प्रेस रिव्यू- कज़ाकस्तान में मिले मोदी और शरीफ़, पूछा हालचाल

  • 9 जून 2017
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ कजाकस्तान में शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ सम्मेलन के स्वागत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का आमना-सामना हुआ. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया.

अख़बार के मुताबिक़ मोदी ने शरीफ़ और उनकी मां की सेहत का हालचाल लिया.

स्वागत समारोह के लिए रवाना होने से पहले शरीफ़ से सवाल किया गया था कि क्या उनकी मोदी से मुलाक़ात होगी? इस पर वह सिर्फ़ मुस्कुराए और मीडियाकर्मियों की ओर हाथ हिलाया. शरीफ़ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले का भी कहना है कि मुलाक़ात के लिए न तो पाकिस्तान की ओर से अनुरोध किया गया है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव भारत ने किया है.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ तेल कंपनियों ने 16 जून से पूरे देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में हर रोज़ बदलाव करने का फैसला किया है.

देश की तीन बड़ी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि देशभर में 58,000 पेट्रोल पंपों पर 16 जून से पेट्रोल व डीजल के दाम दैनिक आधार पर तय होंगे.

इसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी विनियम दर के आधार पर पेट्रोल और डीज़ल के दामों में 16 जून से दैनिक आधार पर कुछ पैसे का बदलाव होगा.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ भारत के थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का कहना है कि भारतीय सेना बाहरी के साथ-साथ आंतरिक खतरों से भी निपटने के लिए बिल्‍कुल तैयार है. उन्‍होंने कहा कि भारत ढाई मोर्चे (पाकिस्‍तान, चीन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी जरूरतें) पर युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम है.

अखबार ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से लिखा है कि सेना प्रमुख रावत ने कहा कि भारत मल्टी-फ्रंट युद्ध के लिए तैयार है. रावत ने कहा कि सेना के पास प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र उपलब्ध है.

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दैनिक भास्कर के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग में ममता बनर्जी सरकार के ख़िलाफ़ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का आंदोलन हिंसक हो गया है. गुरुवार को आगजनी और पथराव में नॉर्थ बंगाल के डीआईजी समेत 50 पुलिसकर्मी घायल हुए. हिंसा के बाद हालात काबू करने के लिए सेना बुलानी पड़ी है. जनमुक्ति मोर्चा ममता सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहा है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पहली से 10वीं तक बंगाली भाषा को पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है.

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