ब्लॉग: रवीना टंडन की साड़ी - 'भक्ति या सेक्सी?'

  • 14 जून 2017
'कुछ कुछ होता है' का दृश्य इमेज कॉपीरइट Dharma Productions

1998 में सिनेमा हॉल्स में वो पल जब सभी गहरी सांस लेते हैं. जब फ़िल्म 'कुछ कुछ होता है' में शाहरुख ख़ान को काजोल के लिए कुछ-कुछ होता है.

काजोल की साड़ी हवा में उड़ती है और उस पल में वो कूदती-फांदती 'टॉम बॉय' के खांचे से निकलकर ख़ूबसूरत अदाओं वाली भारतीय नारी की इमेज में अपनी जगह पक्की कर लेती हैं.

साड़ी जो भारतीय परिधान की गरिमा बनाती है और शिफ़ॉन की साड़ी जो जितना छिपाती है उतना ही रिझाती भी है.

रवीना टंडन की साड़ी का 'ट्रोल-हरण'

साड़ी में टेरीज़ा मे, सोशल मीडिया पर वाह-वाह!

फ़िल्म के एक और सीन में बास्केटबॉल खेलते हुए भी साड़ी में काजोल की अध-छिपी कमर को छूने और छेड़ने की शरारत होती है.

मर्दों को छोड़िए हॉल में साड़ी पहने बैठी औरतें भी सोच में पड़ जाती हैं.

बदलाव का दौर

जो छोटे वेस्टर्न कपड़े काजोल के लिए नहीं कर सके वो साड़ी ने कर दिखाया.

पुराने ख़्याल वाली, शादीशुदा या उम्रदराज़ औरतों से जोड़ी जानेवाली परंपरागत साड़ी को देखने का ये नया नज़रिया था.

इमेज कॉपीरइट T Series

जो कुछ मायने में दस साल पहले बदलना शुरू हुआ था.

1987 में 'काटे नहीं कटते ये दिन ये रात' में श्री देवी ने शिफॉन की साड़ी में और फिर 1992 में 'धक-धक करने लगा' में माधुरी दीक्षित ने इसे झकझोरा था.

नब्बे के दशक का ये वो दौर था जब देश अपने बाज़ार खोल रहा था.

उदारवाद के ज़माने में बदलती सोच के लिए दरवाज़े ख़ुल भी रहे थे और अपनी धरोहर-संस्कृति को संजोने के रास्ते भी नहीं छोड़ने थे.

इमेज कॉपीरइट Inder Kumar

इसी उधेड़बुन में थीं वो छिपाने-दिखाने वाली दहलीज़ें बदलने और लांघने वाली साड़ियां.

वहीदा रहमान, शबाना आज़मी और हेमा मालिनी की कॉटन की साड़ियों से बिल्कुल अलग.

खांचा ढूंढ़ते रह गए लोग

ये दौर रेखा की प्रिंट वाली आम शिफ़ॉन की साड़ी से भी परे था, ख़ास था.

पर साड़ी में बदलाव की असली आंधी तो अभी आनी थी क्योंकि अभी ब्लाउज़ का स्लीवलेस होना बाक़ी था.

इमेज कॉपीरइट Red Chillies Entertainment

इसका आगाज़ हुआ जब सुष्मिता सेन ने साल 2004 की फ़िल्म 'मैं हूं ना' में कॉलेज प्रोफ़ेसर का एकदम अनदेखा-अनसुना-असहज शिफ़ॉन की साड़ी पहनने वाला किरदार निभाया.

साड़ी ने किरदार को अध्यापक की इज़्ज़त बख़्शी और स्लीवलेस ब्लाउज़ ने ख़ूबसूरत बदन की अदा को निखारा.

या बिना लाग-लपेट के कहें तो 'सेक्सी' बनाया.

इमेज कॉपीरइट Dharma Productions

भारतीय और 'सेक्सी' के इसी मेल पर असली मुहर लगी 2008 में जब प्रियंका चोपड़ा ने 'नाम-मात्र' ब्लाउज़ के साथ शिफ़ॉन की साड़ी पहन बताया की 'देसी गर्ल' कैसी होती हैं.

वो लाखों परदेसी लड़कियों से ज़्यादा 'हॉट' थी जिसकी क़मर पर नज़र पड़ते ही सारे सपनों में रंग भर जाते थे.

विद्या बालन जैसी नायिकाओं ने फिर से सूती साड़ी को जगह देने की बहुत कोशिश की पर औरतों की ख़ूबसूरती का पैमाना और बदन की नुमाइश पसंद करनेवाला ज़माना बदल गया था.

2011 की 'रा-वन' फ़िल्म में शिफ़ॉन की साड़ी पहने करीना कपूर को तो पल्लू उतारकर डांस करते फ़िल्माया गया.

इमेज कॉपीरइट Red Chillies Production

लगता है कि लोग तो खांचा ही ढूंढते रहे.

इमेज कॉपीरइट Twitter Raveena Tandon

1994 में 'टिप-टिप बरसा पानी' में पीली शिफ़ॉन की साड़ी पहनने वाली रवीना टंडन भी साड़ी पर ट्विटर पर किए अपने ही तंज़ में फंस गईं.

और साड़ी और ब्लाउज़, बाज़ार और ज़माने की रफ़्तार से दौड़कर रेस जीतते रहेंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे