साल भर पहले ही पकड़ा गया था तारेक फतेह की सुपारी लेने वाला

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दिल्ली पुलिस ने 21 साल के एक लड़के जुनैद चौधरी को मुस्लिम कनेडियन कांग्रेस के संस्थापक तारेक फ़तह पर हमला करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

जुनैद चौधरी नाम के इस युवा को गैंगेस्टर छोटा शकील का सहयोगी और उनका शार्पशूटर बताया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के पीएस कुशवाहा के अनुसार जुनैद ने पाकिस्तान में पैदा हुए कनाडा के लेखक और मुस्लिम कनेडियन कांग्रेस के संस्थापक तारेक फ़तह की हत्या के लिए एक डेढ़ लाख रुपये लिए थे.

हालांकि ये रकम हथियारों की खरीद के लिए थे. इसके बाद उन्हें कितने रूपये और मिलने वाले थे इसकी अभी जानकारी नहीं है.

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दिल्ली के भागीरथ विहार में रहने वाले जुनैद चौधरी के पिता दूध का व्यवसाय करते हैं और उनकी मां एक गृहिणी हैं.

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले जुनैद ने कक्षा नौवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और इसके बाद वो बुरी संगत में पड़ गए. जिन लोगों के साथ उनकी उठना बैठना था वो ड्रग्स का शौक रखते थे.

एक बार टीवी या सोशल मीडिया पर जुनैद ने छोटा शकील का नंबर देखा जिसके बाद वो उनसे संपर्क में आए.

बाद में वो उनके लिए काम करने लगे और धीरे-धीरे उनके ख़ास सहयोगी बने.

विवादों के क़िले फ़तह करने वाले तारेक़

छोटा शकील ने जुनैद को तारेक फ़तेह की रेकी करने के लिए कहा था. यानी कि ये पता लगाने के लिए कि वो कब कहां जाते हैं, कैसे जाते हैं, किन-किन लोगों से मिलते जुलते हैं. किसी भी अपराध को अंजाम देने की दिशा में पहली कड़ी यही होती है.

पिछले साल पकड़ा था पुलिस ने

जुनैद को पिछले साल पुलिस ने पकड़ा था. उस समय वो एक गैंग का हिस्सा थे. इस गैंग में शामिल उनके दोस्तों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

जुनैद को जमानत पर छोड़ना पड़ा था. पुलिस के अनुसार उनकी जमानत भी कैंसल करवाई गई थी लेकिन फिर बाद में दोबारा उन्हें जमानत पर छोड़ना पड़ा.

इसके बाद जमानत पर ही जुनैद ने एक बिल्कुल नया गिरोह तैयार किया जिसमें उनके साथ दो अन्य लोग भी थे.

जुनैद का टारगेट थे तारेक फ़तेह.

पुलिस के अनुसार तारेक की हत्या की साजिश के मास्टरमाइंड जुनैद ही थे. इन तीनों ने हवाला के ज़रिए 1.5 लाख रुपये हथियारों के लिए लिए थे.

पुलिस को अपने सोर्सेस से इस बारे में जानकारी मिली जिसके बाद जुनैद को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वजीराबाद इलाके से गिरफ्तार किया गया.

कौन हैं तारेक फतेह?

तारेक एक भारतीय टीवी चैनल पर एक कार्यक्रम करते हैं, 'फ़तह का फ़तवा.' इसमें वो मुसलमानों से जुड़े उन विषयों पर बात करते हैं जिन पर मुसलमानों के बीच सदियों से कभी खुल कर बात नहीं हुई है.

मुझसे भारत के मुसलमान नहीं मौलवी चिढ़ते हैं: तारेक़ फतह

हाल में बीबीसी के साथ एक फ़ेसबुक लाइव में उन्होंने कहा था कि मुझसे भारत के मुसलमानों को नहीं मौलवियों को मुश्किल होती है. ग़ज्वा-ए-हिंद मैंने तो नहीं लिखी, फिर मुझ पर लोगों को क्यों ऐतराज़ है मुझे नहीं पता.

उनका मानना है कि भारत के मुसलमानों को लगता है कि अचकन नहीं पहनने वाला और उर्दू नहीं बोलने वाला मुसलमान नहीं है.

वो मानते हैं कि जो लोग बुर्का का इस्तेमाल करते हैं यानी अपना चेहरा छिपाते हैं उनको गिरफ्तार करना चाहिए. चेहरा कभी नहीं छिपाया जाना चाहिए. बुर्क़ा और इस्लाम का आपस में कोई संबंध है ही नहीं.

(पीएस कुशवाहा दिल्ली पुलिस उपायुक्त (स्पेशल सेल)के साथ बातचीत पर आधारित. उनसे बात की बीबीसी संवाददाता मानसी दाश ने)

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