मध्यप्रदेशः किसानों के ग़ुस्से का हथियार उठा पाएगी कांग्रेस?

  • 9 जून 2017
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मध्यप्रदेश के किसानों का हिंसक प्रदर्शन

व्यापम घोटाला, अवैध रेत खनन समेत भ्रष्टाचार के कई मामले और अब मंदसौर में फ़ायरिंग से 6 किसानों की मौत.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ख़तरनाक विकेट पर बैटिंग कर रहे हैं. सूबे में अगले साल चुनाव हैं, लेकिन विपक्षी कांग्रेस की बॉलिंग इतनी कमज़ोर है कि वो शिवराज को आउट करने की स्थिति में नहीं दिख रही है.

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'द वीक' पत्रिका से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी कहते हैं, "तमाम विवादों के बावजूद शिवराज की छवि गरीबों के नेता की है. इसलिए कांग्रेस को अगर बीजेपी से मुक़ाबला करना है, तो उसे बड़े चेहरों के बजाय एक ऐसे नेता को आगे लाना चाहिए, जो लो-प्रोफ़ाइल रखता हो. जिससे जनता खुद को जोड़कर देख सके."

दीपक तिवारी बताते हैं कि किसानों का गुस्सा कृषि क्षेत्र में 20 फ़ीसदी तरक्की के सरकारी दावों की पोल खोलने वाला है. उसके बावजूद कांग्रेस किसानों के गुस्से का फ़ायदा उठाती नहीं दिख रही है.

'सब को दिल्ली से राजनीति करनी है'

दीपक आगे कहते हैं, "कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी जैसे कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली से ही राजनीति करना चाहते हैं. प्रदेश की राजनीति में बिना पद के कोई भी काम नहीं करना चाहता."

कई और विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस वीआईपी कल्चर से आगे नहीं बढ़ पा रही है.

राज्य की राजनीति पर क़रीब से निगाह रखने वाली राजनीति शास्त्र की प्रोफ़ेसर अनिता शर्मा का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर कांग्रेसी कार्यकर्ता भले ही लाख कोशिश करें, लेकिन इसके बड़े नेता आज भी जनता से कनेक्ट नहीं कर पाते. जबकि बीजेपी के बड़े नेता भी जनता से सीधे संवाद को प्राथमिकता देते हैं. इसका फ़ायदा उन्हें चुनाव में मिलता है. इस कमी के चलते कांग्रेस किसी भी मुद्दे को असरदार तरीके से जनता के बीच नहीं रख पाती है.

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कांग्रेस का दावा

हालांकि, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता दावा करते हैं कि किसान, नौजवान, कर्मचारियों, महंगाई, विकास समेत हर मुद्दे पर कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है.

लेकिन लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी भाजपा के बारे में भूपेंद्र कहते हैं कि भाजपा तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर चुनाव जीतती है.

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जबकि कांग्रेस के कार्यकर्ता भी यह मानते हैं कि प्रदेश में पार्टी नेतृत्व को लेकर अगर स्थिति साफ़ हो जाए, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा.

गंजबासौदा से कांग्रेस विधायक निशंक जैन दावा करते हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को राज्य में कांग्रेस की कमान सौंप दी जाए, तो पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत से सरकार बना सकती है.

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र शर्मा मानते हैं कि रणनीति के हिसाब से कांग्रेस में कई खामियां हैं, जिनसे वो उबर नहीं पा रही है.

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मध्य प्रदेश में एक मज़बूत विकल्प के तौर पर कांग्रेस को अगर उभरना है, तो उसे नए सिरे से शुरुआत करनी होगी.

भूपेंद्र के मुताबिक़, आंदोलन में कांग्रेस का किसानों के साथ होने से जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि मंदसौर की घटना प्रदेश की सियासत में एक बड़ा फ़र्क पैदा कर सकती है और कांग्रेस ठीक से अपने पत्ते खेले, तो शिवराज का सिंहासन हिला भी सकती है.

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