क़तर 'संकट' से पूर्वांचल के लोग परेशान

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और यूएई के क़तर से अपने कूटनीतिक संबंध तोड़ देने के अंतरराष्ट्रीय असर तो हैं ही, लेकिन उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के कई जिलों में भी भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है.

पूर्वांचल के आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, भदोही, गोरखपुर, बस्ती सहित कई ज़िलों से बड़ी संख्या में लोग क़तर में मेहनत-मज़दूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं. क़तर पर प्रतिबंध के बाद न सिर्फ़ वहां काम करने वाले भारतीयों में एक तरह की चिंता है बल्कि यहां रह रहे उनके परिवार के लोग भी परेशान हैं.

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Image caption क़तर की राजधानी दोहा में काम करते मज़दूर (फ़ाइल फोटो)

बीते दिनों में बढ़ी है क़तर जाने वाले पूर्वांचलियों की तादाद

हालांकि इस परेशानी को लोग खुलकर बताने से हिचक भी रहे हैं. गोरखपुर के रहने वाले फ़त्ते मोहम्मद के बेटे और परिवार के कई लोग क़तर में रहते हैं.

बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, 'अभी कल ही बात हुई है, कोई दिक़्क़त नहीं है, लेकिन मीडिया में जो कुछ सुनने में आ रहा है, उसे लेकर घर-परिवार में चिंता होना स्वाभाविक है.'

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पूर्वांचल के तमाम ज़िलों से बड़ी संख्या में लोग सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, क़तर जैसे खाड़ी देशों में रहते हैं. पिछले कुछ दिनों में ये संख्या और भी ज़्यादा बढ़ी है.

अब्दुल सत्तार क़तर के दोहा में रहते हैं और एक प्राइवेट कंपनी में अधिकारी हैं. उनकी वजह से क़तर में पूर्वांचल के कई लोगों को नौकरी मिली है. वो कहते हैं कि फ़िलहाल किसी तरह का संकट तो नहीं है लेकिन लोगों में आशंका ज़रूर है.

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Image caption अब्दुल सत्तार

नौकरी और सलामती की चिंता

अब्दुल सत्तार कहते हैं, 'फ़िलहाल तो यहां इस बारे में हम लोग कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं. एअरलाइंस के रास्ते बदलने से घूम कर जाना पड़ रहा है लेकिन इससे हम लोगों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा है. हां, कुछ लोगों ने डर के मारे कई दिनों का राशन ज़रूर इकट्ठा कर रखा है ताकि किसी तरह की आपात स्थिति में खाने-पीने की दिक़्क़त न हो.'

वहीं गोरखपुर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गौरव दुबे का कहना है कि लोग खुलकर कुछ बोलने से डर रहे हैं, लेकिन जब से प्रतिबंध वाली ख़बरें आई हैं क़तर में रह रहे लोगों के परिवार वालों में ज़बर्दस्त हलचल है. लोगों को नौकरी जाने की आशंका तो है ही, सलामती की चिंता भी सता रही है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पिछले दिनों यूएई से कई लोगों को वापस आना पड़ा था.

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गौरव दुबे कहते हैं कि मंगलवार को यहां करेंसी बदलने वाली एजेंसी ने अपने तमाम एजेंटों से कहा है कि वो क़तर की मुद्रा रियाल न लें. गौरव दुबे कहते हैं कि ऐसा क्यों किया गया है, ये नहीं पता लेकिन इसे लेकर चर्चाएं ख़ूब हो रही हैं.

वहीं सरकारी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक किसी ने कोई आशंका नहीं ज़ाहिर की है और क़तर में रह रहे सभी लोग सलामत हैं. लेकिन जानकारों का कहना है कि जिस तरह से करेंसी बदलने की प्रक्रिया को बंद करने की ख़बरें आ रही हैं, उससे लोगों की आशंकाएं बढ़ेंगी ही.

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