महाराष्ट्र सरकार ने 31 लाख किसानों का क़र्ज़ माफ़ किया

  • 11 जून 2017
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महाराष्ट्र सरकार ने किसान नेताओं से मुलाक़ात के बाद किसानों के क़र्ज़ माफ़ करने का फ़ैसला लिया है.

किसानों ने भी अपना आंदोलन कुछ समय के लिए टाल दिया है. हालांकि किसानों ने ये भी कहा है कि यदि 23 जुलाई तक सभी मांगे पूरी नहीं हुईं तो फिर से आंदोलन होगा.

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्रियों और किसानों की बीच बैठक में ये फ़ैसला लिया गया है.

सरकार के लोक निर्माण मंत्री चंद्रकांत पाटिल के मुताबिक सरकार के फ़ैसले से 31 लाख किसानों को फ़ायदा होगा. कुल 30,500 करोड़ रुपए का क़र्ज़ माफ़ किया जा रहा है.

जिन किसानों के पास पांच एकड़ से कम ज़मीन है उनका क़र्ज़ माफ़ किया जा रहा है. बचे हुए किसानों के क़र्ज़ को लेकर 23 जुलाई तक फ़ैसला लिया जाएगा. सरकार का ये भी कहना है कि किसान नए क़र्ज़ ले सकेंगे.

चंद्रकांत पाटिल ने कहा, "प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के बाद सारे किसानों को क़र्ज़ माफ़ी देने के प्रस्ताव को मान्यता दी गई है. लेकिन जो छोटे किसान हैं उनका सारा क़र्ज़ इसी वक्त से माफ़ कर दिया गया है, वह कल से नए कर्जे के लिए बैंकों से आवेदन कर सकते है."

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Image caption महाराष्ट्र में किसान क़र्ज़माफ़ी को लेकर आंदोलन कर रहे थे

पाटिल ने कहा, "हालांकी सरकार ने क़र्ज़माफ़ी का निर्णय लिया है, लेकिन क़र्ज़ उन्ही किसानों का माफ़ होगा जो आजीविका के लिए पूरी तरह खेती पर निर्भर है. ब्लैंकेट क़र्ज़माफ़ी का मतलब यह नहीं कि जो किसान क़र्ज़ चुका सकते है, उनका भी क़र्ज़ माफ़ किया जाएगा,"

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से चर्चा करेगा.

महाराष्ट्र सरकार ने दूध की कीमतें बढ़ाने का भी निर्णय लिया है. दूध की नई कीमतें दो दिन के भीतर घोषित की जाएगी.

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किसानों ने सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया है. शेतकरी संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ दादा पाटील ने कहा, "आज किसानों को सही मायने में विजय प्राप्त हुई है. हम इस निर्णय का स्वागत करते है."

वहीं स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष और सांसद राजू शेट्टी ने कहा, "हम सरकार की सकारात्मक सोच से संतुष्ट है. लेकिन हमारी मांगे यदि 23 जुलाई तक पूरी न की गईं, तो 24 जुलाई से हड़ताल फिर शुरू हो जायेगी."

महाराष्ट्र में किसान क़र्ज़ माफ़ी को लेकर 11 दिनों से आंदोलन कर रहे थे जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था.

इसी साल अप्रैल में यूपी की नई सरकार ने 36000 करोड़ रुपए का किसानों का क़र्ज़ माफ़ किया था जिसके बाद अन्य राज्यों में भी किसान क़र्ज़ माफ़ी की मांग कर रहे थे.

ऐसी ही मांगों को लेकर मध्य प्रदेश में भी प्रदर्शन हो रहे हैं जहां पुलिस गोलीबारी में छह किसानों की मौत भी हुई है.

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