प्रेस रिव्यू: पुलिस अफ़सर ने राष्ट्रपति के काफिले को रोका, एंबुलेंस को रास्ता दिया

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Image caption राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

अमर उजाला ने ख़बर दी है कि बेंगलुरु में एक सब-इंस्पेक्टर ने वीवीआईपी रूट के जाम में फंसी एक एंबुलेंस को निकालने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के काफ़िले को रोक दिया.

अखबार ने लिखा है कि 17 जून को शहर के ट्रिनिटी सर्कल पर सब इंस्पेक्टर एमएल निजलिंगप्पा ने आगे आकर एंबुलेंस को रास्ता दिया. इसके बाद वो सोशल मीडिया पर हीरो बन गए. बेंगलुरु पुलिस ने भी अपने इस अधिकारी के फ़ैसले की सराहना की है.

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Image caption प्रशांत तमांग

'द इंडियन एक्सप्रेस' ने ख़बर दी है कि गायकी के रियलटी शो 'इंडियन आइडल' से मशहूर हुए प्रशांत तमांग अब गोरखालैंड आंदोलन के पक्ष में एक गाना बनाने वाले हैं.

24 साल के प्रशांत कोलकाता पुलिस में कॉन्स्टेबल थे और 2007 में वह इस शो को जीत कर मशहूर हुए थे.

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'लेप्चा, भूटिया, बिहारी, मारवाड़ी सब गोरखा'

अखबार ने लिखा है कि काफ़ी देर बाद पहली बार कोई गोरखा व्यक्ति राष्ट्रीय पटल पर छाया था और आज गोरखा जनमुक्ति मोर्चा नेता बिमल गुरुंग ने उस समय उन्हें 'पहाड़ का गौरव' बताते हुए उनके लिए वोट मांगे थे.

इस घटना के एक दशक बाद आज अलग गोरखालैंड राज्य बनाने के आंदोलन के प्रमुख नेता हैं बिमल गुरुंग.

तमांग नेपाली फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता-गायक हैं. तमांग ने कहा है कि वह गोरखालैंड को अलग प्रदेश बनाए जाने की मांग का पुरज़ोर समर्थन करते हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स ने ख़बर दी है कि दिल्ली के पुराने क़िले की झील के नीचे एक 400 साल पुराना कुआं मिला है. झील का पानी करीब आठ महीने पहले सूख गया था, जिसके बाद पुरातत्व विभाग वहां खुदाई कर रहा है.

अख़बार ने लिखा है कि कुएं के अलावा खुदाई में पुरातत्व विभाग को झील में गुम हुए सौ से ज़्यादा मोबाइल फोन, चश्मे, बटुए और सैंडल भी मिले हैं.

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सीआरपीएफ़ ने छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में अपने 25 जवानों की हत्या को मानवाधिकारों का उल्लंघन मानने से इंकार कर दिया है.

सीआरपीएफ़ यदि अहम तो मुखिया बगैर क्यों?

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस ख़बर के मुताबिक, आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने अप्रैल में हुए हमले को जवानों के मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए उसकी जांच रिपोर्ट मांगी थी.

लेकिन सीआरपीएफ़ के सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा कि अगर मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन या भ्रष्टाचार का न हो तो आरटीआई कानून के तहत जानकारी देने की बाध्यता नहीं है.

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