भारतीय भी कर रहे हैं अब लहरों पर सैर

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Image caption इशिता मालवीय, भारत की पहली महिला पेशेवर सर्फर

मानसून से ठीक पहले अरब सागर की लहरों पर अपने सफेद सर्फिंग बोर्ड के साथ उछलता कूदता हुआ 12 साल का लड़का दिखाई पड़ता है.

लहरों के गिरते ही लड़का गायब हो जाता है.

लेकिन कुछ सेकेंडों के बाद ही ये बच्चा एक बार फिर लहरों पर नाचता हुआ नज़र आता है. और, तट पर खड़े लोग खुशी से नाचने लगते हैं.

ये कहानी है महाबलीपुरम के अखिलान की. मछुआरों में परिवार में जन्म लेने वाले अखिलान ने पांच महीने पहले ही पड़ोस में रहने वाले युवा सर्फर्स से लहरों पर कलाबाजियां खाना सीखा है.

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लेकिन अखिलान के लिए अब सर्फिंग ही उनकी ज़िंदगी है.

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Image caption 11 साल के अखिलान करते हैं लहरों पर सैर

सुप्रिया वोहरा कहती हैं कि समुद्री मछुआरों से लेकर शहरों में जिंदगी तलाशने वाले लोगों के बाद अब भारत में युवा सर्फर्स में काफी बढ़ोतरी हो रही है.

भारतीय सर्फिंग स्टार्स की इस कहानी में 17 साल की तन्वी जगदीश से लेकर 16 साल अनीशा नायक की कहानियां भी शामिल हैं.

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सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और सर्फ फोटोग्राफर राममोहन प्रांजापे कहते हैं, "भारत में हमनें तीन तरह के सर्फर देखे हैं - 1 - छुट्टियों में सर्फिंग करने वाले भारतीय, 2 - सर्फिंग करने के दीवाने भारतीय जो मौका मिलने पर सर्फिंग करने का वक़्त निकाल लेते हैं, 3 - ऐसे भारतीय जिन्होंने सर्फिंग को ही अपना पेशा बना लिया है.

कर्नाटक के तटीय इलाके मल्की में स्थित इस फेडरेशन को अंतर्राष्ट्रीय सर्फिंग एसोशिएसन की ओ से भारत में सर्फिंग से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता मिली है.

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Image caption लहरों पर उछल-कूद करतीं दक्षिण भारत की सर्फर सुहासिनी दामियां

फेडरेशन के मुताबिक, भारत की 7500 किलोमीटर की तट रेखा पर 20 सर्फिंग स्पॉट हैं.

ये फेडरेशन प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग प्रोग्राम देने के साथ-साथ भारत में सर्फिंग की ट्रेनिंग देने स्कूलों की लिस्ट भी देता है. इसके साथ ही भारत में सर्फिंग को पॉपुलर बनाने वाले फेस्टिवलों की मदद भी दी जाती है.

भारत में इस समय 60 पेशेवर हैं जिनमें 8 महिलाएं हैं.

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तमिलनाडु में पूर्वी तट के नज़दीक़ स्थित एक गांव कोवलॉन्ग में 28 साल के सर्फर सेकर पतचाई रहते हैं.

पतचाई कहते हैं, "मैंने साल 2011 में सर्फिंग की थी और मुझे बहुत मज़ा आया, इसके बाद मैंने लगातार सर्फिंग करने का फैसला किया."

कुछ ही महीनों में सर्फिंग सीखने वाले पतचाई ने सर्फिंग के साथ-साथ कायाकिंग और स्टैंडअप पैडलिंग जैसे सभी खेलों में महारथ हासिल कर ली है. अब वह कोवलॉन्ग प्वॉइंट सर्फ स्कूल में कोच के रूप में कार्यरत हैं.

वे कहते हैं, "खेलों के लिए लगन ही है जो मुझे ये करने देती है. लेकिन अब ये आर्थिक रूप से मेरे लिये फायदेमंद है. मेरी ये कमाई मछुआरे के रूप में मेरी कमाई से बहुत ज्यादा है. मेरे परिवार ने भी इसे स्वीकार कर लिया है. इसलिए मेरे भाई भी खेलों को गंभीरता से ले रहे हैं.

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Image caption सेकर पतचाई सर्फिंग के साथ-साथ कायाकिंग और स्टैंडअप पैडलिंग जैसे खेलों में भी महारथ हासिल कर चुके हैं

पतचाई अब तक दुनियाभर में हो रही तमाम प्रतियोगियाताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. भारत में इस खेल के लिए बढ़ता हुआ रुझान अपने आप में नया है, बस 13 साल पहले शुरू हुए खेल के बारे में.

लेकिन सर्फिंग स्वामी के नाम से चर्चित जैक हेबनर ने साल 1976 से ही भारत की लहरों पर चहलकदमी करना शुरू कर दिया था. उन्होंने इसी साल भारत आकर मैसूर में एक आश्रम में बनाया.

जैक हेबनर कहते हैं, "मैं पूरे देश में पांच स्टूडेंट्स को सर्फिंग के लिए ले जाया करता था, 1990 की शुरुआत में, शायद हम लोग ही भारत में इस खेल को खेल रहे थे."

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Image caption भारत की 7500 किलोमीटर की तट रेखा पर 20 सर्फिंग स्पॉट हैं.

साल 2004 में मल्की में मंत्र सर्फ क्लब हेबनर के आश्रम का हिस्सा बन गया. ये भारत में पहला औपचारिक सर्फिंग स्कूल था.

17 साल की तन्वी जगदीश इसी स्कूल की सर्फर हैं जिन्होंने हाल ही में फिज़ी एसयूपी चैंपियनशिप औप कैरोलिना कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

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अपने घरवालों का शुक्रिया अदा करते हुए तन्वी कहती हैं कि शुरुआत में उसके पड़ोसी उसका मज़ाक उड़ाया करते थे.

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Image caption 17 साल की सर्फर तन्वी जगदीश

तन्वी कहती हैं, "वे कहते थे कि एक लड़की पानी में कैसे जा सकती है. लेकिन मैंने कभी उनकी फिक्र नहीं की. अब सब उससे हाथ मिलाना चाहते हैं."

16 साल की अनीशा नायक कहती हैं कि उनकी मां ने उनका समर्थन किया लेकिन उनके घरवालों ने समर्थन नहीं किया.

अनीशा कहती हैं, "वे कहते थे, लेकिन तुम लड़की हो, इतनी गर्मी है बाहर, अगर तुम इतनी देर तक सूरज की रोशनी में रहोगी तो काली हो जाओगी, अगर तुम्हारे चेहरे और शरीर पर चोट लग गई तो, तुम्हारे भविष्य का क्या होगा, भविष्य से उनका मतलब मेरी शादी से था. लेकिन ये मेरा भविष्य नहीं है. मेरी जिंदगी में शादी से बढ़कर भी बहुत चीजें हैं.

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Image caption अनीशा नायक के लिए सर्फिंग स्विमिंग सीखने की थकान से बचने का तरीका था

अनीशा बताती हैं, "एक धारणा है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा कमजोर हैं और मैं इस धारणा को उस तरीके से गलत साबित करने जा रही हूं जिस तरह मैं कर सकती हूं."

बीते साल, 129वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने 2020 टोक्यो ओलंपिक खेलों में सर्फिंग को शामिल करने का फैसला किया है.

उनके लिए ये ओलंपिक खेलों को युवा वर्ग के बीच में पॉपुलर बनाने की कोशिश थी और इंटरनेशनल सर्फिंग एसोशिएसन के लिए इस फैसले ने इस खेल की पॉपुलैरिटी को बढ़ा दिया.

भारत में भी इस खेल के लिए रुझान बढ़ रहा है.

समर्थकों का कहना है कि भारत में सर्फरों के साथ साथ ट्रेनिंग कोर्स और स्कूलों का बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है. अब वे सिर्फ ये चाहते हैं कि राष्ट्रीय खेल संस्थाएं इसे लगातार समर्थन दें.

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