'जो हमारे साथ हुआ वो किसी के साथ ना हो': जुनैद के भाई

पुलिस इमेज कॉपीरइट Getty Images

गुरुवार रात एक लोकल ट्रेन से दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे एक 16 साल के एक मुसलमान युवक जुनैद हाफिज़ को ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला.

बल्लभगढ़ के पास खंदावली गांव के रहने वाले जलालुद्दीन के परिवार में उनके आठ बच्चे हैं.

जुनैद के साथ उनके भाई हाशिम और शाकिर थे और पड़ोस में रहने वाले दोस्त मोहसिन भी थे. जुनैद दिल्ली के सदर बाज़ार से ईद की खरीदारी कर घर लौट रहे थे. जुनैद के भाई हाशिम ने उस दिन की घटना के बारे में बीबीसी को बताया.

हम लोग सदर से चढ़े थे. वहां से ट्रेन खाली थी और ज़ाहिर सी बात है कि सीटें भी खाली थीं.

हम चार लोग थे तो आमने-सामने बैठ गए. वहां से आगे चले तो तिलक ब्रिज से एक बुजुर्ग भी उस ट्रेन में बैठे. उन्होंने मेरे भाई जुनैद से कहा कि मेरे लिए सीट छोड़ दे. जुनैद ने उनके लिए सीट छोड़ दी.

ईद की ख़रीददारी कर ट्रेन से जा रहे नौजवान की हत्या

एक रिक्शा वाले की हत्या, एक बस्ती में मातम...

धक्का मुक्की से बात शुरु हुई और धर्म कर जा पहुंची

ओखला पहुंचते-पहुंचते ट्रेन खचाखच भर गई थी और उसमें पैर रखने की भी जगह नहीं थी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ओखला में बीस-पच्चीस लोग चढ़े थे. और चढ़ने में धक्का मुक्की हुई. मेरे भाई जुनैद को धक्का लगा तो वो नीचे गिर गए.

इस पर हमने और जुनैद ने कहा कि धक्के क्यों मार रहे हो. उन्होंने मेरे सर पर टोपी देख कर कहा कि तुम मुसलमान हो, देशद्रोही हो, तुम पाकिस्तानी हो, मांस-मीट खाते हो.

उस व्यक्ति ने मेरे सर से टोपी हटा दी और मेरी दाढ़ी पकड़ने की कोशिश की. जब मैंने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मार-पीट शुरू कर दी.

वो दस-पंद्रह लोग थे और उन्होंने हम चारों को मारा था. मैं सबसे बड़ा था वहां पर, और तीनों मुझसे छोटे थे. (हाशिम के साथ उनके भाई जुनैद और शाकिर थे और साथ में पड़ोसी के बेटे मोहसिन थे)

सोशल मीडिया पैदा कर रहा है क़ातिलों की भीड़?

लोकतंत्र में भीड़तंत्र: क्या देश में अराजकता का राज है?

अगला स्टेशन तुगलकाबाद आने तक वो हमें मारते रहे. वहां से मैंने अपने भाई को फ़ोन किया और मदद के लिए बुलाया. मेरे बड़े भाई बल्लभगढ़ स्टेशन पहुंचे.

लेकिन बल्लभगढ़ पहुंचने पर उन लोगों ने हमें ट्रेन से उतरने नहीं दिया. वो हमें नीचे गिरा कर हमारे ऊपर चढ़े हुए थे.

भाई हमें बचाने के लिए ट्रेन पर चढ़े तो उन लोगों ने उन्हें भीतर खींच लिया और उसके साथ भी मार पिटाई की.

'जुनैद को मृत समझ पर छोड़ दिया था'

इमेज कॉपीरइट Haji Altaf

बल्लभगढ़ से कुछ लोग ट्रेन से उतरे और यहां से आगे ट्रेन चालू हुई तो उन लोगों ने चाकू निकाल लिया और शाकिर को मारना शुरू किया. जुनैद ने बीचबचाव किया तो उन्होंने जुनैद को भी मारा. मुझे भी मारा.

जुनैद को उन्होंने इतना मारा था कि वो नीचे गिर गए थे. उन्हें लगा कि जुनैद मर गए हैं तो अगले स्टेशन असावटी में उन्हें फेंक दिया. इसके बाद को ट्रेन की पिछली साइड से उतरे जबकि हम प्लेटफॉर्म से उतरे.

फिर हमने एंबुलेंस को फोन किया जो आधे घंटे में वहां पहुंची.

'वो रहम की भीख माँगता रहा, लोग वीडियो बनाते रहे'

'भाई की मौत का मंज़र मुझे सपने में भी डराता है'

ओखला से वो बीस-पच्चीस लोग चढ़े से, लेकिन पता नहीं बल्लभगढ़ तक बीस-पच्चीस ही थे. लेकिन वहां से ट्रेन चली तो हमें छोड़ कर पूरा डिब्बा गैर मुसलमानों से भरा था और पूरे डिब्बे के लोग एक हो गए थे. सब लोगों ने कहा ये मुसलमान हैं, देश द्रोही हैं मारो इनको.

जून के महीने में हम 16-17 घंटे रोज़ा रखे हुए थे. इसके बाद हमारे साथ मार पिटाई हुई. हम लोग रोज़ा भी नहीं खोल पाए थे.

इमेज कॉपीरइट AFP

कोई और हाफिज़ जुनैद ना बने

जो हमारे साथ हुआ वो किसी और के साथ ना हो. जिन लोगों ने ऐसा किया उन्हें जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त से सख्त सज़ा मिले.

हाफिज़ जुनैद नाम का कोई और, या कोई और मुसलमान भाई के साथ ऐसा ना हो.

हो सकता है कि आज मुसलमान मरा है कल किसी और हिंदू का व्यक्ति मरे. मारने वाले को यही काम करते हैं. हिंदू मुसलमान में झगड़ा ना हो.

जब अधिकारियों पर टूट पड़ी गौरक्षकों की भीड़

पड़ताल: गौसेवा करते मोदी और पहलू ख़ान के हमलावर

'हाफ़िज़ बनने पर खुश था जुनैद'

जुनैद के पिता जलालुद्दीन ने बताया कि जुनैद मेवात से नूंह में होस्टल में रह कर पढ़ाई कर रहे थे. रमज़ान को दौरान वो खुट्टी ले कर घर आए थे और उन्होंने क़ुरान पढ़ कर सुनाया.

क़ुरान पढ़ कर सुनाने वाले को हाफ़िज़ कहा जाता है और मेरा बेटा जुनैद हाफ़िज़ हो गया था. उसी खुशी में वो दिल्ली गया था.

पुलिस ने इस हादसे की वजह अभी तक नहीं बताई है लेकिन दो लोगों को गिरफ़्तार किया है जिनकी पहचान हो गई है.

(जुनैद हाफ़िज़ के भाई हाशिम और उनके पिता से बातचीत पर आधारित. उनसे बात की बीबीसी संवाददाता मानसी दाश ने.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे