मेघालय, जहां बीफ़ है बीजेपी के 'गले की हड्डी'

  • 17 जून 2017
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बीफ खाने से रोकने पर हत्या हो जाएगी

प्रदेश के सभी टॉप भाजपा नेता एक बड़ा आयोजन समाप्त होने के बाद लंच कर रहे हैं.

माहौल में ज़ायकेदार खाने की महक है और सभी का ध्यान प्लेट पर ही है.

दूसरी कड़ीः गोरक्षा से कितना चिंतित है मेघालय का 'बीफ़ बॉय'

भारत की गाय, बांग्लादेश जाए?

ये लोग चावल के साथ बीफ़ करी खा रहे हैं और बड़े आदर से साथ मुझे भी ऑफ़र करते हैं.

स्वागत है आपका मेघालय में जहाँ बीफ़ भाजपा की 'गले की हड्डी' बना हुआ है.

नाराज़गी

नोंगफू शहर में 8 जून को मोदी सरकार की उपलब्धियां बताने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन इंडियन ऑयल और एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनियों ने किया था.

लेकिन इस कार्यक्रम में राज्य के शीर्ष भाजपा का नेतृत्व मंच से भाषण दे रहा था.

ठीक इसी समय यहाँ से करीब 300 किलोमीटर दूर तूरा इलाके में बाचू मरक जैसे भाजपा के कुछ नेता पार्टी की 'बीफ़ नीति' से नाराज़ हो इस्तीफ़ा दे रहे थे.

बाचू मारक ने इस्तीफे के समय कहा था, "मैं स्थानीय लोगों की भावनाओं से समझौता नहीं कर सकता. गोमांस खाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है. भाजपा की ओर से हम पर ग़ैर-धर्मनिरपेक्ष विचारधारा थोपा जाना ठीक नहीं".

धर्म संकट

राजधानी शिलांग के बड़ा बाजार इलाके में राज्य की सबसे बड़ी बीफ़ मार्किट है जहाँ दोपहर बाद पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती.

बाजार से थोड़ी दूर एक रेस्टोरेंट में दर्जनों लोग खाना खा रहे हैं.

मालिक डब्लू लिंगदोह ने कहा, "मैं क्या खाऊँगा ये आप मुझे नहीं बताएंगे. बीफ़ खाने से रोकने की बात कीजिएगा तो लोग आपकी जान तक ले सकते हैं".

पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों की ही तरह मेघालय में गोमांस खाना वैध है और काफ़ी लोकप्रिय भी.

ये एक ऐसा राज्य भी है जहाँ भारतीय जनता पार्टी की कोई ख़ास पहचान नहीं रही है.

Image caption डब्लू लिंगडोह, रेस्टोरेंट मालिक

इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मेघालय में अपनी राजनीतिक पहचान बना कर आगामी विधान सभा चुनावों पर निशाना साध रखा है.

बीच में आ रही है बीफ़ और पशु वध जैसे संवेदनशील मामलों पर पार्टी की आम नीति जो गोमांस खाने वालों को बिलकुल विपरीत लगती है.

सफ़ाई

साल 2015 में जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मेघालय का अपना पहला दौरा किया था तो एक संगठन ने इसके विरोध में बीफ़ पार्टी का आयोजन किया था.

पार्टी तभी से लेकर बीफ़ पर अपनी नीतियों पर सफ़ाई देती रही है.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश के पार्टी के प्रभारी नलिन कोहली इस बात को दोहरा चुके हैं कि 'किसी के खाने पर कोई रोक नहीं लगेगी'.

लेकिन इसके बावजूद भाजपा का बीफ़-बैन को अप्रत्यक्ष समर्थन, पशु-वध के ख़िलाफ़ लाया गया नया लेकिन विवादित क़ानून और गोरक्षा नीति पर सोशल मीडिया में ख़ासा बवाल मचा रहा है.

Image caption जो थांकिएव

'कहीं पर मम्मी और कहीं पर यमी'

इस बात पर सवाल उठे हैं कि जब पार्टी कुछ राज्यों में बीफ़-बैन की बात करती रही हैं तो कुछ में वो बीफ़ खाने में हस्तक्षेप न करने की नीति पर कैसे क़ायम रह सकते हैं.

मेघालय के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शिबुन लिंगडोह के मुताबिक़ 'कहीं पर मम्मी और कहीं पर यमी' जैसे मुहावरे सोशल मीडिया की उपज हैं और उसका कोई मायने नहीं'.

उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी खाने पर कोई पाबंदी नहीं लगाएगी. मम्मी और यमी जैसा कुछ नहीं है, सिर्फ हमें रोकने की साज़िश है क्योंकि हम लोकप्रिय हो रहे हैं. इस बात को समझिए की मौजूदा विधान सभा में हमारे पास एक भी सीट नहीं. विपक्ष को लग रहा है कि हम उनके गढ़ में सेंध लगा रहे हैं इसलिए वे ये दुष्प्रचार कर रहे हैं".

Image caption मेघालय

लोकप्रियता

मेघालय में समय बिताने पर साफ़ दिखता है कि बीफ़ (गोमांस) यहाँ ज़्यादातर की पसंद है.

राज्य में ईसाई समुदाय के अलावा खासी, गारो और जैन्तिया जनजाति के मूल निवासी रहते हैं जो बीफ़ के अलावा पोर्क वैगेरह भी खाते हैं.

लेकिन ज़्यादातर इस बात से आहत दिखे कि भारत में बूचड़खानों को बंद करने के मामले से लेकर गोरक्षकों के हमले जैसे मामले हो रहे हैं.

राजधानी शिलांग से 20 मील पूरब में खासी हिल्स इलाके में हमारी मुलाक़ात जो थांकिएव से हुई जो एक होटल में दोपहर का भोजन कर रहे थे.

Image caption मेघालय में बीफ़ जीवन का हिस्सा है

राजनीतिक मुद्दा

उन्होंने कहा, "मेघालय में 90% लोग बीफ़ खाते हैं. ये हमारे पारंपरिक खाने का हिस्सा रहा है. अपनी संस्कृति क्यों छोड़े हम. अगर कोई भी व्यक्ति, संगठन या पार्टी हमें अपनी परंपरा से दूर करने की कोशिश करेगा तो सफल नहीं हो सकेगा".

बहराल प्रदेश में इन इन दिनों आलम ये है कि भाजपा के हर समारोह या कार्यक्रम में स्थानीय नेता मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही दोहराते फिर रहे हैं कि पार्टी खान-पान पर सभी की भावनाओं का आदर करती है.

उधर सत्ताधारी कॉंग्रेस पार्टी को इस बहस के तूल पकड़ने से एक बड़ा मुद्दा 'बैठे-बैठाए' मिल गया है.

मेघालय प्रदेश के वरिष्ठ कॉंग्रेस नेता जॉन खारशिंग ने कहा, "हैरान हूँ भाजपा की दोहरी बातों पर. कहीं पर बैन लगाते हैं और कहीं पर खुली छूट देने की बात करते हैं. मेघालय में ये सफल नहीं होगा".

साल 2018 में मेघालय और 2019 में अरुणाचल प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने हैं.

Image caption असम में जीत के बात भाजपा के निशाने पर मेघालय है

भाजपा निशाने पर

असम में भारी जीत दर्ज करने के बात भाजपा के निशाने पर ये दोनों प्रदेश हैं.

इन दोनों ही राज्यों में गोहत्या वैध है और लोगों के भोजन का अभिन्न हिस्सा भी.

लेकिन शिलांग की नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफ़ेसर एलएस गसाह इस बात से लेकर खासे चिंतित दिखे कि मेघालय जैसे राज्य में बीफ़ पर बहस अख़बारों में छप रही है.

उन्होंने कहा, "मेघालय में बीफ़ जीवन का हिस्सा है. भाजपा को अपनी नीतियां स्पष्ट करनी होंगी अगर यहाँ एक भी सीट जीतनी है तो. सिर्फ अप्रत्यक्ष आश्वासनों से काम नहीं चलेगा."

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