'लिंग काटने' का दावा करने वाली महिला बयान से 'पलटी'

  • 16 जून 2017
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केरल में एक धर्मगुरू का लिंग काटने के मामले में एकदम उलटा मोड़ आ गया है. धर्मगुरू पर बलात्कार की कोशिश का आरोप लगाने वाली युवती ने अब उनका बचाव किया है.

23 साल की महिला ने इस मामले में अभियुक्त श्रीहरि उर्फ़ गणेशानंद तीर्थपदा के वकील को कथित तौर पर पत्र लिखा है कि श्री हरि ने कभी उसका यौन शोषण नहीं किया है.

इस पत्र में लिखा है कि धर्मगुरु गणेशानंद बहुत दयालु और अच्छे इंसान हैं और परिवार के मुखिया की तरह थे.

श्रीहरि के वकील षष्ठमंगलम एस अजीत कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने महिला का कथित पत्र पोस्को मामलों के विशेष जज पी के मिनीमोल की अदालत में जमा कराकर श्री हरि की ज़मानत की अर्ज़ी दी है.

युवती ने बीबीसी से कहा, "हां, वो पत्र मैंने ही लिखा है, वो मेरी ही लिखावट है."

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उन्होंने बीबीसी को बताया, ''प्रथम दृष्टया ऐसा कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने अपराध किया है. उस लड़की का भी कहना है कि उन्होंने अपराध नहीं किया है. तो उन्हें ज़मानत क्यों नहीं मिलेगी?''

पुलिस पर आरोप

पत्र के मुताबिक इस महिला ने पुलिस पर पूरी कहानी को उल्टा कर पेश करने का आरोप लगाया है.

इसमें कहा गया है, '' पुलिस स्टेशन में उसके बयान को कई बार बदल-बदलकर कई बार लिखा गया है. मुझे मलयालम नहीं आती और ये बयान मुझे पढ़कर सुनाया नहीं गया. आखिरी बयान अधिकारियों ने लिखा था और जब मैं मेडिकल जांच के बाद लौटी तब मुझसे इस पर दस्तख़त कराए गए.''

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Image caption श्रीहरि का फ़ाइल फोटो

हालांकि पत्र में युवती ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वो 20 मई की रात स्वामी श्रीहरि का लिंग काटने के इरादे से चाकू लेकर गई थी और उसने अपने परिवार के एक क़रीबी अय्यप्पा दास के कहने पर ऐसा किया.

इस पत्र में लिखा है कि अय्यप्पा दास ने स्वामी और महिला के रिश्ते ये कहकर ख़राब करवाए थे कि स्वामी उसके माता-पिता को लूट रहे हैं.

हाथ से लिखे पांच पन्नों के इस पत्र में लिखा है, ''लेकिन, सौभाग्यवश या दुर्भाग्यवश, मैंने वो नहीं किया जो मुझसे कहा गया था. स्वामीजी रो पड़े और मैं वहां से भाग गई.''

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ये भी लिखा गया है कि अय्यप्पादास के कहे अनुसार वो एडीजीपी बी संध्या के घर गईं जहां छह-सात बार घंटी बजाई लेकिन किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला. फिर उसने 100 नंबर पर डायल किया और पुलिस आकर उसे पेथा पुलिस स्टेशन ले गई.

कथित तौर पर महिला ने आरोप लगाया है कि अय्यप्पादास ने पहले भी एडीजीपी संध्या से शिकायत करने के लिए उकसाया था लेकिन वो नहीं गई थी.

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पत्र में कथित तौर पर ये भी कहा गया है कि पुलिस ने उसे मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान में कही गई बातें दोहराने के लिए मजबूर किया.

लिंग किसने काटा?

पिछले महीने जब श्रीहरि का लिंग काटने की ख़बर सामने आई थी तब केरल के मुख्यमंत्री ने महिला की हिम्मत की दाद दी थी, मीडिया और सोशल मीडिया में भी इसकी काफ़ी चर्चा हुई थी.

इस बीच तिरुवनंतपुरम के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 54 वर्ष के श्रीहरि का ऑपरेशन किया गया था, डॉक्टरों ने कहा था कि उनका लिंग शरीर से 90 फ़ीसदी तक अलग हो गया था इसलिए उसे काट दिया था.

उसके बाद श्रीहरि ने पुलिस के सामने दावा किया था कि उन्होंने ख़ुद ही अपना लिंग काटने को कहा था क्योंकि उन्हें लगता था कि ये उनके किसी काम का नहीं है.

श्रीहरि के वकील अजीत कुमार का कहना है, ``मैं इतना जानता हूं कि ये पत्र उसी महिला ने लिखकर भेजा है. मैं अभियुक्त का प्रतिनिधि हूं. तो कैसे कहा जा सकता है कि वो सही कह रही है या ग़लत. मैंने ज़मानत की अर्ज़ी दी है और अब 19 जून को अदालत में बहस होगी.''

नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ''ये बचाव पक्ष का कहना है. पहले ये देखना होगा कि वाक़ई ये पत्र उसी महिला ने लिखा है या नहीं.''

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