ब्लॉगः 'पाकिस्तान में 20 करोड़ तो भारत में 130 करोड़ जज'

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अशफ़ाक मसीह लाहौर में एक लाहौर में क्रिश्चियन साइकिल मकैनिक है. एक मुसलमान उससे साइकिल बनवाने आया. अशफ़ाक ने काम कर दिया.

साइकिल वाले ने कहा 'कितने पैसे?' अशफ़ाक मसीह ने कहा- 'पचास रुपये.'

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साइकिल वाले ने कहा कि 'पचास तो बहुत हैं, मैं तीस दूंगा.' अशफ़ाक ने कहा कि 'मैं पचास से एक पैसे कम नहीं करूंगा.' तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई.

जब अशफ़ाक मसीह ने ज़िद पकड़ ली तो साइकिल वाले ने शोर मचा दिया कि 'अशफ़ाक मसीह ने हमारे नबी हज़रत मुहम्मद का अपमान कर दिया है.'

भीड़ इकट्ठी हो गई. दुकान के मालिक ने समझदारी दिखाते हुए पुलिस को फ़ोन कर दिया. पुलिस आई और अशफ़ाक मसीह को गिरफ़्तार कर ले गई. पुलिस ने उस पर मुसलमानों के नबी के अपमान का पर्चा काट दिया.

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और उधर हिंदुस्तान में..

अगर पुलिस ऐसा न करती तो भीड़ न केवल पुलिस थाने पर हमला कर देती बल्कि अशफ़ाक मसीह का कीमा कर देती.

अब अशफ़ाक मसीह पर धार्मिक अपमान का मुकदमा चलेगा, जिसकी सज़ा कम से कम मौत है.

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कई वर्ष बाद भले ही वो छूट जाए, तब भी उसे कोई न कोई मार देगा.

जिस मुसलमान ने अशफ़ाक मसीह का जीवन पचास रुपये के लिए बर्बाद कर दिया, उसे कुछ भी नहीं होगा, भले ही अदालत उसे झूठा क्यों न साबित कर दे.

लाहौर में अशफ़ाक मसीह के साथ जिस दिन ये कांड हुआ, उसी दिन सीमा पार हरियाणा में एक ट्रेन में चार मुसलमान लड़कों के साथ किसी हिंदू मुसाफ़िर के साथ सीट को लेकर झगड़ा हो गया. मुसाफ़िर ने कहा कि ये लड़के नशे में हैं और ये जो खा रहे हैं, वो गाय का मांस है.

हुजूम ने चारों लड़कों की धुनाई शुरू कर दी हालांकि ये लड़के कहते रहे कि ये बात झूठी है.

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पाकिस्तान का पंजाब और उत्तर भारत की हालत एक जैसी

इनमें एक जुनैद ख़ान, जिसकी उम्र 16 वर्ष थी, इतना ज़्ख्मी हुआ कि मर गया. पाकिस्तान में किसी भी टीवी चैनल पर अशफ़ाक मसीह की ख़बर नहीं दिखी.

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उधर, भारत के श्रीनगर में हुजूम के हाथों मरने वाले पुलिस अफ़सर अयूब पंडित की ख़बर, जुनैद ख़ान की ख़बर खा गई.

पिछले 31 वर्ष में पाकिस्तान में धर्म के अपमान का 1,056 लोगों पर इल्ज़ाम लगाया गया, जिनमें 600 ग़ैर मुसलमान और 450 दोषी मुसलमान हैं.

पाकिस्तान में कुल 122 ज़िले हैं, लेकिन पिछले 31 वर्ष में इस्लाम और नबी की तौहीन के 80 प्रतिशत मामले पंजाब के सिर्फ आठ ज़िले में हुए.

वहीं, भारत में गौ माता के अपमान के अधिकांश मामले उत्तरी भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और राजस्थान में हुए और इसमें मुसलमानों के साथ साथ दलित भी चपेट में आए. जबकि दक्षिणी भारत और उत्तर पूर्व में बहुत कम मामले हुए.

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130 करोड़ जज

ये कितनी बड़ी सहूलियत है कि अगर भारत में किसी दलित या मुसलमान को रास्ते से हटाना हो तो गाय के अपमान का दोषी ठहरा दो और पाकिस्तान में किसी की शक्ल पसंद न हो तो इस्लाम की तौहीन का आरोप लगा दो.

फ़ैसला अदालत पहुंचने से पहले ही हो जाएगा और तुरंत होगा.

ज़रा सोचिये ऐसी दो अदालतों का जिनमें से एक में 20 करोड़ जज और दूसरी में 130 करोड़ जज हों.

फिर भी आप कहते हैं कि पाकिस्तान और भारत की सरकारें आम आदमी को इंसाफ़ देने में नाकाम हैं. बुरी बात. ऐसे थोड़े ही कहते हैं.

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