पशु ख़रीद: मोदी सरकार के फैसले पर कोर्ट की रोक

  • 30 मई 2017
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पशु मंडियों से मवेशियों की ख़रीद फ़रोख्त के बाद उन्हें मार देने पर केंद्र सरकार ने नए नियम बनाए थे और इसे रोक दिया था.

मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी है.

बेंच ने ये रोक लगाते हुए केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है.

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सामाजिक कार्यकर्ता एल सेल्वागोमथी ने याचिका दायर करते हुए अदालत से कहा कि नया नियम संविधान का उल्लंघन है.

उनके वकील अजमल ख़ान ने बीबीसी को बताया, "नया नियम कई मायनों में संविधान का उल्लंघन है और इसके अलावा मवेशी व्यापार के नियमन को लेकर राज्य सरकारों के अधिकार में हस्तक्षेप है."

उन्होंने कहा, "सबसे पहली बात ये है कि ये नियम एक ऐसी धारा के तहत बनाए गए हैं जो विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों के लिए पशुओं के क़त्ल को छूट देती है. मूल क़ानून क़त्ल को नहीं रोकता."

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ख़ान का कहना है कि बाज़ार का नियमन राज्य का विषय है. इसका 15वां और 28वां बिंदु साफ कहता है कि बाज़ार का नियमन राज्य का विशेष अधिकार है. इसलिए वर्तमान सूची में फेरदबदल करने का अधिकार केंद्र के पास नहीं है.

याचिका में ये भी कहा गया है कि नागरिकों को अपने खाने के बारे में फैसला लेने का अधिकार है, "संविधान में यह मूल अधिकार है. नया नियम संविधान की धारा 21 का उल्लंघन है."

इसके अनुसार, "नया नियम धारा 25 और 29 का भी उल्लंघन है, जिसके अनुसार, किसी भी धार्मिक समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है. ये संविधान में अंतर्निहित है और ये साफ है कि भोजन भी संस्कृति का हिस्सा है."

कई सीएम नए नियमों के ख़िलाफ़

केंद्र सरकार ने पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण क़ानून (1960) के तहत बनाए गए नियमों में कुछ बदलाव करते हुए उन्हें नोटिफ़ाई किया था.

इसके बाद मवेशी बाज़ारों में क़त्ल के लिए मवेशियों की ख़रीद फ़रोख़्त पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

केरल, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों और इस व्यापार से जुड़े व्यापारियों और कई राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका ख़ासा विरोध किया.

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केरल के मुख्यमंत्री पिन्नराई विजयन ने प्रधानमंत्री मोदी से गुज़ारिश की है कि वो मवेशियों के व्यवसाय पर बनाए गए नए नियमों को वापस लें.

विजयन ने इसे भारत के संघीय ढांचे का उल्लंघन बताया है.

तेलंगाना ने भी केंद्र सरकार से इस आदेश को वापस लिए जाने की अपील की थी.

विरोध की इसी कड़ी में केरल में युवा कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बीफ़ फेस्टिवल का आयोजन किया था, जिसका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो एक बछड़े की जान लेते नज़र आ रहे हैं.

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