'गाँव के मर्दों के सामने घूंघट हटाकर काम करना आसान नहीं'

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राजस्थान के पिछड़े क्षेत्रों में से एक सिरोही जिले की ग्राम पंचायत रायपुर की सरपंच हैं गीता देवी राव.

कुछ ही समय पहले तक यहां की ख़ास बातें थी- बंद पड़ी आंगनवाड़ी, स्कूल से नदारद टीचर, शौचालय की सुविधा से महरूम स्कूल और पुल विहीन नदी से कटे हुए बडगांव, हड़मथिया और रायपुर जैसे गाँव.

इन गांवों से नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड की दूरी 65 किलोमीटर है.

रेवदर ब्लॉक की इस ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी संभालना सरपंच बनी 34 वर्षीय गीता के लिए चुनौती भरा था.

गाँव की नदी पर दो बार पुल की नींव रखी जा चुकी थी पर बजट की कमी से काम बरसों से लटका था.

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ऑस्ट्रेलिया यात्रा

बरसात के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना या बीमार लोगों को अस्पताल पहुँचाना मुश्किल हो जाता था. कुछ गर्भवती महिलाओं की तो देरी से अस्पताल पहुँचने के कारण मौत भी हो गई थी.

सारद संस्था (सोसाइटी फॉर आल राउंड डेवलपमेंट) की सुनीता ने बीबीसी को बताया, "गीता ने पीडब्लूडी विभाग से लेकर पंचायत मंत्री तक गुहार कर बजट 80 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करवाया और पुल बना. गुजरात की सीमा से सटे रायपुर में आवागमन व रहने-खाने की अच्छी सुविधाओं की कमी के कारण लोग यहाँ आना ऐसा मानते थे जैसे काले पानी की सजा."

गीता ने रायपुर की छवि बदली है. कुछ समय पहले कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के दल ने सिरोही यात्रा के दौरान गीता का काम देखा और उन्हें ऑस्ट्रेलिया आने का न्योता दिया.

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गांव की लड़कियों की खुशी

हाल ही में ब्रिसबेन, मेलबर्न और सिडनी में अपने अनुभव साझा कर रायपुर लौटीं गीता ने बीबीसी को बताया, "मैं अकेली दिल्ली तक भी नहीं गई थी. पहली विदेश यात्रा और वहां अपने प्रेजेंटेशन को लेकर मन में स्वाभाविक धुकधुकी तो थी ही. पर फिर मन ही मन दोहराया - कुछ करना है तो डरना नहीं. हंगर प्रोजेक्ट और सारद संस्था की ट्रेनिंग से भी काफी कुछ सीखने को मिला."

गीता ने जबसे खाली पड़े पुराने सरकारी भवन को किशोरी सन्दर्भ केंद्र में तब्दील करवाया है, गाँव की लड़कियां बहुत खुश हैं.

बारहवीं कक्षा में पढ़ रही खुशबू कहती हैं, "पहली बार किसी ने लड़कियों के लिए सोचा. हम यहाँ ग्रुप में बैठकर इम्तिहान की तैयारी भी करते हैं और खेलने को रस्सी, कैरम से लेकर वॉलीबाल और बैडमिंटन भी है. वर्ना तो स्कूल और घर के कामों में माँ का हाथ बंटाने के अलावा हमारी और कोई दिनचर्या नहीं थी."

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शौचालय की समस्या

एक अन्य छात्रा लक्ष्मी ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "अब तक हम पास-पड़ोस के लड़कों और हमारे भाइयों को बाहर खेलते हुए देखते थे बस. हमें खेलने की न जगह थी ना इज़ाज़त. अब हम भी खेलते हैं, पढ़ते हैं और कम्प्यूटर भी सीखेंगे."

उन्होंने कहा, "लड़कियों के लिए शौचालय भी नहीं था हमारे स्कूल में. हमें बाहर कहीं झाड़ियों के बीच ही जाना पड़ता था और माहवारी के दिनों में हम स्कूल जाने से कतराते थे. इस केंद्र पर सेनेटरी नेपकिंस भी मिलने लगे हैं हमें."

बारहवीं कक्षा तक के स्कूल में पहले सिर्फ एक शिक्षक हुआ करता था. अब सरपंच गीता के प्रयासों से छह शिक्षक हैं.

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भ्रूण हत्या विरोधी मुहिम

गीता कहती हैं, "'सरपंच आपके द्वार' जैसी पहल से मैंने पूरी ग्राम पंचायत की समस्याओं को जानने की कोशिश की है. गाँव के मर्दों और बुजुर्गों के सामने घूंघट हटाकर काम करना आसान नहीं होता. पर मुझे ख़ुशी है कि मैंने अपनी पंचायत को नई पहचान दी है."

सिरोही जिले में शिक्षा का प्रतिशत 56.02 है और यहां का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 938 लड़कियों का है.

आठवीं तक पढ़ी गीता दो बेटियों की माँ हैं. उनका सपना है गाँव में कॉलेज खोलना.

रायपुर पंचायत अब बाल विवाह विरोधी और भ्रूण हत्या विरोधी मुहिम में भी जुट गई है. लड़कियों के जन्म पर पेड़ लगाने और सामाजिक चेतना के संदेश किशोरी केंद्र की पहचान बने हैं.

सबसे प्रेरक माने जा रहे हैं वे चित्र जहाँ लड़कियां डॉक्टर, पायलट और शिक्षक की भूमिका में हैं.

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