भैंसे के साथ हल में जुता कर्मयोगी किसान

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर के सालमबाद के किसान सीताराम अपने खेत में भैंसे के साथ ख़ुद भी जुत रहे हैं. पीछे उनकी पत्नी हल थामें हुए हैं.

देश में किसानों की परेशानियों पर हो रही चर्चा के बीच उत्तर प्रदेश के बिजनौर के किसान सीताराम की ये हालत किसानों की बेबसी को बयां करती है.

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बिजनौर के किसान सीताराम हल में जुतने के लिए मजबूर हैं.

महज़ 8 बीघे ज़मीन के मालिक सीताराम के पास सिर्फ़ एक पशु है और दूसरा ख़रीदने लायक पैसे हैं नहीं. इसलिए उन्हें खेत जोतने के लिए हल में ख़ुद भी जुतना पड़ता है.

बीबीसी से बात करते हुए सीताराम ने कहा, "मेरे पास सिर्फ़ एक पशु है इसलिए मुझे ख़ुद ही जुतना पड़ता है. एक टूटी-फूटी कोठरी है जिसमें मैं पड़ा रहता हूं. मुझे कहीं से मदद नहीं मिल रही."

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सीताराम का एक हाथ कटा हुआ है और उनका आधार कार्ड भी नहीं बन पाया. उनकी पेंशन मिलने भी दिक्कत पेश आ रही है.

अपने हाथ की ओर इशारा करते हुए आधार न बनने की वजह बताते हुए वो कहते हैं, "इसकी वजह से नहीं बन पा रहा हैं, आप मदद कीजिए शायद बन जाए."

लेकिन सीताराम की परेशानियां यहीं ख़त्म नहीं होती. उनका कहना है कि बीते दो सालों से उनकी ईख भी आग लगने से स्वाहा हो रही है लेकिन उन्हें कोई मुआवज़ा नहीं मिला.

वो कहते हैं, "खेती में कुछ नहीं है. बीते दो साल से ईख में आग लग जा रही है. कोई मुआवज़ा नहीं. अनाज बो दो, तो जानवर खा जाते हैं. यहां कोई सहारा नहीं है."

इस मजबूर किसान की पत्नी मुन्नी देवी उनके साथ मज़बूती से खड़ी रहती हैं.

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बीबीसी से बात करते हुए मुन्नी देवी का आँखें भर आईँ. उन्होंने कहा, "मेरा मालिक हल में जुतता है, कंधा छिल जाता है. मैं क्या कर सकती हूं उनके पीछे चलने के अलावा."

वो कहती हैं, "इस ग़रीबी में हम अपने बच्चों को भी नहीं पढ़ा पाए, मज़दूरी में झोंकना पड़ा."

उनके बेटे राहुल जो पांच हज़ार रुपए महीना पर मज़दूरी करते हैं, कहते हैं, "दसवीं से आगे नहीं पढ़ पाया. हम ज़्यादा नहीं जानते इसलिए हमें कोई सरकारी मदद नहीं मिल सकी."

सीताराम का कहना था, "खेत में आग लगी लेकिन मुआवज़ा नहीं मिला. कर्ज़माफ़ी हुई लेकिन हमारे हिस्से कुछ नहीं आया. घर टूटा है फिर भी आवास नहीं मिला. हमारी हालत पर किसी का ध्यान नहीं."

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बीबीसी संवाददाता ने जब बिजनौर के ज़िलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी सीताराम के मामले के बारे में बताया तो उन्होंने तुरंत उनकी मदद करने का आश्वासन दिया.

अगले एक घंटे के भीतर उन्होंने सीताराम के परिवार को अपने घर बुलवा लिया.

डीएम जगतराज ने बीबीसी से कहा, "मैं तुरंत उनका आधार कार्ड बनवा रहा हूं ताकि सरकारी योजनाओं का फ़ायदा इस परिवार को दिया जा सके."

वो कहते हैं, "हम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सीताराम के परिवार को आवास दे रहे हैं और भी जितनी सरकारी योजनाएं हैं उनका लाभ उन तक पहुंचाने के लिए मंत्रालय को लिख रहे हैं."

(बिजनौर से नईम अंसारी ने इस रिपोर्ट में सहयोग किया)

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