अलग-थलग पड़ा क़तर अमरीका से खरीदेगा लड़ाकू विमान

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क़तर ने 12 अरब डॉलर के एफ़-15 लड़ाकू विमान ख़रीदने के सौदे पर अमरीका से समझौता किया है.

वॉशिंगटन में अमरीकी रक्षा प्रमुख जिम मैटिस और उनके क़तरी समकक्ष के बीच सौदे के लिए दस्तख़त हुए हैं.

ख़रीद के बारे में ये क़रार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुआ है जिसमें उन्होंने क़तर पर 'चरमपंथ को उच्च स्तर पर आर्थिक मदद' देने का आरोप लगाया था.

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हालांकि वो इन आरोपों से इनकार करता रहा है. क़तर मध्यपूर्व में अमरीका का सबसे बड़ा सहयोगी है.

इलाक़े में अस्थिरता को बढ़ावा देने के आरोप में हाल ही में खाड़ी के कई देशों ने क़तर से अपने संबंध तोड़ लिए थे.

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क़तर पर आरोप

इन देशों ने उस पर कथित रूप से चरमपंथी समूहों का समर्थन करने और ईरान से संबंध रखने के आरोप लगाए थे.

क़तर में अमरीका का मध्यपूर्व का सबसे बड़ा एयर बेस अल उदीद है. यहां 10,000 अमरीकी सैनिक तैनात हैं. यह बेस बहुत महत्वपूर्ण है जहां से वो सीरिया और इराक़ में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अपने सैन्य अभियानों को अंजाम देता है.

हालांकि जब ट्रंप ने क़तर पर आरोप लगाए थे तो अमरीकी रक्षा विभाग इससे असहज दिखा. उसने एक दिन पहले ही इलाक़े की सुरक्षा के को लेकर क़तर की प्रतिबद्धता की तारीफ़ की थी.

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अमरीका-क़तर सहयोग

असल में अमरीका के एक अन्य सहयोगी सऊदी अरब ने इस महीने की शुरुआत में गैस संपन्न क़तर से संबंध तोड़ कर उसे अलग थलग करने की पहल की थी. रियाध ने अपनी सीमाएं सील कर दीं और क़तर के हवाई जहाजों पर पाबंदी लगा दी थी.

इके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने भी क़तर से संबंध तोड़ लिए.

समाचार एजेंसी रायटर्स ने क़तर के एक अधिकारी के हवाले से कहा, "लड़ाकू विमानों को लेकर हुआ ये सौदा इस बात का सबूत है कि अमरीकी संस्थाएं अभी भी हमारे साथ हैं और हमें इस बारे में कभी शक नहीं रहा."

इस अज्ञात अधिकारी के हवाले से समाचार एजेंसी ने कहा, "हमारी सेनाएं भाईयों की तरह हैं. क़तर के लिए अमरीकी समर्थन की जड़ें काफ़ी गहरी हैं और राजनीतिक उठा पठक से ये प्रभावित नहीं होने वाली हैं."

क़तर के रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने रायटर्स ने बताया कि दोहा 36 लड़ाकू विमान ख़रीद चुका है.

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हथियारों की होड़

इस सौदे के पहले अमरीका ने सउदी अरब को 100 अरब डॉलर के हथियार बेचने पर सहमति जताई थी.

क़तर और उसके पड़ोसियों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए तुर्की के विदेश मंत्री गुरुवार को कुवैत में हैं.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्देआन ने क़तर का समर्थन किया है और सउदी अरब के कदमों को अमानवीय और गैर इस्लामिक कहा है.

पिछले हफ्ते तुर्की की संसद ने क़तर में तुर्की सैन्य टुकड़ी को तैनात करने की इजाज़त दी थी. माना जा रहा है कि इसका मक़सद क़तर के प्रति समर्थन दिखाना था.

अंकारा ने खाने से भरे जहाज भी क़तर भेजे हैं, जोकि सउदी अरब से आयात पर पूरी तरह निर्भर है.

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