मोदी के कृषि मंत्री ने भी ओढ़ी किसानों की मौत पर चुप्पी

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कृषि मंत्री राधामोहन सिंह (बाएं)

बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के मंदसौर में गोली लगने से पांच किसानों समेत छह लोगों की मौत हो गई. लेकिन इस पर अब तक देश के कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री का कोई बयान नहीं आया है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है.

इस बीच कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह बुधवार को दिल्ली में अपने कार्यक्रमों और गतिविधियों की तस्वीरें ट्विटर पर लगाते रहे, लेकिन मंदसौर घटना पर उन्होंने एक भी ट्वीट नहीं किया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी इस बीच ऐसे मौक़ों पर चुप्पी ओढ़ने के आरोप बढ़े हैं. लेकिन एकाधिक मौक़ों पर उनके मंत्रियों का बयान आ ही जाता है. इस बार कृषि मंत्री भी चुप हैं.

मंदसौर घटना के अगले दिन 7 जून को अख़बारों में सरकार ने कृषि क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों वाले विज्ञापन छपवाए. न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार ऐलेन बैरी ने इसकी तस्वीर ट्विटर पर साझा की.

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बुधवार को कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 'स्वच्छता पखवाड़ा' कार्यक्रम के 'सफल समापन' पर कैबिनेट ब्रीफ़िंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, लेकिन इसे 'अपरिहार्य कारणों' से स्थगित कर दिया गया.

लेकिन इसी दिन उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से उनके दफ़्तर में मुलाक़ात की. बातचीत का विषय था- हिमाचल प्रदेश में कृषि संस्थान और शिक्षा.

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इसके बाद उन्होंने केरल के कृषि मंत्री से वहां की एक समस्या पर चर्चा की. उनसे इस मसले पर प्रस्ताव मांगा और मदद का आश्वासन दिया. इस बैठक की तस्वीरें भी उनके ट्विटर हैंडल से लगाई गईं.

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इसके बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा (ICAR) में जनजातीय क्षेत्रों में किसानों के सशक्तिकरण के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय वर्कशॉप को संबोधित किया.

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कृषि मंत्री दिन भर ट्विटर पर सक्रिय और व्यस्त रहे, लेकिन मंदसौर की घटना, जिसे विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी इतनी प्रमुखता से कवर किया, उस पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा.

बिहार के पूर्वी चंपारण से सांसद राधामोहन सिंह पहले विवादों में भी रह चुके हैं. इससे पहले 2015 में राज्यसभा में दिए एक लिखित जवाब में कह चुके हैं कि किसान की ख़ुदकुशी में क़र्ज़ के साथ-साथ, दहेज़, प्रेम संबंध और नामर्दी भी एक वजह है.

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Image caption शपथ ग्रहण करते राधामोहन सिंह

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी बयान का इंतज़ार है. मंदसौर घटना के बाद से वह ट्विटर पर नेपाल के नए प्रधानमंत्री को बधाई, उत्तान मंडूक आसन के फायदे बताने वाला वीडियो और एससीओ सम्मेलन में शामिल होने की सूचना ट्विटर पर पोस्ट कर चुके हैं. लेकिन किसानों की मौत पर अभी तक 'दुख जताने' वाली प्रतिक्रिया भी नहीं आई है.

इस बीच विपक्षी सोशल मीडिया कार्यकर्ता प्रधानमंत्री का एक पुराना ट्वीट खूब शेयर कर रहे हैं. जब आम आदमी पार्टी की रैली में गजेंद्र नाम के किसान ने 'कथित' ख़ुदकुशी कर ली थी और चंद घंटों में प्रधानमंत्री ने इस पर ट्वीट कर दिया था.

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जानकारों के मुताबिक, इस बार बंपर फ़सल होने से आपूर्ति ज़्यादा है, इसलिए किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं.

इससे पहले महाराष्ट्र में कई ज़िलों के किसान क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों के उचित दाम की मांग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे और उन्होंने सब्ज़ियों और दूध की आपूर्ति रोकना शुरू कर दिया था. हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस ले ली गई.

जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के किसानों के बहुचर्चित प्रदर्शन को भी अभी ज़्यादा दिन नहीं बीते हैं.

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Image caption तमिलनाडु के किसानों ने इस तरह दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था

क़र्ज़ माफ़ी है इलाज?

फ़सलों के ख़राब होने पर किसान क़र्ज़ लेते हैं, लेकिन उसे चुकाने के लिए फ़सलों से उन्हें वैसी आमदनी नहीं होती. इस तरह ये क़र्ज़ बढ़ता जाता है.

ज़्यादातर मामलों में किसानों की तरफ से क़र्ज़ माफ़ी की मांग को पुरजोर तरीके से रखा जा रहा है, लेकिन किसानों की समस्याओं के स्थायी इलाज के लिहाज से यह तरीका सवालों के घेरे में है.

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने दो करोड़ से ज़्यादा लघु और सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक का क़र्ज़ माफ़ करने का ऐलान किया. लेकिन आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने इस फ़ैसले की आलोचना की और कहा कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान होगा.

उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है कि ऐसी क़र्ज़ माफियों से परहेज़ करने पर हमें सहमति बनाने की ज़रूरत है. वरना ऐसी चुनौतियों का असर देश की बैलेंस शीट पर दिखाई देगा.'

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