करुणानिधि के जन्मदिन के बहाने बीजेपी के ख़िलाफ़ मोर्चाबंदी?

  • 3 जून 2017

चेन्नई में डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि के जन्मदिन समारोह में विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता पहुंच रहे हैं और इस बहाने केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ एक साझा रणनीति के कयास भी लगाए जा रहे हैं.

हफ़्ते भर पहले ही विपक्षी नेताओं की मुलाक़ात हुई थी, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष के साझे राष्ट्रपति उम्मीदवार के मुद्दे पर चर्चा बुलाई थी.

करुणानिधि शनिवार को 94 साल के हो रहे हैं. यह समारोह विपक्षी एकजुटता की कुछ पुरानी यादें भी साथ ले आया है.

26 साल पहले, 1989 में उन्हीं के बुलावे पर चेन्नई में विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर आए थे और इसका नतीजा वीपी सिंह की अगुवाई वाले राष्ट्रीय मोर्चे के गठन के तौर पर सामने आया था. तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, अब बीजेपी की सरकार है.

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Image caption करुणानिधि की पुरानी तस्वीर

कौन कौन होगा मेहमान?

यह करुणानिधि के राजनीतिक कौशल का भी सबूत है कि वह दोनों तरफ़ से सियासी पारियां खेल चुके हैं. वह अटल बिहारी वाजपेयी की गठबंधन सरकार में साझेदार रहे तो मनमोहन सिंह के समय यूपीए सरकार में भी शामिल रहे.

उनके जन्मदिन पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पुड्डुचेरी के कांग्रेसी मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सीपीएम के सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक-ओ-ब्रायन, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, सीपीआई के डी राजा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के के एम कादिर मोहिदीन शामिल होंगे. आरजेडी के लालू प्रसाद यादव स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से नहीं आ रहे हैं.

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Image caption जेडीयू नेता शरद यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, जेडीयू नेता केसी त्यागी (फाइल फोटो)

क्या यह विपक्षी एकता है?

तो करुणानिधि के बतौर विधायक 60 साल पूरा करने पर हो रहा यह समारोह क्या बीजेपी के ख़िलाफ़ विपक्षी एकता की शुरुआत है?

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने बीबीसी हिंदी के वात्सल्य राय से कहा, 'हमारा मुख्य मक़सद करुणानिधि जी को बधाई देना ही है. स्वाभाविक है, जब हम मिलेंगे तो भविष्य पर भी चर्चा करेंगे. हमें लगता है कि ये ज़रूरी है क्योंकि संविधान पर गंभीर ख़तरा मंडरा रहा है. हमें साथ आने की ज़रूरत है.'

कांग्रेस प्रवक्ता प्रणव झा ने कहा कि करुणानिधि यूपीए के एक अहम सदस्य थे, इसलिए कांग्रेस की इस समारोह में मौजूदगी स्वाभाविक है.

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Image caption सीताराम येचुरी, लालू यादव और राहुल गांधी के साथ (फाइल फोटो)

उन्होंने कहा, 'लेकिन यह कोई इकलौता सार्वजनिक मंच नहीं है, जब विपक्षी दलों के नेता एक साथ होंगे. कल आंध्र प्रदेश में भी एक दूसरी वजह से विपक्षी पार्टियां एक मंच पर होंगी.'

झा ने कहा कि आंध्र प्रदेश को विशेष पैकेज के लिए दबाव बनाने के लिए गुंटूर में कांग्रेस एक रैली कर रही है, जिसमें दूसरे दलों के नेता भी शामिल होंगे.

झा ने कहा, 'कुछ वजहों से तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने बीजेपी से हाथ मिला लिया है और इसका ख़ामियाज़ा लोगों को हो रहा है. ये बीजेपी विरोधी पार्टियों के एक साथ आने की एक और वजह है.'

बिहार सरीखा महागठबंधन?

येचुरी एक और दिलचस्प बात कहते हैं कि अतीत में एक दूसरे के ख़िलाफ़ रही पार्टियां भी बीजेपी के ख़िलाफ़ एक मंच पर आ रही हैं.

राजनीतिक विश्लेषक आनंद सहाय कहते हैं, 'यह तथ्य है कि जब जेडीयू के नीतीश कुमार, आरजेडी के लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस ने हाथ मिलाया तो बिहार में बीजेपी हार गई. लेकिन उत्तर प्रदेश के नतीजे ठीक उलट थे क्योंकि वहां विपक्षी एकता नहीं थी.'

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Image caption 15 अप्रैल 2015 की तस्वीर, जब 6 पार्टियों ने 'जनता परिवार' के तौर पर साथ आने का ऐलान किया था

आनंद सहाय मानते हैं कि ये घटनाएं एक प्रक्रिया की शुरुआत हैं. वह कहते हैं, 'हो सकता है सौ फ़ीसदी सफलता न मिले, लेकिन बिहार का उदाहरण हमारे सामने है. हो सकता है भविष्य में कुछ लोग ऐसी बैठकों में आएं और कुछ न आएं. मतभेद तो होते ही हैं. लेकिन जब प्रक्रिया तेज़ होती है तो ऐसी घटनाएं होती हैं.'

26 साल पहले के अनुभवों को ज़ेहन में रखते हुए करुणानिधि स्पष्ट तौर पर सकारात्मक सोच के साथ उस मंच के बारे में सोच रहे होंगे, जो चेन्नई में बनने जा रहा है.

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