मीरा कुमार आख़िर क्यों हैं यूपीए की पसंद

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विपक्षी दलों ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुक़ाबले पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया है.

31 मार्च 1945 को जन्मी मीरा कुमार दलित समुदाय से हैं और वे पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं. उनकी मां इंद्राणी देवी एक समाजसेवी थीं.

साल 2009 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में मीरा कुमार ने कहा था कि उन्होंने क़ानून की परीक्षा ज़रूर पास की है, प्रैक्टिस के लिए कोर्ट कभी नहीं गईं.

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वर्ष 1985 में वो पहली बार सांसद बनी, उन्होंने बिजनौर से चुनाव लड़ा था.

साल 2009 में मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर चुनी गईं थीं, उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लाल कृष्ण आडवाणी उन्हें स्पीकर की कुर्सी तक छोड़कर आए थे.

मीरा कुमार के साथ एक मुलाक़ात

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मीरा कुमार के बारे में एक वाकया बड़ा मशहूर है. साल 2012 में पाकिस्तान के दौरे पर गईं लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अपने भाषण में धाराप्रवाह उर्दू बोलकर पाकिस्तानी सांसदों और पत्रकारों को आश्चर्यचकित कर दिया था.

मीरा कुमार ने शुद्ध उर्दू में दिए अपने भाषण में फिराक गोरखपुरी, मजरूह सुल्तानपुरी और फैज़ अहमद फैज़ की कविताएँ भी पढ़ीं थी.

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एक नज़र मीरा कुमार के कैरियर पर

मीरा कुमार ने 70 के दशक में भारतीय विदेश सेवा में नौकरी की और कई देशों में नियुक्त रहीं.

वे भारत-मॉरिशस संयुक्त आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग में भी काम कर चुकी हैं.

राजनीति में उनका प्रवेश 80 के दशक में हुआ. वर्ष 1985 में वे पहली बार बिजनौर से सांसद चुनी गईं.

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वर्ष 1990 में वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकारिणी की सदस्य बनीं और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की महासचिव भी चुनी गईं.

वे दूसरी बार सांसद बनीं वर्ष 1996 में और संसद में तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरु की. वर्ष 2004 में बिहार के सासाराम से लोकसभा के लिए उनका चयन हुआ.

वर्ष 2004 की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में उन्हें सामाजिक न्याय मंत्री बनाया गया था. इस बार वे पाँचवीं बार संसद के लिए चुनी गई थीं.

साल 2009 में मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर चुनी गईं थीं. वो साल 2014 तक इस पद पर रहीं.

मीरा कुमार बनीं पहली महिला स्पीकर

लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वो बिहार के सासाराम से ही छेदी पासवान के ख़िलाफ़ लड़ी थीं और हार गई थी.

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