दार्जिलिंग: लौट गए पर्यटक, होटलों पर ताले

  • 17 जून 2017
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Image caption स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सेना पेट्रोल कर रही है.

दार्जिलिंग में दोबारा भड़की हिंसा के बाद प्रमुख गोरखा नेता रोशन गिरी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है.

उन्होंने गोरखालैंड आंदोलन के बारे में गृहमंत्री को बताया और इस मामले में केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की.

गुरुवार की देर शाम नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात के वक्त उनके साथ दार्जिलिंग के भाजपा सांसद एसएस आहलूवालिया भी मौजूद थे.

रोशन गिरी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महासचिव हैं. पार्टी सुप्रीमो विमल गुरुंग के बाद उन्हें प्रमुख नेता के तौर पर मान्यता मिली हुई है.

रोशन गिरी ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि गृहमंत्री ने उनसे कहा है कि इस पूरे मामले पर केंद्र की पैनी नज़र है.

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Image caption दार्जिलिंग में हिंसक प्रदर्शनों के बाद पर्यटक वापस लौट रहे हैं.

रोशन गिरी ने बीबीसी से कहा, "हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलकर अपनी बात कहना चाहते हैं. हम उऩ्हें बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर हमें विरोध करने पर मजबूर किया है."

विमल गुरुंग के दफ्तर पर छापा

इधर, पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुवार की सुबह दार्जिलिंग के पाटलेबासा इलाक़े में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो विमल गुरुंग के दफ्तर पर छापा मारा.

यह दफ्तर उनके घर से सटा हुआ है. पुलिस ने दावा किया कि वहां से आपत्तिजनक वस्तुएं और हथियार बरामद किए गए हैं.

इसके बाद उनके दफ्तर को सील कर दिया गया.

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Image caption पुलिस ने गुरुंग के दफ़्तर से हथियार और नकदी मिलने का दावा किया है.

पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी सिद्धिनाथ गुप्ता ने बीबीसी से कहा- "पुलिस ने पक्की सूचना के बाद उनके दफ्तर पर छापा मारा था. वहां से बड़ी मात्रा में हथियार, विस्फोटकों और नगद रुपयों की बरामदगी की गई है. हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और ज़रुरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी."

छापे के बाद भड़की हिंसा

विमल गुरुंग के दफ्तर पर छापे के बाद दार्जिलिंग व आस-पास के इलाकों में हिंसा भड़क गयी.

गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के युवा विंग और महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने सिंगमारी स्थित पार्टी दफ्तर के पास जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.

इसके बाद पुलिस ने उनपर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया. इस दौरान कई लोग घायल हो गए.

मीडिया की गाड़ी में आगजनी

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Image caption मीडिया कर्मी पूजा मेहता का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी में आग लगा दी.

आक्रोशित भीड़ ने वहां एक न्यूज चैनल की गाड़ी में भी आग लगा दी.

उस गाड़ी से समाचार कवर करने गयीं पत्रकार पूजा मेहता ने बीबीसी को बताया कि उस वक्त वहां पुलिस के जवान मौजूद नहीं थे.

इसका फायदा उठाकर आंदोलनकारियों ने हमारी गाड़ी में आग लगा दी.

आंदोलनकारियों ने कैलिम्पोंग के पोडोंग पुलिस चौकी और सेरीकल्चर कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया.

पहाड़ पर बेमियादी बंद

अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर कई आंदोलन कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इन घटनाओं के बाद दार्जिलिंग समेत उत्तर बगाल के संपूर्ण पहाड़ी इलाकों में बेमियादी बंद की घोषणा की है.

इसका व्यापक असर पड़ा है. इस मौसम में पर्यटकों से गुलज़ार रहने वाले दार्जिलिंग में मौजूद लोग गुरुवार को अपना होटल खाली कर वापस चले गए.

इस कारण तमाम होटलों में ताले लटक गए हैं.

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सरकार चाहे तो हो सकती है बातचीत

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता व मशहूर टिप्पणीकार स्वराज थापा ने बीबीसी को बताया कि सरकार चाहे तो इस बंद से बचने का रास्ता निकाल सकती है.

केंद्र व राज्य की सरकारों को इस मुद्दे पर गोरखा समुदाय से बातचीत करनी चाहिए.

राज्यपाल से मिलीं ममता

इधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. उन्होंने राज्यपाल को दार्जिलिंग में चल रही पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी.

गुरुवार को ही कोलकाता पुलिस के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि दार्जिलिंग की हिंसा दरअसल खुफ़िया नाकामी का नतीजा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि दार्जिलिंग में पिछले 8 जून को हुई कैबिनेट मीटिंग के दौरान उनके कुछ मंत्रियों की हत्या की साज़िश रची गई थी.

दार्जिलिंग में कर्फ़्यू-सा नज़ारा

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बंद की घोषणा के बाद दार्जिलिंग में कर्फ्यू-सा नजारा है. लोग अपने घरों में कैद हैं और सड़कों पर या तो पुलिस के जवान हैं या फिर मीडिया वाले.

इस बीच सरकार ने यहां सेना, अर्द्धसैनिक बल और आर्म्ड पुलिस के अतिरिक्त टुकड़ियों की प्रतिनियुक्ति की है.

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