'गाय बीमारी से मरी, तब भी मुझ पर केस दर्ज होगा'

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'पशु बाज़ारों' और पशु क्रूरता को लेकर केंद्र सरकार के नए नियमों का दक्षिण भारत में विरोध हो रहा है.

नए नियमों के तहत पशु बाज़ारों से ख़रीदे गए पशुओं को जान से नहीं मारा जा सकेगा.

केरल में यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के सरेआम गाय काटने और फिर बीफ़ पार्टी करने के बाद अब आईआईटी मद्रास में भी बीफ़ पार्टी का आयोजन हुआ है.

आईआईटी मद्रास में हुई बीफ़ पार्टी में शामिल छात्रों ने बीबीसी की तमिल सेवा से बात करते हुए कहा कि सरकार के नए नियमों से किसानों को नुक़सान होगा.

आईआईटी मद्रास में बीफ़ पार्टी का आयोजन अंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल ने किया है.

इस संगठन के प्रतिनिधि के स्वामीनाथन ने बीबीसी से कहा, "हममें से बहुत से छात्र किसान परिवारों से हैं. हम गायों-बैलों को पालना जानते हैं. जो नए नियम हैं वो किसानों के ख़िलाफ़ हैं. अगर ये नियम लागू रहे तो किसान पशु नहीं पाल पाएंगे."

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'कंपनियों को फ़ायदा, किसाने के काम में दख़ल'

स्वामीनाथन का कहना है कि नए नियमों से बड़ी मीट कंपनियों को फ़ायदा होगा और मांस कारोबार पूरी तरह मल्टीनेशलन कंपनियों के हाथ में आ जाएगा.

वो कहते हैं, "किसान गायों और भैसों को सिर्फ़ तब ही बेचते हैं जब वो दूध देना बंद कर देती हैं. दूध देती हुई गाय या भैंस की हत्या कौन करेगा? और जब ये दूध नहीं देंगी तो इन्हें कौन पालेगा और क्यों पालेगा?"

पर्यावरणविद पीयूष मानुष का मानना है कि सरकार का ये नियम किसानों के कामकाज में ज़बरदस्ती दख़ल है.

वो कहते हैं, "मेरे पास 25 भैंसें हैं, यदि मैं उन्हें बेचना चाहूं तो फिर सरकार उसमें दखल क्यों दे? अगर मैं कोई पशु ख़रीदता हूं और उसकी किसी वजह से मौत हो जाती है तो नए नियमों के तहत मेरे खिलाफ़ मामला दर्ज हो सकता है."

वो कहते हैं, "चंदन के पेड़ों के साथ क्या हुआ? बहुत से नियम बना दिए गए लेकिन अब वो ख़त्म होने के कगार पर हैं. गायों के साथ भी ऐसा ही होगा."

मानुष कहते हैं, "हमें ज़बरदस्ती औद्योगिक खेतीबाड़ी में धकेला जा रहा है और रसायन इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है."

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Image caption केरल में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर कथित तौर से सरेआम गाय काटने का आरोप लगा है और यह मामला तूल पकड़ रहा है.

केरल में सत्ताधारी मार्क्सवादी पार्टी के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के नए नियमों के ख़िलाफ़ खुलकर अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं.

केरल में गो हत्या पर प्रतिबंध नहीं हैं. केरल समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में मांस खाने वाले लोगों की संख्या शाकाहारी लोगों से ज्यादा है.

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