योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा, राजनीतिक सरगर्मियां तेज़

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दो महीने पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद ऐसा माना जा रहा था और लगभग तय भी हो गया था कि योगी आदित्यनाथ अयोध्या जाएंगे और रामलला के दर्शन करेंगे.

लेकिन उस वक़्त वो कार्यक्रम बदल गया और उसे आज यानी बुधवार को अंजाम दिया जा रहा है.

योगी अयोध्या में क़रीब नौ घंटे तक रहेंगे और वहां रामलला के दर्शन करने के अलावा पार्टी पदाधिकारियों से विचार-विमर्श भी करेंगे. इसके अलावा वो महंत नृत्य गोपालदास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे.

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इससे ठीक एक दिन पहले मुक़दमे के सिलसिले में सीबीआई कोर्ट में हाज़िर होने आए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी योगी ने मुलाक़ात की थी.

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अयोध्या दौरे के राजनीतिक मायने

मुक़दमे की सुनवाई की तारीख़ पहले से तय थी लेकिन योगी का कार्यक्रम बाद में तय हुआ है.

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं कि ये चाहे संयोग हो या फिर जानबूझकर बनाया गया कार्यक्रम हो लेकिन इसके ज़रिए बीजेपी ये संदेश ज़रूर देना चाहती है कि राम मंदिर का मुद्दा उसने छोड़ा नहीं है और वो उसके एजेंडे में बना हुआ है.

योगी आदित्यनाथ का अयोध्या में रामजन्म भूमि और हनुमानगढ़ी जाने का भी कार्यक्रम है जिसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं.

एक दिन पहले ही मंगलवार को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई कोर्ट ने बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 12 लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश का मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी दी है.

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राम मंदिर निर्माण की उम्मीदें

मंगलवार को लखनऊ में सीबीआई कोर्ट में पेशी पर आए पूर्व सांसद रामविलास वेदांती, विनय कटियार और उमा भारती सरीखे नेताओं की बातों से भी लगता है कि योगी आदित्यनाथ की अयोध्या यात्रा किसी ख़ास उद्देश्य से हो रही है.

हालांकि अटकलें ये भी लगाई जा रही हैं कि योगी आदित्यनाथ अयोध्या से ही उपचुनाव भी लड़ सकते हैं.

यूं तो योगी ने अयोध्या के लिए अपनी यात्रा से पहले ही विकास और पर्यटन से संबंधित कई घोषणाएं कर रखी हैं और इस यात्रा के दौरान भी लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा उम्मीदें राम मंदिर के निर्माण को लेकर हैं क्योंकि चुनाव से पहले ख़ुद योगी इस मुद्दे पर काफी मुखर रहे हैं.

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लेकिन वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र को मंदिर निर्माण से संबंधित किसी घोषणा की उम्मीद नहीं दिखती है, "ये भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि राजनीतिक दलों की भाषा सत्ता पक्ष और विपक्ष में अलग-अलग हो जाती है.''

उन्होंने कहा, ''बीजेपी जिन तमाम मुद्दों का विपक्ष में रहते हुए विरोध करती थी आज उन्हीं के समर्थन में खड़ी है. योगी भी चुनाव से पहले चाहे जितने मुखर रहे हों लेकिन अब उनके सामने मुख्यमंत्री पद की मजबूरियां भी हैं.''

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मिश्रा ने कहा, ''ऐसे में लगता नहीं है कि राम मंदिर को लेकर वो कोई ठोस बात कह सकने की स्थिति में होंगे."

बहरहाल, लंबे समय बाद किसी मुख्यमंत्री की अयोध्या यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. यूं तो मंदिरों के दर्शन के अलावा योगी के कार्यक्रम में मंडलीय समीक्षा भी शामिल है लेकिन जानकारों का कहना है कि निगाहें तो सिर्फ़ राम मंदिर पर उनके किसी वक्तव्य या घोषणा पर होंगी.

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