उत्तर प्रदेश: क्या है गोरक्षा के लिए लगने वाला गुंडा एक्ट

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उत्तर प्रदेश में मवेशियों की तस्करी करने और उन्हें जान से मारने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट जैसे कड़े क़ानूनों के तहत मुक़दमा चलाया जा सकता है.

ये फ़ैसला राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लिया है. इस सिलसिले में पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने सभी ज़िला पुलिस प्रमुखों को निर्देश जारी कर दिया है.

हालांकि अखिलेश यादव की पिछली सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले की तामील करते हुए गैंगस्टर एक्ट में संशोधन लाकर बदलाव किया था.

लेकिन अब योगी सरकार ने नए प्रावधानों को लागू करने का फ़ैसला किया है.

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क्या है एनएसए

  • यह कानून जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू है.
  • नेशनल सिक्योरिटी एक्ट या रासुका के तहत किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हिरासत में लिया जा सकता है.
  • पब्लिक ऑर्डर या ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारें भी इसके तहत किसी को गिरफ्तार कर सकती हैं.
  • पकड़े गए व्यक्ति को पांच दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की वजह बताना जरूरी नहीं है.
  • असाधारण परिस्थितियों में 15 दिनों तक किसी को बिना वजह बताए हिरासत में रखा जा सकता है.
  • हालांकि ये मुद्दत वजह बताने की है. लेकिन इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है.
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गुंडा एक्ट

  • यह उत्तर प्रदेश सरकार का क़ानून है जो सिर्फ़ यूपी में लागू होता है.
  • गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के तहत अगर किसी पर मामला दर्ज किया जाता है तो वह व्यक्ति पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किसी गिरोह का हिस्सा हो जाता है.
  • इस क़ानून के दायरे में आने वाले आसामी की गतिविधियों पर नज़र रखने का हक पुलिस पर होता है.
  • उसे लोकल थाने में हाजिरी के लिए कभी भी बुलाया जा सकता है, भले ही उसके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न किया गया हो.
  • गुंडा एक्ट के तहत पुलिस अभियुक्त के लिए 60 दिनों की रिमांड की मांग कर सकती है. सामान्य परिस्थितियों में 14 दिनों का रिमांड मांगा जाता है.
  • इसके तहत कम से कम दो साल और अधिकतम 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है.

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