'सुरेश प्रभु को ट्वीट किया तो टीटी आया और गंदी चादर थमा गया...'

Image caption सुवर्णा राज और उनके पति प्रदीप राज ने बीबीसी हिंदी के साथ फ़ेसबुक लाइव में विक्लांगों से जुड़े मुद्दे उठाए.

भारत की पैरालंपिक एथलीट सुवर्णा राज को रेल यात्रा के दौरान फ़र्श पर सोना पड़ा.

उन्होंने रेलमंत्री को मदद के लिए ट्वीट किया तो डेढ़ घंटे बाद उनके पास टीटी तो पहुंचे लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई.

सुवर्णा राज और उनके पति प्रदीप राज ने बीबीसी हिंदी से फ़ेसबुक लाइव में संवाददाता दिव्या आर्य से बात की.

सुवर्णा राज टेबिल टेनिस के ख़ेल में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं और वो कई पदक भी जीत चुकी हैं.

सुवर्णा बताती हैं, "आमतौर पर हमें एक ऊपरी और एक निचली बर्थ मिलती है. हमने इसलिए टिकट पर ध्यान ही नहीं दिया लेकिन जब मैं ट्रेन में पहुंची तब जाकर पता चला कि हमें दोनों अपर बर्थ ही मिली हैं."

उन्होंने बताया, "हम ग़रीब रथ में सफ़र कर रहे थे जिसमें एक कोच विक्लांगों के लिए आरक्षित है."

'पहली बार किसी ने सीट न बदली'

वो बताती हैं, "जब हमने सहयात्रियों से सीट बदलने का आग्रह किया तो उन्होंने इनकार कर दिया. ये पहली बार हुआ है जब किसी ने हमसे सीट न बदली हो. ऊपरी बर्थ भी हमें पहली बार ही दी गई थी इससे पहले हमेशा एक सीट अपर होती थी और एक लोवर."

विकलांग नहीं दिव्यांग कहेंः मोदी

‘विकलांग को दिव्यांग ना कहें'

इमेज कॉपीरइट Suvarna Raj
Image caption सुवर्णा राज ने ये तस्वीर रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट की थी

सुवर्णा बताती हैं- "हमारी दिक्कत भरे सफ़र की शुरुआत तो टिकट खिड़की से ही हो जाती है. जब टिकट बुक करने हम खिड़की पर जाते हैं वो कहते हैं आप क्यों आए हैं, किसी और को भेज देते. जब हम किसी और को भेजते हैं तो वो उन्हें सामान्य लाइन में खड़ा कर देते हैं"

वो कहती हैं, "कई बार तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि रिज़र्वेशन लाइन पर ही मुझे पुलिस बुलानी पड़ती है."

रविवार रात के अपने सफ़र को याद करते हुए सुवर्णा बताती हैं, "हमारे रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट करने के डेढ़ घंटे के बाद टीटी आ गए थे. उन्होंने कहा कि आपको किसी और कोच में शिफ्ट कर देते हैं. मैंने किसी और कोच में जाने से इनकार कर दिया क्योंकि दूसरे कोच में व्हीलचेयर से जाने से बहुत दिक्कत होती है."

वो बताती हैं, "मैंने उनसे एक्स्ट्रा ब्लेंकेट मांगा तो उन्होंने मुझे जो ब्लेंकेट दिया उसमें किसी ने उल्टी कर रखी थी."

'दिव्यांग बोलने से कुछ नहीं होगा'

सुवर्णा के ट्वीट करने के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जांच के आदेश दिए हैं लेकिन सुवर्णा का कहना है कि इस दिशा में रेल मंत्रालय को जांच से कुछ ज़्यादा करने की ज़रूरत है.

वो कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि हम और मंत्री जी आमने-सामने बैठें और हमारी परेशानियों पर चर्चा हो. रेल मंत्री कुछ घंटे हमारे साथ में सफ़र करें ताकि उन्हें अहसास हो कि हम किन दिक्कतों का सामना करते हैं."

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विक्लांगों को दिव्यांग कहने की शुरुआत की है.

सुवर्णा को विक्लांगों के लिए दिव्यांग शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर भी नाराज़गी है.

वो कहती हैं, "जब भी दिव्यांग शब्द मेरे सामने आता है तो मुझे हंसी आती है. मैं नहीं जानती पीएम ने किसकी सलाह पर ये शब्द चुना है. बचपन से लोग मुझे लंगड़ी और पता नहीं क्या-क्या बोलते रहे हैं मुझे कभी इससे फर्क नहीं पड़ा."

वो कहती हैं, "सरकार हमें अच्छी नौकरियां देकर आगे बढ़ाए तब कुछ बेहतर होगा, दिव्यांग बोलने से हमारा कुछ नहीं होगा."

सुवर्णा के पति प्रदीप राज कहते हैं, "जब तक विक्लांगों के लिए बनने वाली नीतियां बनाने की प्रक्रिया में विक्लांगों को नहीं शामिल किया जाएगा तब तक चीज़ें बेहतर नहीं होगी."

वो कहते हैं, "1995 में संपूर्ण भागीदारी का क़ानून आया था लेकिन उससे भी बहुत कुछ नहीं बदला. 2016 में विक्लांग अधिकार क़ानून आया है जिसमें हमें बहुत से अधिकार दिए गए हैं. लेकिन हालात ये हैं कि आज भी हमें अपनी व्हीलचेयर उठाकर ले जानी पड़ती है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे