जनहित याचिका शुरू करने वाले जस्टिस भगवती नहीं रहे

इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पीएन भगवती का 95 वर्ष की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया है.

जस्टिस भगवती को भारत में जनहित याचिकाओं की अवधारणा लाकर देश में न्यायिक एक्टिविज़्म की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है.

जस्टिस भगवती भारत के 17वें मुख्य न्यायाधीश थे और वो जुलाई1985 से दिसंबर 1986 तक भारते के सबसे बड़े न्यायिक पद पर रहे.

वो गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे. 1973 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था.

उनके परिवार में पत्नी और तीन पुत्रियां हैं.

जनहित याचिका

जनहित याचिका के साथ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व की शुरूआत करने का श्रेय जस्टिस भगवती को जाता है.

उन्होंने आदेश दिया था कि मूल अधिकारों के मामले में अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के लिए किसी व्यक्ति का उस मामले में सुने जाने का अधिकार होना ज़रूरी नहीं है.

उन्होंने अपने एक अहम फ़ैसले में कहा था कि क़ैदियों के भी मानवाधिकार हैं.

मेनका गांधी पासपोर्ट मामले में अहम फ़ैसला

1978 में उन्होंने मेनका गांधी पासपोर्ट मामले में अहम फ़ैसला देते हुए जीवन के अधिकार की व्याख्या की थी और आदेश दिया था कि किसी व्यक्ति के आवागमन पर रोक नहीं लगाई जा सकती है.

उन्होंने आदेश दिया था कि एक व्यक्ति के पास पासपोर्ट रखने का अधिकार है.

दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने 2 जुलाई 1977 को मेनका गांधी को भारतीय पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3) सी के तहत जनहित में एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था.

मेनका गांधी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर भारत सरकार को चुनौती देते हुए कहा था कि सरकार का अदेश संविधान में अनुच्छेद 21 के तहत मिले मूल अधिकारों का उल्लंघन है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे