दस ख़तों में पढ़ें दुआ और सौम्या के दिल की बातें

  • 9 जून 2017

क्या आपने कभी सोचा है कि दशकों से तनाव और हिंसा का केंद्र रही कश्मीर घाटी में बड़ी हो रहीं लड़कियों और बाक़ी भारत में रहनेवाली लड़कियों की ज़िंदगी कितनी एक जैसी और कितनी अलग होगी?

यही समझने के लिए हमने वादी में रह रही दुआ और दिल्ली में रह रही सौम्या को एक दूसरे से ख़त लिखने को कहा. सौम्या और दुआ कभी एक दूसरे से नहीं मिले.

उन्होंने एक-दूसरे की ज़िंदगी को पिछले दो महीने में इन 10 ख़तों से ही जाना.

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मिलिए श्रीनगर की दुआ और दिल्ली की सौम्या से

ख़त 1: 'जन्नत' से दिल्ली आया एक लड़की का ख़त

ख़त 2: 'क्या सच में कश्मीर में सिर्फ़ मुसलमान रहते हैं?'

ख़त 3: 'धर्म कोई भी हो, कश्मीर में बहुत भाईचारा है'

ख़त 4: 'पत्थरबाज़ लड़कियों के साथ ज़्यादती हो रही है'?

ख़त 5: 'तुम पर फ़ायरिंग होती तो तुम पत्थर नहीं मारती?'

ख़त 6: 'पत्थरबाज़ लड़कियों पर सेना ने फ़ायरिंग क्यों की?'

ख़त 7: 'कश्मीरी हूं, बाकी भारत में पढ़ने से डरती हूं'

ख़त 8: कश्मीरी किससे 'आज़ादी' चाहते हैं?

ख़त 9: कश्मीरियों के लिए ये हैं आज़ादी के मायने

ख़त 10: 'कश्मीर की तरह मानवता को आज़ादी चाहिए'


(रिपोर्टर/प्रोड्यूसर: बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य)

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