गोरक्षा से कितना चिंतित है मेघालय का 'बीफ़ बॉय'

  • 16 जून 2017
लाजोफार
Image caption लाजोफार का परिवार

भारत में पिछले कुछ महीनों से गोरक्षा, गोहत्या और बीफ़ बैन जैसे मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है. बीबीसी हिंदी की टीम जब इन मुद्दों पर पड़ताल करने मेघालय पहुंची तो वहां उसकी मुलाकात एक शख्स से हुई जिसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी गोमांस के इर्दगिर्द घूमती है.

ख़ूबसूरत पहाड़ों और वादियों को पार करके संकरी सड़क से होते हुए हम एक गाँव पहुंचे जिसका नाम ईयूपोमतियाह है.

घर ढूंढने में दिक्कत नहीं हुई क्योंकि 20 परिवारों वाले इस गाँव में सभी 'स्मोक्ड बीफ़' बेचने वाले को जानते हैं.

टीन की छत वाले घर के बाहर छोटी सी झोपड़ी है. चिमनी से धुआं निकल रहा है और खाना पकने की ख़ुशबू आ रही है.

घने धुंए के बीच एक व्यक्ति चूल्हे के ऊपर रखी लकड़ी की बक्से-नुमा देग की बगल में बैठा मिलता है.

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Image caption लाजोफार का घर

खासी जनजाति

37 साल के लाजोफार खरबुली ने मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत किया और बाहर बैठने को कहा.

मेघालय की राजधानी शिलॉंग से 20 मील दूर है ये नोंगक्रेम गाँव ईस्ट खासी हिल्स ज़िले का हिस्सा है.

यातायात के लिए सरकारी बस या टेम्पो ट्रैवेलर ही मिलता है.

लाजोफार खरबुली का जन्म यहीं हुआ था. चूंकि वे मेघालय की खासी जनजाति के हैं तो परंपरा अनुसार विवाह के बाद ससुराल में ही पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं.

लाजोफार खरबुली ने कहा, "आप खुशनसीब निकले क्योंकि आज बीफ़ ( गोमांस) के ऑर्डर ज़्यादा हैं इसलिए मुझे समय ज़्यादा लग रहा है."

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Image caption लाजोफार खरबुली

स्मोक्ड बीफ़ डिश

लाजोफार पिछले 13 वर्षों से एक ही काम कर रहे हैं.

तड़के सुबह गोमांस खरीदते हैं, उसे पका कर स्मोक्ड बीफ़ डिश बनाते हैं और रोज़ इसे शिलॉंग जाकर घरों और दफ़्तरों में बेचते हैं.

लाजोफार खरबुली ने बताया, "अब मेरे बंधे हुए ग्राहक हैं और पिछले सात-आठ सालों से मुझे बाज़ार जाकर बेचने की ज़रूरत नहीं पड़ी. हफ़्ते में तीन दिन कुछ घर-दफ़्तर तय रहते है और बचे दिन दूसरों के लिए."

बातचीत के दौरान उनकी बड़ी बेटी और बेटा स्कूल से लौट आए हैं और दौड़ते हुए लाजोफार की गोद चढ़ जाते हैं.

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घर के भीतर

पापा लाजोफार शायद पिछली शाम शहर से कुछ टॉफ़ियाँ लाए थे बच्चे इन्हे लेकर घर के भीतर चले गए.

घर की चौखट पर लाजोफार की पत्नी एक नवजात को गोद लिए दूध पिला रहीं हैं और शायद इस बात से चिंतित हैं कि इतने लोग कैमरे के साथ यहाँ क्या कर रहे हैं.

बहराल, लाजोफार खरबुली का स्मोक्ड बीफ़ अब पक चुका है और हरे पत्तों में बांध, वे अखबार से इसके पैकेट बना रहे हैं.

उन्होंने बताया, "रोज़ 15-20 किलो गोमांस खरीदता हूँ और पकाता हूँ. मेघालय के लोग स्मोक्ड बीफ बहुत पसंद करते हैं. रोज़ 250-300 की कमाई से बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च मुश्किल से चलता है."

Image caption लाजोफार शिलांग जाकर बीफ़ डिलीवरी करते हैं

बीफ़ और गाय

इस पूर्वोत्तर राज्य में गोमांस और खाना वैध है और ज़्यादातर लोग बीफ़ खाते हैं.

इसी के चलते लाजोफार अपने पांच बच्चों, पत्नी और सास-ससुर का पेट भी पालते हैं.

लेकिन पिछले कुछ दिनों से उन्हें एक चिंता सता रही है.

उन्होंने कहा, "हमारे यहाँ अख़बार नहीं आता. टीवी पर सिर्फ़ दूरदर्शन है और स्थानीय भाषा में रेडियो सुनते हैं. पिछले कुछ महीनों से बीफ़ और गाय पर इतनी खबरें सुन ली हैं कि अपने परिवार के लिए डर लगने लगा है."

Image caption लाजोफार घरों और दफ्तरों में बीफ़ पहुंचाते हैं

रोजी रोटी गोमांस

इस बातचीत के दौरान उनके परिवार के सभी सदस्य हमरे इर्द-गिर्द जमा हो चुके हैं.

क्योंकि सभी लोग स्थानीय भाषा में बात कर रहे हैं तो मेरे ट्रांसलेटर ने बताया कि ये सभी बीफ़ पर आ रहीं ख़बरों पर बात कर रहे हैं और लाजोफार खरबुली से पूछ भी रहे हैं कि 'कहीं हम कुछ कह कर मुसीबत में तो नहीं पड़ जाएंगे.'

तमाम आश्वासनों के बाद लाजोफार ने इतना ही भर कहा, "मेरी तो रोज़ी रोटी ही गोमांस है और आगे भी रहेगी. लेकिन देश में इस पर बहस छिड़ी है और मुझे उसकी ज़्यादा चिंता है. गलती से भी कभी यहाँ इस पर बैन लग गया तो हम सब भूखे मर जाएंगे."

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