ग्राउंड रिपोर्ट: 'इस इलाके में पिछले रोज़े वाली बात अब कहां'

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Image caption शोभापुर में रहने वाले 13 साल के फ़ैयाज कहते हैं कि अब हमेशा डर लगा रहता है कि कोई खड़ा है जो उन्हें मार देगा.

"पिछले रमजान में हम एक साथ रोज़े खोलते थे. मस्जिद में मिल बांट कर खाते थे. घूमना-फिरना भी साथ-साथ होता था. सारे बच्चे खूब खेलते. खाते-पीते. फिर अंधेरा होने पर घर लौटते. बहुत अच्छा लगता था."

"अब तो सब बदल गया. डर लगता है. अम्मी अब खेलने नहीं जाने देतीं. बोलती हैं-कुछ हो जाएगा. रात को पेशाब लगने पर अब्बा को जगाते हैं. गुसलख़ाने तक अकेले जाने में डर लगता है. लगता है, कोई खड़ा है. कहीं मुझे मार न दे. अंधेरा होते ही पूरा गांव घर में कैद हो जाता है. इस साल पिछले रोज़े जैसी बात नहीं. सब बदल गया है. अब कुछ ठीक नहीं लगता."

13 साल के फ़ैयाज एक सांस में इतनी बातें बोल जाते हैं. नौंवी क्लास में पढ़ने वाले फ़ैयाज शोभापुर गांव में रहते हैं.

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यह वही शोभापुर गांव है, जहां पिछले महीने की 18 तारीख को ग़ुस्साई भीड़ ने चार लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

बच्चा चोरी की अफवाह में हुए कत्लेआम के 25 दिन बीत जाने के बाद भी शोभापुर में सन्नाटा है.

मानो जिंदगी गुंजाइश तलाश रही हो

गांव की मस्जिद के सामने जली पड़ी इंडिका कार उस हादसे मुनादी कर रही है.

मुर्तज़ा अंसारी के घर की टूटी खपरैल अब भी वैसी ही है. अलबत्ता, आगजनी में जले पेड़ की टहनियों के बीच कुछ ताज़े हरे पत्ते निकले हैं. मानो, ज़िंदगी अपनी गुंजाइश तलाश रही हो.

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शाम के साढ़े पांच बजे हैं. मस्जिद के पास कतार से रखे रंग-बिरंगे लोटे का पानी वजु के लिए तैयार है.

लोग आएंगे. इस पानी से वजु करेंगे. फिर इफ़्तार के बाद मगरीब की नमाज़ पढ़ी जाएगी. फिर अंधेरा छाएगा. और इसके अंधेरे से पहले ही लोग अपने घरों में कैद हो जाएंगे.

अल्ताफ़ हुसैन का दर्द

मैं अब 61 साल के टेलर मास्टर अल्ताफ हुसैन से मुखातिब हूं.

वो बताते हैं, "उस दिन तो हमलोग हताश हो गए कि आख़िर क्या हो रहा है. सब हल्ला करने लगे. इनको निकालो बच्चा चोर है. हमलोग मारेंगे."

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Image caption अल्ताफ़ हुसैन

वो कहते हैं, "घर में आग लगाने लगे. गाड़ी फूंक दी. वे चाहते थे कि हमलोग भी जवाब दें. हमें उकसा रहे थे. हम लोगों ने दिमाग से काम लिया. सोचे कि कानून को हाथ मे नहीं लेंगे. फिर भीड़ ने यहां शेख नईम, सज्जाद, शेख हलीम और सेराज खां को पीट-पीट कर मार डाला."

अब कैसा लगता है पूछने पर अल्ताफ़ हुसैन ने कहा, "डर लगता है. फिर मुतमईन भी हो जाता हूं कि वैसा फिर से नहीं भी हो सकता है. क्योंकि हमलोगों का सबसे ठीक रिलेशन रहा है. अब तो सरकार से ही इंसाफ की आस है. इंशाअल्लाह इस गांव को इंसाफ मिलेगा."

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इंसाफ की आस

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क्या शोभापुर के लोगों को इंसाफ़ मिलेगा? इसका मुकक्मल जवाब किसी के पास नहीं है. इस बीच झारखंड सरकार ने सरायकेला खरसांवा जिले (जिसकी चौहद्दी में शोभापुर गांव का भूगोल जिंदा है) के डीसी रमेश घोलप और एसपी राकेश बंसल को इस हादसे के लिए जिम्मेवार मानते हुए सस्पेंड कर दिया है.

जमशेदपुर ग्रामीण के एसपी शैलेंद्र बर्णवाल और कोल्हान के डीआईजी प्रभात कुमार का तबादला पहले ही किया जा चुका है.

कुछ गिरफ़्तारियां भी हुई हैं और गांव में अभी भी पुलिस के जवान तैनात हैं.

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