'इंडिया को नहीं बचा पाए तो क्या फ़ायदा'

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देश के 'संवैधानिक ढांचे को बचाने' के उद्देश्य से भाजपा-विरोधी गठबंधन बनाने के लिए कई छोड़ी-बड़ी पार्टियों ने पहल कर दी है.

कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियों और कई राज्य स्तरीय राजनीतिक पार्टियों ने इस दिशा में अपने कदम उठाए हैं.

कांग्रेस के राहुल गांधी, सीपीएम के सीताराम येचुरी, नैश्नल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ'ब्राएन, नैशनल कांग्रेस पार्टी के शरद पवार के प्रतिनिधि माजिद मेनन और सीपीआई के डी राजा ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने उन्हें 'इंडिया के आइडिया यानी विचार को बचाने' का एक मौका दिया है.

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मौक़ा था मुथुवेल करुणानिधि के 94वें जन्मदिन का. चेन्नई में एक बड़े समारोह का आयोजन किया गया था जहां जनता दल युनाईटेड के प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे.

हालांकि नीतीश भाजपा-विरोधी गठबंधन के समर्थन में येचुरी, अब्दुल्ला या राहुल गांधी की तरह आक्रामक तेवर लिए नज़र नहीं आए.

लेकिन, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के इस मौक़े पर उपस्थित ना हो पाने को ग़लत ना समझा जाए. उन्होंने कहा कि लालू को तेज़ बुखार होने के कारण वो यहां नहीं आ पाए हैं.

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Image caption नीतीश ने रैली में एम करुणानिधि को सामाजिक न्याय का चैंपियन बताया.

नीतीश ने कहा, "ऐसा नहीं है कि लालू मंच पर मौजूद नेताओं से सहमत नहीं है या वो करुणानिधि का सम्मान नहीं करते."

वहां पर मौजूद डी राजा समेत अन्य नेताओं ने डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन को मंच पर एक साथ आने का मौक़ा देने के लिए शुक्रिया कहा.

सीताराम येचुरी ने कहा कि संविधान के चार स्तंभों - धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र, सामाजिक न्याय, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संघीय ढांचे - में सभी का विश्वास है.

उन्होंने कहा, "इन मूलभूत सिद्धांतों को कभी चुनौती नहीं दी गई था, लेकिन आज इसे चुनौती मिल रही है."

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उमर अब्दुल्ला ने कहा, "हम सही मायनों में उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम पूरे देश के बड़े तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस तबके की राजनीतिक विचार ये है कि देश जिस दिशा में जा रहा है वो ख़तरनाक़ है. हम एक साथ आएंगे और हमारे संविधान के उस ढांचे को बनाए रखेंगे जिसका सपना हमारे देश की नींव रखने वालों ने देखा था."

राहुल गांधी ने कहा, "जैसे करुणानिधि और स्टालिन तमिलनाडु के लोगों की आवाज़ हैं, मंच पर मौजूद हर नेता महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर के लोगों की आवाज़ हैं."

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राहुल ने कहा, "सभी नेता इस बात पर सहमत हैं कि लोग समझदार हैं. येचुरी जी ने कहा कि यहां मौजूद हम सभी लोगों में विरोधाभास है. लेकिन इंडिया का आइडिया यही है कि जब ये सब विविध आवाज़ें बोलती हैं तो भारत और मज़बूत होता है."

उन्होंने कहा, "वो (बीजेपी) मानते हैं कि भारत में सिर्फ़ एक ही संस्कृति है. हम उनसे पूरी तरह असहमत हैं. सिर्फ़ कोई एक आवाज़ देश नहीं चला सकती और देश की संस्कृति क्या होगी ये तय नहीं कर सकती. इस मंच पर बैठे हम सभी लोग और देश के लोग आरएसएस और मोदीजी को देश में एक संस्कृति लागू नहीं करने देंगे."

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये विपक्षी दलों के नेताओं के साथ आने के बहुत से मौकों में से एक अहम मौका है.

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येचुरी ने कहा, "अगर हम भारत को नहीं बचा सकते तो फिर हमारे मंच पर एकजुट होने का कोई मतलब नहीं है. भारत को बचाए जाने की ज़रूरत है और भारत में सकरात्मक बदलाव की ज़रूरत है."

हालांकि करुणानिधि स्वयं ख़राब सेहत की वजह से रैली में मौजूद नहीं थे.

लेकिन सभी नेताओं ने अपने भाषणों में कहा कि उनकी समझ और अनुभव भारत की भिन्न संस्कृतियों को बचाने में काम आएगा.

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