प्रेस रिव्यू: 'जुनैद की मौत लेकिन स्टेशन पर किसी ने कुछ नहीं देखा'

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फरीदाबाद के जिस असावटी रेलवे स्टेशन पर जुनैद खान ने दम तोड़ा, वहां एक भी शख़्स ऐसा नहीं मिला जिसने कुछ होते हुए देखा हो.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की लीड स्टोरी इसी पर है. उसकी रिपोर्ट कहती है कि न तो स्टेशन मास्टर, न ही किसी अन्य रेलवे कर्मचारी ने, न नजदीक के पोस्ट मास्टर ने, न किसी यात्री और न ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी वेंडर ने कुछ होते हुए देखा.

अख़बार के मुताबिक असावटी रेलवे स्टेशन पर उस जगह लगे क्लोज सर्किट कैमरा टीवी के साथ भी छेड़खानी की गई थी. हां, जुनैद का शव प्लेटफॉर्म नंबर चार पर जिस जगह थोड़ी देर के लिए पड़ा रहा था, वहां ख़ून के कुछ धब्बे ज़रूर मौजूद थे.

गुरुवार रात एक लोकल ट्रेन से दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे एक 16 साल के एक मुसलमान युवक जुनैद हाफिज़ को ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला.

इमरजेंसी जैसे हालात में रह रहे हैं हमलोग?

काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज़ पढ़ेंगे मुसलमान

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लाभ का पद मामले में फंसे आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.

आम आदमी पार्टी की मुश्किल

निर्वाचन आयोग ने 'आप' विधायकों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि इनकी सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी.

हिंदुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने की अपनी लीड स्टोरी में निर्वाचन आयोग के हवाले से लिखा है, "आयोग की ये राय है कि ये 'आप' विधायक ने 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 के बीच संसदीय सचिव के पद पर बने रहे."

'जो हमारे साथ हुआ वो किसी के साथ ना हो'

हिन्दू राष्ट्र में रहने में कोई आपत्ति नहीं पर....

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सरकार और किसान, दोनों परेशान!

महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफ़ी से जुड़ी ख़बर को द हिंदु ने प्रमुखता से जगह दी है. जिसके मुताबिक किसानों के कर्ज माफ़ी की सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति किसान तय की गई है और 30 जून, 2016 से पहले कर्ज लेने वाले किसान ही इसका फ़ायदा उठा सकेंगे.

'द हिंदू' ने मुख्यमंत्री फडणवीस को ये कहते हुए बताया, "जिन किसानों ने अपने कर्ज नियमित तौर पर चुकाए हैं, उनके खातों में 25 फ़ीसदी (अधिकतम 25,000 रुपये) रकम सीधे जमा कराई जाएगी."

'पहलू ख़ान की तरह है अयूब पंडित की हत्या'

ईद की ख़रीददारी कर ट्रेन से जा रहे नौजवान की हत्या

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मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री नरोत्तम मिश्र की विधानसभा की सदस्यता चुनाव आयोग ने रद्द कर दी है.

टाइम्स ऑफ़ इडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नरोत्तम मिश्र ने निर्वाचन आयोग को अपने चुनाव अभियान के खर्चे का ग़लत ब्योरा दिया था.

'पिता कितने भी अमीर क्यों न हों, बेटे पर निर्भर माने जाएंगे.' दैनिक जागरण ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के इस फ़ैसले को अपनी एंकर स्टोरी बनाया है.

कोर्ट ने कहा है कि आश्रित की परिभाषा केवल आर्थिक आधार पर तय नहीं की जा सकती है. पिता की शारीरिक स्थिति भी देखी जानी चाहिए.

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