए तो उन्हें होटल से खाना मंगवाना पड़ा. लेकिन तेलंगाना में बीजेपी ने इस तरह के आरोप पर कोई सफ़ाई नहीं दी है.

येदियुरप्पा ने दलित के घर खाया होटल का खाना?

बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ता शेषाद्री चारी ने बीबीसी हिंदी से कहा, '' इन छोटी बातों पर ध्यान देना ज़रूरी नहीं है. हम इन बातों में नहीं पड़ना चाहते. जहां तक दलितों का सवाल है, हम उनके हालात सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दलित भी बड़ी संख्या में हमसे जुड़ना चाहते हैं.''

शेषाद्री चारी ने कहा,``जो दलित नेता होने का दावा करते हैं वो फ़ाईव स्टार संस्कृति में बस चुके हैं लेकिन दलितों की हालत नहीं सुधरी है. बीजेपी दलितों की हालत सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है और दलितों तक पहुंचने का कार्यक्रम जारी है.''

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लेकिन राजनीतिक विश्लेषक टी अशोक इसे शब्दाडंबर मानते हैं. वो कहते हैं कि अमित शाह ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि वो तेलंगाना में बीजेपी की ज़मीन मज़बूत कर सकें और बीजेपी राज्य में चौथे नंबर से दूसरे नंबर की पार्टी बन सके.

वो कहते हैं, ``चंद्रशेखर राव नहीं चाहते हैं कि बीजेपी की राज्य में दाल गले. वो विपक्ष में कांग्रेस को तो संभाल सकते हैं लेकिन बीजेपी जिसके पास केंद्र सरकार का समर्थन और पैसे की ताकत है उसे संभालना आसान नहीं होगा. अभी तो इस मुद्दे पर बात होगी लेकिन इसमें शक है कि बीजेपी दलित वोटों में सेंध लगा सकती है.''

दूसरे शब्दों में, दलितों के घर खाना मुद्दा नहीं है लेकिन बीजेपी दलितों को अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश जारी रखेगी.

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