बिहार बोर्ड परीक्षा में करीब आठ लाख छात्र फेल

  • 31 मई 2017
इमेज कॉपीरइट Niraj Sahai

साल 2016 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) इंटर परीक्षा टॉपर घोटाले के कारण सुर्ख़ियों में रही थी. इस साल के परिणाम फेल होने वालों की बड़ी संख्या के कारण चर्चा में है. मात्र 35 प्रतिशत परीक्षार्थी ही इस बार पास हुए हैं.

मंगलवार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटर आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के परिणाम जारी किए.

64 प्रतिशत छात्र फेल

इस परीक्षा में तीनों विषयों के कुल 12 लाख 40 हज़ार168 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 7 लाख 54 हज़ार 622 फेल हो गए. यानी कुल परिक्षार्थियों में से 64 फ़ीसदी पास तक नहीं हो पाए.

आर्ट्स में पिछले साल क़रीब 44 फ़ीसदी परीक्षार्थी नाकाम रहे थे, जबकि इस साल 61 फ़ीसदी छात्रों को निराश होना पड़ा.

इसी तरह विज्ञान में साल 2016 में मात्र 33 फ़ीसदी बच्चे फेल हुए थे, जबकि इस साल 69.52 फ़ीसदी फेल हुए.

कॉमर्स में स्थिति कुछ बेहतर रही. इसके 60 हज़ार 22 छात्रों में से मात्र 25 फ़ीसदी फेल हुए.

इस बेहद निराशाजनक परीक्षाफल के लिए परीक्षार्थियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को ज़िम्मेदार ठहराया.

'फर्स्ट टॉपर का ये हाल तो सेकेंड टॉपर का क्या'

बिहारः अंडरगार्मेंट्स से परीक्षा में नक़ल की कोशिश

इमेज कॉपीरइट Niraj Sahai
Image caption प्रिया कुमारी

जांच में गड़बड़ी के आरोप

जगत नारायण कॉलेज, खगौल के आर्ट्स की छात्रा प्रिया कुमारी कहती हैं, "हर दिन छह घंटे पढ़ाई करती थी. सारे सवालों का जवाब भी दिया था, लेकिन ऐसे परिणाम की उम्मीद कभी नहीं की थी. निश्चित ही कॉपी जांच में गड़बड़ी हुई है. मैं पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन दूंगी."

राम लखन सिंह उच्च विद्यालय, पालीगंज की विज्ञान की छात्रा संगीता कुमारी हिंदी छोड़ सभी विषयों में फेल है.

संगीता को भी लगता है कि कॉपी जांच में गड़बड़ी हुई है. अभिभावकों का आरोप है कि कॉपी की जांच ठेके पर बहाल ऐसे शिक्षकों से कराई ग जिनकी योग्यता अपने आप में संदिग्ध है.

इमेज कॉपीरइट Niraj Sahai

बोर्ड की सख़्ती का नतीजा

दूसरी ओर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर दावा करते हैं कि परीक्षा के दौरान सख़्ती और बार कोडिंग की वजह से यह रिज़ल्ट आया है.

कदाचार मुक्त परीक्षा के बाद कहीं कोई पैरवी नहीं चली. टॉपर्स की कॉपियाँ विशेष टीम के द्वारा दो बार जांची गई.

इन परिणामों से ऐसा लगता है कि टॉपर घोटाले की बदनामी के दूध से जले बिहार बोर्ड ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किए बिना मट्ठा फूंक-फूंक कर पीने की ऐसी नीति अपनाई की परीक्षा में सख़्ती की वजह से 64 फ़ीसदी छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे