भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, जो जीता वो बनेगा सिकंदर

Image caption विराट कोहली

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में रविवार को ओवल में पिछले चैंपियन भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से है. दोनों ही टीमों के लिए यह 'करो या मरो' वाला मैच है.

विजेता टीम सेमीफाइनल में पहुंचेगी और हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. इसकी वजह है ग्रुप बी में शामिल चारों टीमों भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका ने दो-दो मैच खेले है, और एक-एक मैच हारा है.

सबके अंक बराबर है. भारत और दक्षिण अफ्रीका का उलटफ़ेर का शिकार होकर हारना भी एक बड़ा कारण है. दोनों ही टीमों की ताक़त बल्लेबाज़ी है.

भारत की सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा ने पाकिस्तान के ख़िलाफ 136 और श्रीलंका के ख़िलाफ 138 रन की साझेदारी की.

रोहित शर्मा ने पाकिस्तान के ख़िलाफ 91, धवन ने 68, कप्तान विराट कोहली ने नाबाद 81 और युवराज सिंह ने 53 रन बनाए.

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Image caption शिखर धवन

श्रीलंका के ख़िलाफ तो शिखर धवन ने 125 रनों की शतकीय पारी खेली वहीं रोहित शर्मा ने भी शानदार 78 रन बनाए.

विराट कोहली खाता नहीं खोल सके तो युवराज सिंह भी जल्दी चलते बने. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने 63 रन बनाकर पारी संभाल ली.

दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के पास कप्तान क्विंटन डी कॉक के अलावा हाशिम आमला, एबी डिविलियर्स, जेपी डूमिनी और डेविड मिलर जैसे धुआंधार बल्लेबाज़ हैं.

एबी डिविलियर्स और क्विंटन डी कॉक का बल्ला इन दिनों नहीं चल रहा है, लेकिन अगर वह भारत के ख़िलाफ चल निकला तो भारी पडेगा. हाशिम आमला एक बार जमने के बाद गेंदबाज़ो के लिए सिरदर्द से कम नहीं है.

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Image caption हाशिम आमला और एबी डिविलियर्स

श्रीलंका के ख़िलाफ तो आमला ने 103 रन ठोंके. यह उनका 25वां एकदिवसीय शतक था. इसके अलावा वह आईपीएल-10 में भी जमकर चमके थे.

गेंदबाज़ी में दक्षिण अफ्रीका के पास इमरान ताहिर जैसा माहिर स्पिनर है. कैगिसो रबाडा, मोर्ने मोर्कल, वेन पार्नेल और क्रिस मौरिस जैसे तेज़ गेंदबाज़ भी है.

भारत ने अपना पहला मुक़ाबला पाकिस्तान से 124 रन से अपने नाम किया. लेकिन इसके बाद श्रीलंका के हाथों सात विकेट से हारना उसे भारी पड़ा.

इसी तरह दक्षिण अफ्रीका ने पहला मैच श्रीलंका से 96 से जीता लेकिन अगले ही मैच में वह पाकिस्तान से डकवर्थ-लुइस नियम के आधार पर 19 रन से हार गया.

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Image caption इमरान ताहिर

अब ऐसा भी नहीं है कि श्रीलंका की भारत पर सात विकेट से जीत कोई तुक्का थी. अगर कोई टीम जीत के लिए 322 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही हो और जीत जाए तो उसकी बल्लेबाज़ी में दम तो होगा ही.

रही बात भारतीय गेंदबाज़ी की तो कभी लगा ही नहीं कि इसमें कोई धार है. यह वही भारतीय गेंदबाज़ी है जिसने अभ्यास मैचों में न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर दिया था.

न्यूज़ीलैंड की टीम भारत के ख़िलाफ अभ्यास मैच में 189 रन बना सकी थी तो बांग्लादेश की पूरी टीम 84 रन पर ढेर हो गई थी. भुवनेश्वर कुमार, उमेश यादव, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और रविंद्र जडेजा सब श्रीलंका के ख़िलाफ़ रन रोकने में नाकाम रहे.

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Image caption रविंद्र जडेजा-महेंद्र सिंह धोनी

पाकिस्तान के ख़िलाफ पहले मैच में भारतीय गेंदबाज़ों ने जैसी लय पकड़ी उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि श्रीलंकाई बल्लेबाज़ उसका यह हाल करेंगे.

पाकिस्तान को भारत ने 33.4 ओवर में ही 164 रन पर समेट दिया था. तो क्या एक मैच से ही भारतीय गेंदबाज़ी खराब हो गई, और अब किन गेंदबाज़ों के साथ भारत खेले.

क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का मानना है कि भारत को केदार जाधव की जगह आर अश्विन और उमेश यादव की जगह मोहम्मद शमी को टीम में शामिल करना चाहिए.

दक्षिण अफ्रीका की टीम में खब्बू बल्लेबाज़ों को कारण विजय लोकपल्ली आर अश्विन को टीम में रखने की बड़ी वजह मानते हैं.

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Image caption आर अश्विन

इसके अलावा विजय लोकपल्ली यह भी मानते हैं कि भारत को अपने क्षेत्ररक्षण का स्तर हर हाल में उठाना होगा. तीन रन को दो में और दो को एक रन में बदलना होगा. हर कैच भी पकड़ना होगा.

वैसे भारत इससे पहले चैंपियंस ट्रॉफी में तीन बार दक्षिण अफ्रीका को हरा चुका है. इतिहास बताता है कि दक्षिण अफ्रीका ऐसे दबाव वाले मैच में बिखर जाती है.

तो क्या रविवार को इतिहास अपने आप को दोहराएगा और टीम इंडिया जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंचेगी. थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा वह भी दिल थामकर.

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