एमपी में शिवराज और सुषमा के क्षेत्र में किसानों ने की आत्महत्या

  • 15 जून 2017
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हाल के दिनों में मध्यप्रदेश के सिहोर, विदिशा और होशंगाबाद ज़िलों में तीन किसानों ने आत्महत्या कर ली.

ये आत्महत्याएँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह ज़िले और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र में हुई है.

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में अपने बेटे और देवर के साथ पति हरि सिंह जाटव का पोस्टमार्टम करवाने पहुँची लीला बाई बिलख-बिलख कर अपने पति की मौत के लिए सिस्टम को ज़िम्मेदार बताती हैं.

सिर्फ लीला बाई ही नहीं बल्कि सिहोर ज़िले की बती बाई और होशंगाबाद जिले की निर्मला बाई के पतियों ने भी आत्महत्या की है.

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आत्महत्या करने वाले तीन किसानों की कहानी

हरि सिंह जाटव, 40 वर्ष

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विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील के ग्राम जीरापुर के किसान हरि सिंह जाटव(40) ने सोमवार रात ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली.

उनके बेटे गौरव के मुताबिक वो ज़मीन के बंटबारे में अपने हिस्से की ढेड़ बीघा ज़मीन के ग़लत सीमांकन से परेशान थे. परिजनों का कहना है कि सीमांकन के बाद से हरि सिंह काफी दुखी थे. हरि सिंह जाटव के पास कुल 6 बीघा ज़मीन थी जिससे वो अपने परिवार का भरण पोषण करते थे.

इसी ज़मीन को लेकर हरि सिंह का कुछ समय से परिवार वाले विवाद चल रहा था. उनके बेटे का आरोप है कि परिवार के लोगों ने पटवारी से मिलकर तीन दिन पहले बिना हरि सिंह को सूचना दिए सीमांकन करवा लिया. आरोप है कि सीमांकन के बाद उनकी डेढ़ बीघा ज़मीन कम हो गई थी.

दूलचंद, 55 वर्ष

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Image caption दूलचंद पर बैंक और साहूकारों का क़रीब छह लाख रुपए कर्ज़ था.

सिहोर के रेहटी तहसील के ग्राम जायना में रहने वाले किसान दुलचंद (55) ने मंगलवार सुबह कीटनाशक पीकर आत्हत्या कर ली. उनके बेटे शेर सिंह के मुताबिक उन पर कुल छह लाख रुपए का कर्ज़ था जिसमें से चार लाख बैंक के और दो लाख साहूकारों के थे.

शेर सिंह के मुताबिक एक ओर जहां उनके पिता कर्ज़ से परेशान थे वहीं दूसरी और उनकी मूंग की फसल भी सूख गई थी. दूलचंद के परिवार में पत्नी, तीन लड़के और एक अविवाहित बेटी हैं.

माखनलाल लोवंशी 68 वर्ष

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह ज़िले सीहोर से लगे होशंगाबाद की सिवनी मालवा तहसील के ग्राम भैरोपुर में किसान माखनलाल लोवंशी (68) ने खेत में खडे पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी. उनके परिजनों कहना है कि वो सुबह 4 बजे घर से घूमने का बोल कर निकले थे. सुबह 6 बजे उनका शव खेत में लगे आम के पेड़ से लटका मिला.

उनके बेटे राकेश के मुताबिक वो बैंक के कर्ज़ के चलते ज़मीन बिकने के बाद से परेशान थे. उन पर क़रीब छह लाख रुपए का कर्ज़ था. राकेश ने बताया कि जिला सहकारिता बैंक, केसीसी और क्षेत्रीय बैंक का कर्ज उनके ऊपर था, जिसको चुकाने के लिए उन्होंने ढाई एकड़ जमीन करीब नौ लाख रुपये में चाचा के बेटे को बेची थी. मृतक किसान माखनलाल लोवंशी वृद्ध पत्नी निर्मला बाई और दो पुत्रों को अपने पीछे छोड़ गए है.

होगी जांच

तीनों किसानों की आत्महत्या के मामलों में प्रशासन ने जांच की बात कही है. विदिशा जिले के मृतक किसान हरि सिंह जाटव के मामले में तहसीलदार इसरार ख़ान नेपटवारीयों की भूमिका की जाँच की बात कही है. वहीं राज्य के कैबिनेट मंत्री रामपाल सिंह ने कहा है कि दोषी कर्मचारी बख़्शे नहीं जाएंगे.

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