जिस जस्टिस शर्मा को गाय पसंद है

  • 1 जून 2017
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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की सिफारिश कर सुर्खियों में आए राजस्थान हाई कोर्ट के जज जस्टिस महेश चंद्र शर्मा को वकालत का लंबा अनुभव रहा है.

वह साल 2000 से 2003 तक राजस्थान में अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे हैं. उस वक़्त राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में थी.

जस्टिस शर्मा ने जयपुर से सटे दौसा में विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जयपुर में राजस्थान विवि से क़ानून की डिग्री हासिल की और साल 1979 में वकालत शुरू की थी.

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बाद में वह वर्ष 2007 में हाई कोर्ट में जज नियुक्त किए गए. कोई एक दशक के इस कार्यकाल में जस्टिस शर्मा ने औसत 54 मुक़दमें हर दिन निपटाए. लेकिन उन्हें गायों के संरक्षण से जुड़े इस मामले की वजह से ज़्यादा याद किया जाता रहेगा.

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जस्टिस शर्मा ने जागो जनता सोसाइटी की और से दायर इस जनहित याचिका में नियमित सुनवाई की और स्वयं गायों का रखखाव देखने जयपुर की हिंगोनिया गोशाला का दौरा किया.

इस मामले में कई बार अधिकारियों को भी अदालत में तलब किया. यह जज के रूप उनका अंतिम कार्य दिवस था.

इसके अलावा जस्टिस शर्मा ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने में विफलता को लेकर पुलिस को भी फटकार लगाई.

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उन्हें बार और बेंच से अच्छे रिश्तों के निर्वाह के कारण भी जाना जाता है. रिश्तों की यही बात मीडिया के साथ भी लागू होती है. जज नियुक्त होने से पहले वो दो मीडिया संस्थानों के वक़ील भी रह चुके हैं.

जस्टिस शर्मा हाई कोर्ट में बतौर जज बुधवार को रिटायर हो गए हैं लेकिन हर पटाक्षेप किसी नई पारी का मार्ग भी प्रशस्त करता है.

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