मोदी की ही दलील से उन्हें मात देना चाहते हैं विजयन

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन बीफ़ मामले पर केंद्र के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को और एक क़दम आगे ले गए हैं.

उन्होंने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है जिनमें भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

1980 के दशक की शुरुआत के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा क़दम उठाया है.

उन्होंने इस चिट्ठी में लिखा है कि केंद्र सरकार ने मवेशियों के व्यापार पर क़ानून बनाकर राज्यों के अधिकारों का हनन किया है.

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उन्होंने इसमें लिखा है कि मवेशी बाज़ारों के लिए केंद्र के बनाए नए नियम किसी भी तरह का व्यापार या पेशा करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.

उन्होंने कहा कि इसलिए "ये संवैधानिकता के मापदंड पर खरा नहीं उतरेगा. इनसे किसी व्यक्ति के अपनी पसंद के भोजन करने के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन होता है."

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लंबे समय बाद ऐसा क़दम

भारत में 80 के दशक के आरंभिक वर्षों के बाद से, जब कई राज्यों में ग़ैर-कांग्रेसी सरकारें हुआ करती थीं, पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह किसी मुद्दे पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखने का क़दम उठाया है.

उन दिनों में कर्नाटक में रामकृष्ण हेगड़े, पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु, आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव और तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन और एम करूणानिधि जैसे मुख्यमंत्री राज्यों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाया करते थे.

दरअसल, बेंगलुरू और चेन्नई में अक्सर मुख्यमंत्रियों की बैठकें आयोजित होती रही हैं, जिनमें दक्षिण भारत के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ ग़ैर-कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेते रहे हैं.

और ये बैठकें तब हुईं जब दिल्ली में इंदिरा गांधी बहुमत के साथ सत्ता में थीं, और उनपर राज्यों के अधिकारों का हनन करने के आरोप लगते थे.

अब तीन दशकों बाद, जब दिल्ली में मोदी बहुमत में हैं, विजयन ने इसी तरह का मुद्दा उठाया है.

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मोदी की ही दलील को दोहरा रहे हैं विजयन

विजयन ने लिखा है, ``जब तक हम एक नहीं होते और इस संघ-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी और धर्मनिरपेक्षता-विरोधी क़दम का विरोध नहीं करते, इससे ऐसी शृंखला की शुरूआत होगी जब इसी तरह के क़दमों से देश के संघीय लोकतांत्रिक ढांचे और धर्मनिरपेक्ष संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की जाएगी. ``

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने बीबीसी हिंदी से कहा, "उनकी दलील में दम है. ये वही दलील है जो नरेंद्र मोदी ने रखी थी, जब उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी इकाई बनाने के कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी. विजयन ठीक वही कर रहे हैं."

विजयन ने दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसी मुद्दे पर एक सख़्त चिट्ठी लिखी थी.

उनका ये क़दम ऐसे समय आया है जब दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मवेशियों के व्यापार के बारे में केंद्र सरकार के नए नियमों के बारे में अपनी कैबिनेट में चर्चा भी नहीं की है.

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